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कैसे बुढ़ापे की प्लानिंग करें अभी से ?

कैसे बुढ़ापे की प्लानिंग करें अभी से ? – Retirement planning in Hindi

कैसे बुढ़ापे की प्लानिंग करें अभी से ? – Retirement planning in Hindi

                                                                                                                                                                                                                                         क कहावत है कि “18 साल कि उम्र में ही तय कर लें कि 60 साल की उम्र में आनंद कैसे उठाना है ।” इसका मतलब यह है कि आपको बिना किसी देरी से आज से ही अपने भविष्य के बारे में प्लानिंग करने लग जाना चाहिए । एक सर्वे के अनुसार नाइजीरिया के ज्यादातर वयस्क सेवानिवृत्ति के लिए बचत नहीं करते । यह अध्ययन उन कारणों पर प्रकाश डालता है कि क्यों नाइजीरिया के लोगों की नियति में एक दयनीय बुढ़ापा बच्चों और अपनी देखभाल से जुड़ी जिम्मेदारियों का बोझ होता है। अगर आप उन चिंताओं से मुक्त होना चाहते हैं, जिसमें बुढ़ापे में आपको लोगों की देखभाल की जरूरत हो, तो 18 की उम्र से ही 60 की उम्र के बारे में सोचना शुरू कर दें । चलिए आज जानते हैं कि, कैसे बुढ़ापे की प्लानिंग करें अभी से ? – Retirement planning in Hindi.

  1. बेहतर प्लानिंग
  2. रिवर्स मोर्टगेज
  3. पेंशन प्लान  

रिटायरमेंट की बेहतर प्लानिंग  –

                                                                           क्या आपने भी अपनी सेवानिवृत्ति योजना के बारे में विचार किया है ? यदि आप यह साधारण प्रश्न किसी से पूछे तो हर बार एक अलग ही जवाब मिलेगा । उद्दाहरण के लिए जवाब देने वाला कह सकता है “क्या आप पागल हैं ? मेरी उम्र अभी 25 वर्ष है और आप मुझे  अभी से रिटायर करना चाहते हैं” या ”आप जानते हैं सेवानिवृत्ति की उम्र मेरे पिताजी की है, मैं तो अभी 35 वर्ष का हूं । मेरी सेवानिवृत्ति को अभी लम्बा समय है ” । या ”आपको ऐसा क्यों लगता है कि मैं अभी रिटायर हो जाऊं जबकि अभी मैं 43 का हूँ । मेरे ऊपर अभी मेरे बच्चों कि  पढ़ाई की जिम्मेदारी है। उसके बाद ही में अपना रिटायरमेंट प्लान करने की सोच सकता हूं।” या फिर ”मेरे रिटायरमेंट को बस आठ साल ही बचे हैं। मेरे पास मेरा पीएफ है और आगे देखा जाएगा, भगवान हैं न संभालने के लिए ।” वगैरा वगैरा, लेकिन सच्चाई इन जवाबों के उलट है। यानी अगर आप सेवानिवृत्ति की चिंताओं से मुक्त रहना चाहते हैं तो आपको जल्दी सोचना होगा । उसके बाद जब आप 60 साल की उम्र में पीछे मुड़कर देखेंगे तो अपनी पीठ को थपथपाएंगे । इसलिए आज से ही अपने रिटायरमेंट प्लान की आज से ही प्लांनिग शुरू कर दें । आईये देखते हैं कि कैसे तैयारी करे बेहतर रिटायरमेंट के प्लान की ।

25 से 30 वर्ष की उम्र वालों के लिए –

  • पीएफ और पीपीएफ खाता शुरू करें ।
  • लोन पर एक कार खरीदें ।
  • एक घर खरीदने के बारे में सोचना शुरू करें ।
  • लम्बी अवधि की स्टॉक रणनीति बनाएं ।
  • अब तक लाइफ इंश्योरेंस नहीं है, तो जल्द खरीद लें ।

31 से 40 वर्ष की उम्र वालों के लिए –

  • ईपीएफ में अधिक से अधिक योगदान करें ।
  • अधिक से अधिक कर बचाने वाले निवेश करें ।
  • एक घर और कार खरीदें और जहां तक हो सके अधिकतम ईएमआई से उसका भुगतान करें ।
  • जीवन बीमा खरीदें, अपनी सुरक्षा के लिए, न के निवेश के लिए ।
  • इक्विटी की मदद से वृद्धि से कदम मिलाएं।

41 से 50 वर्ष की उम्र वालों के लिए –

  • आपका होम लोन और कार लोन पूरा होने की स्थिति के करीब होना चाहिए ।
  • ईपीएफ और पीपीएफ अकाउंट को अधिकतम बनाए रखें ।
  • स्टॉक में जुनून के साथ बढ़ रहे हैं तो जोखिम की रफ्तार कम और ऋण लें ।
  • टर्म पॉलिसी की मदद से जीवन सुरक्षा को बनाए रखें।

 

51 से 58 वर्ष की उम्र वालों के लिए –

  • रिटायरमेंट से कम से कम पांच वर्ष पहले  अपने मेडिकल  इंश्योरेंस को टॉप-अप करें । –
  • रिटायरमेंट से पहले अपने सभी ऋणों का भुगतान कर दें ।
  • रिहायशी खर्च कम करने के लिए छोटा घर या शहर चुनें ।
  • रिटायरमेंट के बाद लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी के अंतर्गत कवर न हों ।
  • ऐसी कुशलताओं को विकसित करें , जो कि रिटायरमेंट के बाद आपके लिए कुछ आय की व्यवस्था कर सके ।
  • अगर आपने रिटायरमेंट अकाउंट नहीं शुरू किया है तो अब शुरू करें ।
  • अपने ईपीएफ और पीपीएफ अकाउंट को बनाए रखें ।
  • मेडिकेयर को महत्व दें ताकि भविष्य में होने वाले मेडिकल खर्चों से राहत मिले ।
  • जीवन योजनाओं की अवधि को अभी या जल्दी ही खत्म करने के लिए तैयार हो जाएं ।
  • अपनी कुछ राशि को इक्विटी या इक्विटी फंड में लगाएं ।

 

रिवर्स मोर्टगेज –

                                   रिवर्स मोर्टगेज ऐसे लोगों को ध्यान में रखकर शुरू की गई है, जो वृद्धावस्था में आर्थिक संकट का सामना करते हैं । ऐसे लोगों को संभालने के लिए उनके परिवार का कोई सदस्य नहीं होता । ऐसी दशा में उनके अलगअलग तरह के खर्चों को चुकाने के लिए उनके मकान के ऊपर उन्हें लोन दिया जाता है, जो हर महीने एक पेंशन के रूप में होता है । यह होम लोन और मोर्टगेज लोन से अलग है । इसके पात्र वही व्यक्ति होते हैं, जिनकी उम्र 62 वर्ष से अधिक होती है । सभी बैंकों में आयु सीमा अलग-अलग हो सकती है । इसका सबसे बड़ा फायदा है कि मकान के कागजात उसके मालिक के नाम ही रजिस्टर्ड होते हैं, इसलिए वह सुरक्षित होते हैं । रिवर्स मोर्टगेज की प्रक्रिया में आपके द्वारा बैंक में ऋण के लिए प्रार्थना पत्र देने पर बैंक का वरिष्ठ अधिकारी मौके पर जाकर है सम्पत्ति का मुआयना करता है और अपनी जरूरत के अनुसार उसके विषय में पूछताछ करता है और उससे जुड़े तमाम कागजात का मुआयना करता है । आश्वस्त होने के बाद ही वह आगे के लिए स्वीकृति प्रदान करता है ।

                                  संपत्ति के निरीक्षण के बाद उसका वास्तविक मूल्य आंका जाता है, जो समय-समय पर बदलता रहता है । ऋण की अवधि के समय आपको घर की वैल्यू भी समय-समय पर पता लगानी चाहिए ताकि बैंक की सुरक्षा बनी रहे । सामान्य तौर पर हर पांच साल  बाद संपत्ति की कीमत आंकी जाती है । रिवर्स मोर्टगेज की सुविधा के लिएआग, क्षति, भूचाल और घर के आपसी मामले से बचने के लिए आपकी सम्पत्ति का बीमा होना अनिवार्य है । उसके कागजात हमेशा आपके पास ताकि आपका ऋण ले आसान हो जाए ।

                               यह आपकी मोर्टगेज वैल्यू के पक्ष में होता है। अलग-अलग बैंक अपना अलग-अलग मार्जिन रखते हैं । यह संपत्ति की कीमत पर आंकी जाती है । अलग-अलग बैंकों की प्रक्रिया फीस भी अलग होती है । सामान्यतया अधिकतम राशि 0.25 प्रतिशत से 0.50 प्रतिशत होती है । ऋण की सीमा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नियमों के अनुसार तय होती  है यह राशि पर के कीमत का 60 प्रतिशत हो सकती है । अधिकतम या न्यूनतम राशि सुनिश्चित नहीं है । यह आमतौर यह देखकर सुनिश्चित (फिक्स) की जो कि ऋण लेने वाले व्यक्ति या उसके जीवन साथी की जीवित रहने की औसत अवधि कितनी है । एसबीआई और पीबीआई में यह 15 वर्ष है । सभी को का ब्याज अलग होता है । स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का पांच साल का ब्याज 10.75 प्रतिशत है । सामान्यतया महीने में एकमुश्त रकम दी जाती है ताकि अपने दैनिक खर्चों की पूर्ति कर सकें ।

                                      बैंक एक निश्चित समय के लिए यह लोन देते हैं और वह अवधि खत्म होने के बाद लोन देना बंद कर देता है । जिस व्यक्ति ने अपनी संपत्ति के एवज में बैंक से ऋण ले रखा है यदि उसकी मौत हो जाती है तो बैंक उस मकान को बेच सकता है । अगर उस व्यक्ति का कोई उत्तराधिकारी दावा करता है तो ऐसी दशा में बैंक उनसे ब्याज के साथ अपना लोन चुकाने के लिए कहेगा तभी वह मकान उसके उत्तराधिकारी के सुपुर्द किया जाएगा । बैंक उसी स्थिति में मकान को बेचेगा जब पति और पत्नी दोनों की मृत्यु हो जाती है या घर पर सरकार का अधिकार हो जाता है ।

रिवर्स मोर्टगेज किन खर्चों के लिए मिल सकता है –

  •  पहले मकान को बेचकर उसके स्थान पर नया मकान लेकर उसमें रहने के लिए ।
  • मकान की मरम्मत करवाने के लिए ।
  • चिकित्सा और हर दिन होने वाले खचों के लिए ।
  • कर के भुगतान के लिए ।
  • किसी यात्रा पर जाने के लिए ।
  • सामाजिक और अलग तरह के खर्चों के लिए ।
  • व्यापार, खरीदारी, नए मकान के निर्माण के लिए  ।
  • अपने व्यक्तिगत उददेश्यों के लिए मोर्टगेज लोन लेना ।

 

पेंशन प्लान –

                              पेंशन प्लान भी रिटायरमेंट को प्लान करने के लिए एक बेहतर विक्लप है । पेंशन दो तरह की योजना होती है । पहला एंडॉमेंट जिसमें आप पैसा निवेश करते हैं और दूसरा यूनिट लिंक्ड, जिसमें आप किसी बैंक से जुड़ते हैं । एंडॉमेंट योजनाए आपके रुपयों को फिक्स्ड इनकम प्रोडक्ट में निवेश करता है । आपको जो रिटर्न मिलता है, वह अपेक्षाकृत कम होता है । हालांकि यह एक सुरक्षित प्लान है ।

                               भारत में अवीवा के प्रबन्ध निदेशव बर्ट पैटर्सन पेंशन योजनाओं के बारे में दिलचस्प बात बताते हैं कि ”दो साल पहले तक ज्यादातर भारतीय परिवार अधिक से अधिक बेटों की चाह रखते थे । इसके पीछे उनकी मुख्य धारणा यह थी कि उनके जितने अधिक बेटे होंगे वृद्धावस्था के समय सभी मिलकर उनकी देखभाल करेंगे । गिरते प्रजनन दर और संयुक्त परिवार के टूटने के साथ ही सभी का यह भ्रम भी टूट चुका है ।”

                              दूसरा है यूलिप जो कि हमारा पैसा स्टॉक मार्केट और बैलेंस्ड फंड आदि में लगाता है । यह प्लान भी निवेश की दृष्टि से काफी अच्छा साबित हो रहा है उदाहरण के रूप में इसमें पांच साल तक 20,000 रुपए जमा कराने पर यह रकम एक लाख रुपए हो जाएगी । 20 साल बाद इसकी बढ़त बीस प्रतिशत तक आती है तो उस हिसाब से यह रकम 23 लाख 92 हजार हो जाती है । इस रकम का इस्तेमाल पेंशन के रूप में भी किया जा सकता है । अवधि पूरी होने के बाद यदि एक साथ सारा पैसा निकाल लिया जाए और उसे बैंक में स्थायी जमा खाते में जमा कराएं तो आज की ब्याज दर के अनुसार सीनियर सिटीजन को 11 प्रतिशत का ब्याज उस राशि पर प्राप्त होगा । इस प्लान का एक लाभ यह भी है कि यदि 20,000 रुपए का निवेश करने पर निवेशकर्ता को उस राशि पर बीमा कवरेज की सुविधा भी मिलेगी और उसकी मृत्यु होने पर उसके परिवार को दो लाख रुपए की सहायता राशि मिलेगी । यदि वह व्यक्ति दुर्घटनाग्रस्त हो गया है तो चार लाख रुपए का रिस्क कवर रहेगा ।

                            इसके बाद आती हैं ‘विथ कवर’ और ‘विदाउट कवर‘ वाली योजनाएं । जैसा कि नाम से ही जाहिर है कवर के साथ आने वाली पेंशन योजनाएं, जीवन सुरक्षा के साथ आती हैं और किसी भी तरह की असमय मृत्यु में सुरक्षा प्रदान करती है । आजकल जो योजना चलन में है वह है ‘डेफर्ड एनुइटी ‘। यह योजना तुरंत शुरू नहीं होती । आप इसे अपनी चुनी गई अवधि तक के लिए टाल सकते है । मान लीजिए कि आपने 25 वर्ष के लिए पेंशन प्लान लिया । जिस दिन आप यह प्लान लेते हैं, उस तिथि के 25 वर्ष बाद आपको एनुइटी/पेंशन मिलनी शुरू होती है । इसके अलावा आपके पास निर्धारित उम्र को टालने का भी विकल्प है । माना आपने एक ऐसा पेंशन प्लान चुना, है, जिसमें आपको पेंशन मिलनी तब शुरू हो जाएगी, जब आप 45 वर्ष के हो जाएंगे, लेकिन अगर आप अगले पांच साल और काम करना चाहेंगे तो आप अपनी पेंशन राशि को 50 वर्ष की उम्र के लिए टाल सकते हैं । यानी जो पेंशन 45 वर्ष की उम्र में मिलनी शुरू होती, वह 50 वर्ष की उम्र से शुरू होगी । पेंशन प्लान निम्न प्रकार के होते हैं :-

  • एनुइटी प्लान
  • फिक्स डिपाजिट
  • म्यूचुअल फंड
  • मनी बैक पॉलिसी
  • आवर्ति जमा
  • किसान विकास पत्र
  • राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी
  • लोक भविष्य निधि (पीपीएफ)
  • मेडिक्लेम

एनुइटी प्लान –

                            क्या आपने अपने आपको एनुइटी प्लान (वार्षिक योजना ) में कैद कर लिया है ? अधिकतर तटस्थ वित्तीय सलाहकार ऐसा करने के लिए मना करते हैं । इसके पीछे एक कारण यह है कि एनुइटी प्लान कर योग्य होता है । दूसरा कि रिटर्न काफी कम मिलता है । अपनी एनइटी से आप लगभग 6-7 प्रतिशत हासिल कर सकते हैं । सेक्शन 80 सो के तहत यदि आप पांच साल के बैंक डिपॉजिट में निवेश करते हैं तो आजकल टैक्स नहीं लगता और यह लगभग 8.5 से 10.85 प्रतिशत का रिटर्न मिलता है । अन्य मासिक आय विकल्पों में सीनियर सिटीजन मंथली सेविंग स्कीम और पोस्ट ऑफिस इनकम स्कीम शामिल है, जो आपको क्रमशः 9 प्रतिशत का प्रस्ताव देता है और 8 प्रतिशत का प्रस्ताव मिलता है, लेकिन इन योजनाओं की अवधि छह वर्ष और आठ वर्ष होती है। वित्तीय सलाहकार स्वप्निल पंवार का कहना है कि ‘मुझे एनुइटी का विचार पसंद है । यह जीवन जोखिमों को कवर करता है क्योंकि निवेशक इसके लिए ज़िंदगी पर्यन्त भुगतान करता है, लेकिन इसकी दर बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट से कम है । आपको अपने फिक्स्ड डिपॉजिट के लिए लगभग 8.50 से 10.85 प्रतिशत तक ब्याज दर मिल सकती है। उसी तरह आप अपने रुपयों को इंश्योरेंस करने वाली फर्म को देते हैं, लेकिन आपको केवल 6 से 7 प्रतिशत ब्याज दर मिलती है । यदि आपने अपनी सेवानिवृत्ति के लिए कुछ अधिक राशि बचाई है तो आप फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान या डेट फंड (ऋण अनुदान) से जुड़ें, क्योंकि यह टैक्स के मामले में फिक्स्ड डिपॉजिट से बहुत बेहतर होते हैं ।

फिक्स डिपाजिट –

                                भविष्य के लिए ये सबसे बेहतर प्लान है । इसमें बैंक निश्चित राशि पर एक निश्चित अवधि के लिए एक निश्चित ब्याज देते हैं इसी कारण इसे सबसे बेहतर निवेश माना जाता है और सबसे अधिक लोग निवेश के इसी तरीके को अपनाते हैं ।

म्यूचुअल फंड

                          एनुइटी को अपनाने वालों की संख्या  बहुत ज्यादा नहीं है । अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोपीय देशों में वरिष्ठ  नागरिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा के फायदे उपलब्ध हैं, लेकिन भारत में, वरिष्ठ नागरिकों के पास इस तरह के विकल्प उपलब्ध नहीं हैं । ऐसी स्थिति में एनुइटी सेवानिवृत्ति के वर्षों में नियमित नकद की प्रवाहिता को सुनिश्चित करता है । अन्य मामलों में नियमित आय के लिए आप अपनी योजनाओं को एफडी या एफएमपी के रूप में व्यवस्थित कर सकते हैं । पेंशन-कम-सेविंग प्लान के अलावा भी कई विकल्प मौजूद हैं, आपकी वृद्धावस्था को आर्थिक रूप से मजबूती देने का काम करते है इन विकल्पों में म्युचुअल फंड को भी अपनाया जा सकता है । इनका रिटर्न शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है।

मनी बैक पॉलिसी –

                               इस पॉलिसी के तहत पांच-पांच साल के अंतराल पर पैसा वापस मिलता है । इसमें 12 से 20 साल तक के युवा निवेश कर सकते हैं । इसकी अवधि 25 साल की होती है। पहली पॉलिसी होने पर निवेशकर्ता की उम्र 18 साल होना आवश्यक है । इसमें 13 साल की उम्र से प्रीमियम शुरू होता है ।

आवर्ति जमा

                         इस प्लान के अंतर्गत यदि हर महीने एक हजार रुपए जमा कराए जाते हैं तो पांच साल बाद वह रकम 60,000 रुपए हो जाएगी और निवेशकर्ता को कुल मिलाकर 72,890 रुपए प्राप्त होंगे । यदि निवेशकर्ता उसी खाते को दस साल तक जारी रखता है तो दस साल बाद उसे 178580 रुपए मिलेंगे ।

किसान विकास पत्र

                                     पोस्ट ऑफिस के किसान विकास पत्र में पैसा निश्चित अवधि में दुगना हो जाता है । यह कम से कम एक हजार रुपए से निवेश शुरू होता है। इस रकम को स्थायी जमा खाते में डाला जाता है ।

राष्ट्रीय बचत पत्र (एनएससी)

                                                           इस प्लान में एक हजार रुपए निवेश करने पर छह साल के बाद 8 प्रतिशत ब्याज की टूर पैसे मिलते हैं । इसमें आयकर की छूट भी मिलती है।

लोक भविष्य निधि (पीपीएफ)

                                                          इस योजना में 15 साल के लिए खाता खोला जाता है, जिस पर आठ प्रतिशत का नाम भी मिलता है और उस पर आयकर की छूट भी मिलती है। यह बैंक के द्वारा भी करवाया जा सकता है । इस योजना को शुरू करने के छह साल बाद  यदि आप पैसा निकालना चाहते हैं तो निकाल सकते हैं ।

मेडिक्लेम-

                         यह पॉलिसी आज के समय को दे काफी जरूरी हो जाती है। इस पॅलिसी के अंतर्गत रोगग्रस्त या चोटिल होने पर बेहतर ढंग से इलाज होता है और अस्पताल के सारे बिल कवर हो जाते हैं । इस पॉलिसी को लेने के बाद यदि कोई क्लेम करता है तो बीमा  कंपनी किसी तीसरी पार्टी के जरिए उसको रिकवर होने के लिए पैसा देती है ।

कैसे बुढ़ापे की प्लानिंग करें अभी से ?

 

पेंशन प्लान  के बारे में –

बेहतर पेंशन की प्लानिंग के लिए निम्न बिंदुओं पर भी विचार करना चाहिए :-

कब शुरू करें ?

                         जब भी पेंशन प्लान शुरू करना हो तो पेंशन प्लान को जल्दी शुरू करें, विशेषज्ञों के अनुसार यदि आप अपने आने वाले समय को सुरक्षित बनाना चाहते है तो इसके लिए आपको जल्दी शुरुआत करनी चाहिए । यह भविष्य के लिए पर्याप्त राशि की बचत करने में मदद करेगा । आपके निवेश को टालने की सुनिश्चित कीमत होती है । अगर कोई बीमा पॉलिसी लेने में पांच साल की भी देरी करता है तो उसका प्रीमियम ऊपर जा सकता है ।

लचीला रहे

                 आपने जो प्लान चुना है उसमें लचीलापन होना चाहिए ताकि वे जब इसे बदलें तो वह ग्राहक की आवश्यकताओं के अनुरूप रहें। आजकल लोग यूलिप पेंशन प्लान को लेना अधिक पसन्द करते हैं जो कि संरक्षण रणनीति पर काम करता है।

शुल्क  के बारे में जानें –

                                जो भी पेंशन प्लान की कीमत देनी पड़ती है । संक्षेप में आप फंड मैनेजमेंट, पॉलिसी एडमिनिस्ट्रेशन, प्रीमियम एलोकेशन और स्विचिंग चार्ज देते है । हालांकि स्विचिंग शुल्क तभी देना पड़ता है जब आप पॉलिसी में तय की गई सीमा लांघ जाते हैं । एक अनुमान के अनुसार प्रीमियम का पॉलिसी एडमिनिस्ट्रेशन चार्ज 0.20 से 0.50 प्रतिशत के बीच आता है । यह प्रीमियम की निरंतरता और प्रीमियम की रकम पर निर्भर करता है । प्रीमियम की राशि वार्षिक, अर्धवार्षिक, त्रैयमासिक या प्रति माह दी जा सकती है । फंड मैनेजमेंट चार्ज 0.75 से 3 प्रतिशत प्रतिवर्ष आता है और स्विचिंग चार्ज (अगर हो तो) आमतौर पर पॉलिसी की अवधि के भीतर चार स्विचिग के लिए कोई चार्ज नहीं होता । वैसे आमतौर पर इसका शुल्क 100 रुपए होता है ।

आपके बाद –

                     यह शर्त अलग-अलग पॉलिसी में अलग-अलग होती है । अगर पॉलिसी धारक की मृत्यु  पॉलिसी  प्लान की अवधि के दौरान हो जाती है तो नामित को बीमाकृत राशि या फंड वेल्यू (जो भी बीमाकृत राशि योजना से अधिक हो) मिलती है । अगर नामित व्यक्ति पॉलिसी होल्डर का जीवन साथी है तो उसे वार्षिक या एक मुश्त राशि में से चुनाव का विकल्प मिलता है । शून्य धनराशि बीमाकृत पॉलिसी के मामले में, लाभ भोगियों को फंड वेल्यू मिलता है ।

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