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क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के कारण, लक्षण और योग से इलाज

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के कारण, लक्षण और योग से इलाज – How I beat CFS in Hindi

 क्रोनिक फटीग सिंड्रोम (सीएफएस) एक ऐसी बीमारी होती है, जिसमें मरीज बहुत अधिक  थकावट महसूस करता है और यह थकावट बिना किसी मेहनत के किये होती है। हम अगर आराम भी करते हैं तो फिर भी थकावट नहीं जाती । इससे हमारी दिनचर्या प्रभावित होने लगती  है। लगातार थकावट रहने के कारण रोगी को शारीरिक और मानसिक परेशानी रहने  लगती है। कई -कई मरीजों में इस बीमारी के लक्षण कई वर्षों तक दिखते रहते हैं। अगर यह बीमारी अधिक समय तक किसी रोगी को रहती है तो रोगी को अन्य कई बीमारियों के होने की संभावना  बढ़ जाती है। इस बीमारी को क्रोनिक फटीग एंड इम्यून डिसफंक्शन सिंड्रोम भी कहते हैं। आगे इस लेख के माध्यम से जानते हैं कि क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के कारण, लक्षण और योग से इलाज – How I beat CFS in Hindi .

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के लक्षण

अगर डॉक्टर्स की बात मानें तो क्रोनिक फटीग सिंड्रोम जानलेवा बीमारी नहीं होती है, लेकिन इसका नुकसान रोगी को कई प्रकार से होता है। जैसे मरीज कई बार इस बीमारी से ग्रसित मरीज खड़ा होने तक की स्थिति में नहीं रह पाता है। मरीज अगर सोता भी है तो उसका दिमाग चलता ही रहता है। मरीज मानसिक और शारीरिक रूप से धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है। वह कोई काम नहीं कर पाता । ऐसे में  रोगी की स्ट्रेंथ कम होने के कारण रोग का असर मरीज के  सामाजिक और पारिवारिक सम्बंधों पर पड़ने लगता है।

इस बीमारी के असंख्य कारणों के चलते डॉक्टर भी कभी-कभी इसे सीएफएस के रूप में पहचान नहीं पाते। यह बीमारी अपने साथ हृदय रोग, कैंसर, मेटाबोलिक सिंड्रोम, असंतुलित रक्तचाप, उच्च कॉलेस्ट्राल, अत्यधिक पीड़ा, डायबिटीज आदि रोग भी साथ लाती है, जिससे इसका निदान और भी जटिल हो जाता है। रोगी अक्सर ऐसा महसूस करते हैं कि उनकी हालत को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, ऐसा तब होता है जब उनके आसपास के लोग और डॉक्टर इसे महज ‘दिमागी’ समस्या मानते हैं।

सीएफएस के लक्षणों में चौंका देने वाली विविधता है हालांकि इन सभी लक्षणों का आपस में कोई सीधा संबंध नहीं है। ऐसा माना जाता है कि इन सभी का समान कारण है, मस्तिष्क की प्रधान ग्रंथि हायपोथैलेमस का सुचारु रूप से काम न कर पाना। हायपोथैलेमस की खराबी हमारे शारीरिक तंत्र को बिगाड़ने के लिए काफी है और यह इस बात पर निर्भर करती है कि खतरे के प्रति हमारा नजरिया कैसा है। सरल शब्दों में कहें तो इसका अर्थ है हमारा स्ट्रेस फैक्टर यानी तनाव से निपटने की हमारी क्षमता। इस बीमारी में निम्न प्रकार के लक्षण पाए जाते हैं :-

  • हर समय थकावट का महसूस होना ।
  • गले में खराश रहना।
  • थकावट अलग प्रकार की ही होती है।
  • एकाग्रता की कमी ।
  • भूलने की समस्या होना ।
  • मांसपेशियों में दर्द ।
  • अचानक सिर में तेज दर्द होना ।
  • कम शारीरिक मेहनत पर भी तुरंत थक जाना।
  • रात में नींद न आना या  बीच-बीच में नींद का टूट जाना।

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के अन्य नाम 

सीएफएस के कई अनोखे नाम प्रचलन में हैं, जिनमें से कुछ नाम खतरनाक प्रतीत होते हैं। चिकित्सा के क्षेत्र में इसे टायर्ड ऑल द टाइम (टीएटी) या यप्पी फ्लू के नाम से भी जाना जाता है और ऐसा समझा जाता है कि इसका निदान संभव है।

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के कारण 

वैसे तो खराब जीवन शैली को इसका मुख्य कारण माना जाता है, लेकिन चिकित्सा जगत में अब भी इसके ठोस कारणों की खोज जारी है। एक दृष्टिकोण के अनुसार सीएफएस व्यक्तित्व विशेष होता है। इसका जोखिम ऐसे व्यक्तित्व के लोगों को अधिक होता है, जो अत्यधिक काम करना पसंद करते है और अत्यधिक महत्वाकांक्षी होते हैं, जिसकी वजह से वे हमेशा तनाव एवं चिंता से घिरे रहते हैं। टाइप ए के ये व्यक्ति व्यक्तिवादी और पूर्णतावादी स्वभाव के होते हैं, जो किसी और को जिम्मेदारियां नहीं सौंप पाते क्योंकि इन्हें ऐसा लगता है कि कोई भी इनके स्तर या शैली की बराबरी नहीं कर सकता है। हो सकता है आप भी स्वयं की पहचान इन्हीं में से किसी विशेषण से करें। आमतौर पर इन गुणों की सराहना की जाती है, लेकिन इनमें कुछ ऐसा पाया जाता है, जिससे शरीर में तीव्र प्रतिक्रिया की शुरुआत होती है जो सीएफएस को शक्तिशाली बना देती है।क्रोनिक फटीग सिंड्रोम (सीएफएस) नामक बीमारी का कोई निश्चित कारण नहीं होता है। फिर भी नीचे वर्णित कारणों से यह बीमारी हो सकती है –

  • वायरस-बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण ।
  •  कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता के कारण।
  • मनोवैज्ञानिक समस्याएं जैसे तनाव और भावनात्मक के कारण ।
  • महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव भी कई बार इसके कारण  हो सकते हैं ।
  • अपौस्टिक भोजन के कारण भी यह बीमारी हो सकती है।

सावधानियां 

इस गंभीर बीमारी से बचने के लिए इन चीजों का ख्याल रखना चाहिए :-

  • खूब पानी पीएं ताकि शरीर में इसकी कमी से थकावट न हो।
  • सोने की दिनचर्या को ठीक रखें, बिस्तर पर तभी जाएं जब नींद आ रही हो।
  • दिन में बिल्कुल भी न सोएं और ज्यादा फैटी फूड का सेवन न करें।
  • सोने के पहले शराब, कैफीन और तम्बाकू आदि का इस्तेमाल न करें।
  • रोजाना हल्का व्यायाम करें।
  • शाम को खाने के बाद थोड़ा टहलें।
  • खाने में फलियां, मेवे, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और ग्रीन टी लें।

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम का योग से इलाज –

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम (सीएफएस) नए युग की देन है, लेकिन इसका सबसे अच्छा इलाज प्राचीन योग में छुपा हुआ है। हमारे जीवन के भावनात्मक पहलू के साथ-साथ व्यक्तिगत और पेशेवर पहलू को तबाह कर देने वाले इस शांत और उपेक्षित रोग से दो-दो हाथ करने में योग बहुत ही मददगार साबित हुआ है। सीएफएस के इलाज के लिए एलोपैथिक और अन्य वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों का भी सहारा लिया जाता है, लेकिन यह समस्या को जड़ करने की बजाय केवल रोग से उत्पन्न समस्याओं का ही उपचार करती हैं। योग न सिर्फ समस्या को शुरुआत में ही नष्ट करके सीएफएस से बचाव कर सकता है, बल्कि पूर्ण विकसित अवस्था का भी पूरी तरह सफाया करने में सक्षम है।

योग इस अवस्था को शुरुआत में ही पहचानता है और इसके यौगिक उपचार में भागम भाग को धीमा करना और नियमित रूप से ध्यान लगाना भी शामिल है। साथ ही योग में कुछ सरल व्यायाम भी है जो शरीर में मौजूद तनाव की गुत्थी को सुलझाने में मददगार होते हैं। इसके लिए योग में पवन मुक्तासन शृंखला एवं शक्ति बंध शृंखला के आसान दौर के अभ्यास की सलाह दी जाती है। योग थैरेपी में ब्रह्मरी, उज्जयी और बैली ब्रीदिंग जैसे सरल संतुलनकारी और उपचारात्मक प्राणायाम निश्चित ही शामिल होते हैं।  इस समस्या को जड़ से खत्म करने में योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चिकित्सीय पद्धतियों के अत्यधिक इस्तेमाल से दीर्घावधि में यह समस्या और भी बढ़ सकती है। इस स्थिति में अनगिनत लक्षणों के व्यूह रचना को तोड़ने के लिए योग से बेहतर क्या हो सकता है।                            (क्रोनिक फटीग सिंड्रोम के कारण, लक्षण और योग से इलाज )

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम से छुटकारा कैसे पाएं 

  • अपने हायपोथैलेमस से बात करने का एक मात्र साधन है आपकी सांस। जब आप घबराए हुए होते हैं तो आपकी सांस के माध्यम से प्रधान ग्रंथि (मास्टर ग्लैंड) को खतरे की स्थिति से लड़ने के लिए शरीर की सभी गतिविधियों में बदलाव करने का संदेश मिलता है। सही प्रकार से और ध्यानपूर्वक किया गया श्वसन संपूर्ण दिमाग और शरीर को शांत करने के लिए पहला कदम है।
  • इसके बाद आपको व्यायाम को रफ्तार देनी होगी। आप जो भी व्यायाम करें वे शरीर को शांत करने वाले होने चाहिए। इसमें पवन मुक्तासनों की श्रृंखला खास तौर पर ऐसी ही स्थितियों के लिए तैयार की गई है।
  • शारीरिक तंत्र को नुकसान पहुंचाए बिना योग धीमे-धीमे सुधार करता है। दूसरे व्यायामों से अलग योग एक संपूर्ण हेल्थ पैकेज है, जो शरीर के विभिन्न हिस्सों को एक साथ सुधार सकता है।

बेली ब्रीदिंग आसन 

क्रोनिक फटीग सिंड्रोम (सीएफएस) बीमारी को बेली ब्रीदिंग आसन को नियमित रूप से अपना कर दूर किया जा सकता है , बेली ब्रीदिंग आसन नीचे दिए तरीके के अनुसार करना चाहिए ।

पीठ के बल लेट जाएं। घुटनों को इस प्रकार मोडे कि आपके पैर के तलवे जमीन को स्पर्श करें। घुटनों को पास में लाएं और पैरों को अंदर अपने नितम्ब के करीब लाएं। दायां हाथ पेट पर रखें और बायां धड़ के करीब जमीन पर रखें। आंखें बंद करके अपनी सांस पर ध्यान केन्द्रित करें। यह भी ध्यान रखें कि श्वसन के साथ पेट के आकार में बदलाव हो रहा हो यानी जब आप सांस अंदर लें तो पेट फूलना चाहिए और जब सांस छोड़ें तो पेट अंदर की ओर जाना चाहिए। सांस के साथ उलटी गिनती गिनें जैसे जब आप सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें तो 50 गिनें फिर 49 और इस प्रकार शून्य तक जाएं। इस पूरी प्रक्रिया में पांच मिनट का समय लगता है। यह मुद्रा तनाव से मुक्त करती है और हायपोथैलेमस को यह संदेश देती है कि सब ठीक है, जिससे सुधार की प्रक्रिया को मदद मिलती है।

बेली ब्रीदिंग आसन के लाभ 

बेली ब्रीदिंग से श्वसन प्रक्रिया में सुधार होता है। सिर्फ छह सप्ताह तक इसका नियमित अभ्यास श्वसन तंत्र की मरम्मत करता है और प्रतिरोधक क्षमता की वृद्धि में सहायक है। इससे शारीरिक सुधार की प्रक्रिया शुरू होती है, जिससे पाचन प्रक्रिया को प्रभावित करके शरीर पोषक तत्वों को तुरंत अवशोषित कर लेता है। यह न सिर्फ कब्ज में राहत प्रदान करता है, बल्कि यह आसन तनाव से भी मुक्त करने का प्रभाव शाली साधन होता है।

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