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अवसाद (Depression) क्या है ?

अवसाद (Depression) क्या है ? – डिप्रेशन के लक्षण और उपाय

विश्व  स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अवसाद (Depression) दुनिया भर में असमर्थता का एक प्रमुख कारण है। इसके इलाज पर ज्यादा खर्च होता है और दिल की बीमारी की तुलना में कहीं ज्यादा यह काम करने की क्षमता को प्रभावित करता है। अमेरिका में मृत्यु का 11वां सबसे आम कारण आत्महत्या है जिसके कारण हर साल करीबन 30.000 जाने चली जाती हैं। इन आत्महत्याओं का सबसे बड़ा कारण अवसाद (Depression) ही है। इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि अवसाद (Depression) क्या है ?  और डिप्रेशन के लक्षण और इसको दूर करने के उपाय क्या हैं।

अवसाद (Depression) एक सामाजिक समस्या है

पिछले 20 साल में मेडिकल क्षेत्र में हुई उन्नति ने अवसाद से परेशान लोगों की मदद की क्षमता में काफी सुधार किया है। हालांकि इसके बावजूद अमेरिका में सार-संभाल के संचालन के लिए एक प्रभावशाली तंत्र की कमी है। अवसाद से ग्रस्त ऐसे लोगों का प्रतिशत बहुत कम है जिन्हें पर्याप्त इलाज मिल पाता है। अवसादग्रस्त लोगों को कलंकित माना जाता है जो उनके जीवन को कहीं अधिक मुश्किल और एकाकी बना देता है। अनेक अमेरिकी पीड़ित बिना किसी सहयोग के, निराशा में फंसे छोड़ दिए जाते हैं क्योंकि अंततः उनकी इंश्योरेंस कंपनियां भी इलाज के लिए पैसा देने से मना कर देती हैं। ये समस्याएं ठीक उस तरह की हैं जिनका एक समय में कैंसर पीड़ित सामना कर चुके हैं । इन्हें उसी तरह से संबोधित करना उचित होगा।

1970 में अमेरिका में जिस तरह कैंसर सेंटर्स का स्थापना हुई थी, उन्हीं के समान अब डिप्रेशन सेंटर्स के नेटवर्क की जरूरत है। उस समय नेशनल कैंसर सेंटर द्वारा संघीय कोष इंटरडिसिप्लनरी सेंटर्स को वितरित किया गया था। इसके पीछे यह सुनिश्चित करने का विचार था कि अमेरिकी जनसंख्या का 80 प्रतिशत भाग इस तरह के किसी भी सेंटर से 200 मील के भीतर जुड़ा हो। इस मॉडल का अनुसरण करते इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ को डिप्रेशन सेंटर्स के उस राष्ट्रीय नेटवर्क को समन्वित कर आर्थिक सहायता देनी चाहिए जो इस काम के लिए ऐसी रिसर्च यूनिवर्सिटी से संबंधित हो जिनके पास इस विषय को समर्पित अच्छे अस्पताल और विभाग हों।

अवसाद (Depression) के लक्ष्ण 

कुछ  लोग कहते हैं कि डिप्रेशन या अवसाद के दौरान उन्हें ऐसा महसूस होना जैसे कि उनके जीवन पर एक काले रंग का परदा गिर गया हो। बहुत से लोगों को लगता  है जैसे उनकी सारी ऊर्जा खत्म हो गई है और वे खुद को किसी भी चीज में एकाग्रचित  नहीं कर पाते हैं । वहीं कुछ लोग बिना किसी प्रत्यक्ष वजह के अपने आपको अधिक चिड़ चिड़ा पाते हैं। अलग-अलग लोगों में अवसाद के लक्षण अलग होते हैं ।

यदि आप दो सप्ताह से अधिक खुद को लगातार निराश’ पाएं और आपको लगे कि ये भावनाएं आपके नित्य  जीवन पर असर कर रही हैं तो हो सकता है कि आप चिकित्सकीय तौर पर अवसाद के शिकार हों। अवसाद का इलाज करना आवश्यक इसलिए भी है कि ह आपके साथ-साथ आपके परिवार और काम दोनों को प्रभावित  करता है। इसके अलावा अवसाद के शिकार कुछ लोग  इस गलत फहमी में कि इस समय वे जैसा महसूस कर हैं उसमें कभी बदलाव नहीं आ सकता, आत्मघाती भी हो जाते हैं।

हालांकि अवसाद किसी को भी घेर सकता है, इसका प्रभाव उम्र और लिंग लोगों पर अलग हो सकता है। अवसाद से महिलाओं में अवसाद की संभावनाएं पुरुषों से दोगुनी होती है। समय-समय पर हार्मोन का बदलाव उनमें इस खतरे को बढ़ाता है। पुरुषों में अवसाद का खतरा कम होता है फिर भी उनमें अवसाद को न पहचाने जाने की संभावना अधिक होती है, इसके साथ ही वे मदद भी कम ही ढूंढ़ते हैं। उनमें अवसाद के खास लक्षण नजर आ सकते हैं, जिसके कारण उन्हें गुस्सा ज्यादा आ सकता है, लेकिन वे ऐसी स्थितियों पर नशा, धूम्रपान आदि की मदद से आवरण डाल देते हैं। यही वजह है कि अवसाद ग्रसित पुरुषों में आत्महत्या का खतरा महिलाओं से चार गुना अधिक होता है। बुजुर्गों को अकेलेपन और बीमारियों का सामना करते हुए डिप्रेशन घेर सकता है। इस स्थिति में अक्सर बाकी लोगों को लगता है कि ये लक्षण उम्र के साथ होने वाले सामान्य बदलाव दिखाई देते हैं। हर हाल में सिर्फ व्यवहार में सद्भावना तथा संवेदनशीलता जैसे तत्वों से ही स्थितियां बदली जा सकती हैं।

अवसाद के लक्षण इसके पूरी तरह विकसित होने के कई हफ्तों पहले से महसूस होना शुरू हो सकते हैं। अवसाद आपकी भूख, नींद, काम और रिश्तों को प्रभावित कर, संपूर्ण जीवन पर गंभीर असर डाल सकता है। एक चिकित्सक अवसाद के लक्षणों को विभिन्न बिंदुओं से आंकता है :-

  • उदासी, चिड़चिड़ापन या तनाव का होना ।
  • आम गतिविधियों या शौंक में रुचि का घटना
  • शारीरिक शक्ति में कमी आना और कम गतिविधियों के बावजूद थकान महसूस होना।
  • अचानक भूख में बदलाव, वजन का घटना या फिर बढ़ना।
  • नींद में बदलाव आना  जैसे सोने में परेशानी, अचानक बहुत सुबह उठ जाना या फिर बहुत ज्यादा सोना।
  • बेचैनी या फिर कामों की गति का बहुत धीमा हो जाना।
  • निर्णय लेने या एकाग्रचित होने में परेशानी महसूस करना।
  • बेकारी, निराशा या आत्मग्लानि की भावनाएं आना।
  • आत्महत्या और मृत्यु से संबंधित विचार आना।

अवसाद होने के कारण

अवसाद की कोई एक वजह नहीं होती है, अवसाद अक्सर यह बहुत सी बातों के संयोजन का परिणाम होता है। आपको इस बात का पता भी नहीं चलता कि आप किस वजह से इसका शिकार बने हैं । कारण जो भी हो, अवसाद पूरी तरह से मानसिक स्थिति भी नहीं है। मस्तिष्क में भौतिक बदलावों के साथ इसका संबंध न्यूरोट्रांसमीटर नाम के रसायन के असंतुलन से है। यह रसायन मस्तिष्क और तंत्रिकाओं के बीच संकेतों का वाहक है। इसके अलावा अवसाद के सामान्य कारण भी होते हैं । किसी व्यक्ति को अवसाद विभिन्न कारणों से हो सकता है जैसे कि  :-

1-  पारिवारिक पृष्ठभूमि

आनुवंशिकी या पारिवारिक पृष्ठभूमि भी अवसाद का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह परिवार में पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता रह सकता है ।

2- सदमा या तनाव

किसी व्यक्ति में आर्थिक समस्या, रिश्ते का टूटना, किसी प्रिय की मृत्यु जैसी घटनाओं के कारण भी अक्सर अवसाद जन्म ले सकता है।

3- निराशावादी व्यक्तित्व

आत्म विश्वास की कमी के साथ साथ नकारात्मक व्यवहार वाले लोगों में अवसाद का खतरा अधिक होता है।

4- भौतिक कारण

गंभीर शारीरिक रोग जैसे दिल की बीमारी, कैंसर, एड्स आदि अवसाद में सहायक होते हैं, क्योंकि ऐसे में व्यक्ति शारीरिक कष्ट के साथ तनाव का एक साथ सामना करता है। अवसाद प्रतिरोधी तंत्र को कमजोर कर दर्द को सहने की शक्ति कम कर देता है। इनके अलावा चिंता, खाने में गड़बड़ी, शीजोफ्रेनिया और खासतौर पर द्रव्यों का दुरुपयोग अक्सर अवसाद के आसपास दिखाई देते हैं।

5- मनोदशा

चिकित्सकों के अनुसार अक्सर मनोदशा की विभिन्न गड़बड़ियों में भी अवसाद के लक्षण नज़र आ सकते हैं। इनमें सीजनल मेजर डिप्रेशन (सीजनल एफेक्टिव डिसऑर्डर) पोस्टमॉर्डम डिप्रेशन और बाइपोलर डिप्रेशन इस तरह की विभिन्न मनोदशाएं हैं।
[8:56 PM, 7/13/2021] Harjeet Singh: हालांकि अवसाद किसी को भी घेर सकता है, इसका प्रभाव उम्र और लिंग लोगों पर अलग हो सकता है। महिलाओं में सामान्य बदलाव दिखाई देते हैं। हर हाल में सिर्फ व्यवहार में सद्भावना तथा संवेदनशीलता जैसे तत्वों से ही स्थितियां बदली जा सकती हैं।

6- जनल एफेक्टिव डिसऑर्डर

इस अवसाद के लक्षण मौसम या माहौल बदलते ही महसूस किए जा सकते हैं। इस प्रकार के अवसाद का मानक किसी एक मौसम से संबंधित होता है। किसी खास मौसम में ये लक्षण तीव्र हो सकते हैं। पोस्टमॉर्डम डिप्रेशन इस प्रकार का अवसाद महिलाओं में प्रसव के बाद हो सकता है। यह शिशु के जन्म के साथ के शुरुआती महीनों से लेकर पहले वर्ष में कभी भी उत्पन्न हो सकता है।                                               (अवसाद (Depression) क्या है ?)

7- बाइपोलर डिप्रेशन

बाइपोलर डिप्रेशन अवसाद का एक प्रकार है, जिसके अंतर्गत व्यक्ति की मनोदशा में उतार-चढ़ाव (मूड स्विंग्स) चरम पर होते हैं। व्यक्ति कुछ मिनट से लेकर महीनों तक इस अनुभव से गुजर सकता है। इस दौरान आत्महत्या का खतरा अधिक होता है।              (अवसाद (Depression) क्या है ?

8- डिस्थीमिया

एक प्रकार से मनोदशा की अव्यवस्था है जिसके अंतर्गत व्यक्ति लंबे समय तक प्रतिदिन हल्का अवसाद महसूस करता है। यह कम से कम दो वर्ष तक चलता है। इसके लक्षण अवसाद के होते हैं, परंतु इसकी तीव्रता चिकित्सकीय मापदंडों के अनुसार पूरी तरह से विकसित अवसाद से कम होती है।

अवसाद का इलाज

दरअसल अवसाद एक रोग है जिसका इलाज किया जा सकता है। अपने चिकित्सक की मदद से आप अवसाद को नियंत्रित कर सकते हैं। चिकित्सक दवा के साथ-साथ थेरेपिस्ट से मिलने की सलाह दे सकता है। इसके अलावा जीवनशैली में भी कुछ बदलाव के जरिये वह आपके जीवन से अवसाद की परछाई दूर करने में मदद कर सकता है। इसके आलावा आप नीचे दी गयी विधियों के अनुसार भी अवसाद को दूर भगा सकते हैं।             (अवसाद (Depression) क्या है ?

1- ताली बजाकर अवसाद को दूर भगाएं

जिस प्रकार से ताले की ताली अर्थात् चाबी होती है उसी प्रकार ताली शरीर के हर मर्ज की चाबी होती है, यानी मास्टर की । हमारे शरीर के सभी आंतरिक उत्सर्जन संस्थानों के प्वॉइंट हमारी हथेलियों में होते हैं और जब हम ताली बजाते हैं तो उन सभी आंतरिक उत्सर्जन अंगों को उत्तेजना प्राप्त होती है। इस उत्तेजना के कारण ही हमारे प्रत्येक इम्यून सिस्टम का सुचारु रूप से संचालन होता है। निराशा, कुंठा, अवसाद और तनाव के कारण डिप्रेशन में आने पर व्यक्ति आत्महत्या के लिए प्रेरित होता है, लेकिन ताली उसे इस रास्ते से बचाने में बहुत ही कारगर इलाज है, ताली बजाने से उत्तम साधना कोई हो ही नहीं सकती।

जब हम ध्यान मुद्रा में बैठते हैं तो चिड़ियों की चहचहाहट, स्कूटर की आवाज अथवा तेजी से चलती हुई लोकल ट्रेन की आवाज हमारे ध्यान को भंग कर देती है, परंतु ताली बजाते समय हमारी आंखें बंद होती हैं, कान हमारी ताली की आवाज के कारण बंद हो जाते हैं तथा हमारे मुंह से भजन करने की क्रिया के कारण हमारा संपर्क पूरी तरह से बाहरी दुनिया से समाप्त हो जाता है। यही सच्चा ध्यान है, इसीलिए  कहा गया है कि “एक दवा निराली, सिर्फ 15 सैकंड की ताली।”

ताली से हमारे शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। तालियों के बाद जब हमारे खून की जांच की जाती है तो पता चलता है कि डब्ल्यूबीसी (व्हाइट ब्लड सेल्स) अर्थात् श्वेत रक्त कण की मात्रा में कमी है अथवा वे पर्याप्त मात्रा में हैं। डब्ल्यूबीसी के पर्याप्त मात्रा में होने पर ही लिम्फोसाइट्स (लसीक कोशिका), फैगोसाइट्स (भक्षक कोशिका) और इम्यूनोग्लोब्यूल्स (उन्मुक्त कोशिका) में रक्त प्रवाह पॉजिटिव डाइरेक्शन में प्रवाहित होगा। इस इम्यून सिस्टम के द्वारा ही हम डिप्रेशन को नियंत्रित करने में सफल हो सकते हैं।

यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध हो चुका है। ताली बजाने से तीव्र गति से हमारे शरीर का तापक्रम बढ़ता चला जाता है, जिसके फलस्वरूप हमारा कोलेस्ट्राल पिघलने लगता है। ताली वादन से रक्त विपरीत दिशा में तीव्र गति से संचालित होता है और शरीर में ताली के कारण होने वाले कंपन से रक्त धमनियों के सभी प्रकार के अवरोध समाप्त हो जाते हैं जिसके कारण हृदय को आराम मिलता है। कुल मिलाकर ताली का ही नाम आज के युग में एक्यूप्रेशर हो गया है। वस्तुतः ताली से उत्तम एवं सहज व्यायाम और कोई हो ही नहीं सकता, इसलिए इसे हम सर्वोत्तम व्यायाम मानते हैं। अन्य व्यायाम में हम हाथ और पैरों के प्वॉइंट्स ही दबाते हैं जो कि ताली में सहज रूप से दब जाते हैं।

ताली बजाने का तरीका

ताली वज्रासन में बैठकर या आसन में खड़े रहकर या जूते पहन कर हांथो में तेल लगाकर ही बजाएं, अपनी आँखे बंद रखें और मुंह  से अपने आराध्य का जाप करें। ताली की शुरुआत सर्वप्रथम प्रथमा उंगली से दूसरे हाथ की हथेली के मध्य भाग पर चार बार चोट करें, फिर मध्यमा उंगली को भी साथ लेकर अर्थात् दो उंगलियों द्वारा उसी प्रकार चार बार चोट करें, फिर तीन उंगलियों से तथा अंत में चार उंगलियों से चार-चार बार चोट करते हुए अंत में पांचों उंगलियों द्वारा ताली जोर से एवं शीघ्रतापूर्वक प्रारंभ करें। पांचों उंगलियों का स्पर्श दूसरे हाथ की पांचों उंगलियों से बराबर होता रहे, इस बात का ध्यान रखा जाए। नियमित रूप से तालियां बजाने, पैर के तलवों को नियमित रूप से साफ करने तथा बताई गई उपयुक्त विधि द्वारा अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित करने के 25-30 दिन पश्चात ही आप पाएंगे कि आपके श्वेत रक्त कण (डब्ल्यूबीसी) लिम्फोसाइट्स, फैगोसाइट्स तथा इम्यूनोग्लोब्यूल्स को शक्ति प्राप्त होगी, जिससे आप आजीवन निरोगी रह सकेंगे।

2- पैर का तलवा चमका कर करें अवसाद को दूर भगाएं

“आप इस तरह से  पैर का तलवा चमकाइए और अपना चेहरा दमकाइए।” यह एक ऐसी उक्ति है कि आप इसे आजमा कर देख सकते हैं। जितना तलवा चमकाएंगे अथवा पत्थर से रगड़ेंगे उतना ही वह साफ होगा और उसके साथ-साथ आपका चेहरा भी चमकने लगेगा। तब फिर आपको चेहरों को चमकाने के लिए किसी प्रसाधन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। एक्यूप्रेशर की तकनीक यही है। क्रोध मन ही मन में कुंठित होता रहता है तो कुंठाओं का ज्वालामुखी फटता है तो उसकी परिणति हत्या या आत्महत्या में हो सकती है। आवश्यकता है उसके क्रोध को प्रतिदिन बाहर निकालने की। ऐसे में गुस्सा हो या तनाव, दोनों को कम करने के लिए ताली वादन से उत्तम प्रक्रिया कुछ हो ही नहीं सकती। यह मनोदैहिक संतुलन बनाती है। इसके लिए यह एक विशेष प्रकार की ताली है, जिसे आप नेट  से डाउनलोड कर सहजता से सीख सकते हैं।     (अवसाद (Depression) क्या है ?

3- रोजमर्रा के जीवन में देशी नुख्से आजमाकर

 1947 तक हम एक कंपनी के गुलाम थे पर आज कई कंपनियों के गुलाम बन चुके हैं, टूथपेस्ट से लेकर शीतलपेय तक। हम दांतों को सड़ने से बचाने के लिए टूथब्रश और टूथपेस्ट के बजाय सरसों के तेल, सेंधा नमक एवं हल्दी को मिलाकर हाथ की मध्यमा उंगली से मंजन कर सकते हैं। चायकॉफी के बदले नींबू पानी अथवा तांबे के घड़े में भरा पानी पी सकते हैं। शैंपू तथा साबुन के बदले में बेसन, हल्दी, सरसों का तेल व नींबू के रस एवं दूध से बने उबटन से तथा महीने में एक दिन जिस इलाके में रहते हैं वहां की मिट्टी से नहा सकते हैं। इस तरह प्रकृति से जुड़ी जीवन चर्या आपको तनाव मुक्त और खुशहाल बनाएगी।

कभी कभी उदासी रचनात्मक भी होती है

उदासी रचनात्मक भी हो सकती है। अवसाद का एक प्रकार बाइपोलर डिसऑर्डर मनोदशा के असंतुलन का ऐसा ही उदाहरण है। इस बीमारी के शिकार लोगों में अक्सर सामान्य से अधिक रचनात्मकता, सहनशीलता और कभी-कभी बुद्धिमत्ता भी पाई जाती है। ऐसे अनगिनत लेखक, कवि, संगीतज्ञ, वैज्ञानिक, चित्रकार और रचनाकार हैं जिनमें किसी न किसी प्रकार का बाइपोलर असंतुलन पाया गया, जिसे वे खुद अपनी रचनात्मकता के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं। दरअसल चिकित्सा क्षेत्र में रचनात्मकता को हाइपोमैनिया के साथ जोड़ा गया है। इसके अंतर्गत मैनिया और हाइपोमैनिया की स्थिति में सफलता प्राप्त करने की स्वाभाविक चेष्टा और विचारों की उड़ान का सीधा संबंध रचनात्मक इरादों से किया जाता है।

बाइपोलर डिसऑर्डर के शिकार कुछ लोगों में अक्सर मिली-जुली स्थिति पाई जाती है। ऐसे में वे उदासी और अवसाद की भावनाएं महसूस करते हैं, लेकिन चिकित्सकीय अवसाद से अलग, इस मिली-जुली स्थिति में हमेशा उत्तेजित’ महसूस करते हैं। यह बाइपोलर डिसऑर्डर का विशेष लक्षण है। हालांकि उनमें रचनात्मक शक्ति और तेजी से आते विचारों के साथ लगातार एक नकारात्मक अनुभूति बनी रहती है। इस पहचान पाना काफी मुश्किल होता है, क्योंकि इससे प्रभावित व्यक्ति उत्तेजित रहते हुए लगातार गतिविधियों में व्यस्त रह कर सतत सृजन भी करता है

यह जरूरी नहीं है कि उदासी हमेशा दुख को ही जन्म दे। अमूमन भावनाओं की तीव्रता से ऐसा होता है कि संवेदनशील व्यक्ति की आंखें भर आती है। समाज और व्यक्ति के भीतर की उथल-पुथल किसी संवेदनशील व्यक्ति की बेचैनी के रूप में प्रकट हो सकते हैं। मंटो का चरित्र ‘टोबाटेक सिंह पागलपन का नहीं देशविभाजन के संताप का एक प्रतीकात्मक उदाहरण है। स्वाभाविक उदासी विवेकशील मनुष्य में अनिवार्य है। रचनात्मक उदासी चरित्र को उदात्त भी बना देती है। बस विवेक एक सीमा रेखा तय कर देता है।

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