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नींद आने का मंत्र

नींद आने का मंत्र – अच्छी नींद आने के लिए क्या करें ?

आज कल की व्यस्तम से व्यस्तम जिंदगी में कम नींद आना बहुत से लोगों की समस्या सी बन गयी है । 24 घंटे में कम से कम 6 से 7 घंटों की नींद स्वस्थ जीवन के लिए आवश्यक है। कम  नींद आने से कई बीमारिया घर कर जाती हैं, हम तनाव का शिकार होने लगते हैं । इस लेख में अच्छी नींद लेने के लिए जानते हैं नींद आने का मंत्र और अच्छी नींद आने के लिए क्या करें ?

Glossolalia (ग्लोसोलालिया) अपनाएँ

मानव मन एक विशाल हिमखंड की तरह है जिसका बिल्कुल थोड़ा सा यानी दस प्रतिशत हिस्सा प्रकट होता है, और लगभग नब्बे प्रतिशत सतह के नीचे होता है। इस छिपे हुए हिस्से से हमारा कोई संबंध नहीं होता क्योंकि हम अपने ही घर के बाहर बरामदे में जीते हैं। घर का असली मालिक तो भीतर रहता है। मनुष्य के सारे तनाव, बीमारियां, वृत्तियां अंदर गहरे में छिपे रहते हैं। जब तक उनकी जड़ों में नहीं पहुंचा जाता तब तक उन्हें उखाड़ फेंकना मुमकिन नहीं होता। ओशो ने ऐसी कतिपय ध्यान विधियां बनाई हैं, जो मन की गहरी परतों की सफाई कर सकें।

इसके लिए उन्होंने विश्वभर की कुछ प्राचीन विधियों को पुनर्जीवित भी किया है। एक बहुत ही प्राचीन विधि है, जो ओल्ड टेस्टामेंट में, पुरानी बाइबिल में उल्लेखित है। उन दिनों इस विधि को ‘ग्लोसोलालिया’ कहा जाता था और अमेरिका के कुछ चर्च अभी भी इसका उपयोग करते हैं। वे इसे ‘जीभ की बोली’ कहते हैं। यह एक अद्भुत विधि है, सीधे अचेतन मन का भेदन करने वाली गहनतम विधियों में से एक। इनमें ऐसी बोली बोलना है जिसमें न कोई शब्द हैं, न उनके अर्थ । सिर्फ ध्वनियां होती हैं और तल्लीनता से उनका उच्चारण करना है।

चिड़ियों की भाषा बोलें

आप अच्छी नींद ले लिए चिड़ियों की भाषा बोल सकते हैं  जैसे आप ‘ल, ल, ल’ के उच्चार से शुरू कर सकते हैं, फिर बाद में जो कुछ ध्वनि आए उसके प्रवाह में बहें। कल्पना करें कि आप एकदम छोटे बच्चे हो गए हैं जब आपने बोलना नहीं सीखा था। केवल अर्थहीन ध्वनियां करते थे। उस अवस्था में प्रवेश कर जाएं और अनजान अक्षर मुंह से निकलने दें। केवल पहले दिन आप थोड़ी कठिनाई अनुभव करेंगे, बड़ा अजीब सा लगेगा, क्योंकि आपको सदा तर्कसंगत बोलने की आदत जो है। तर्क को छोड़ दें और शब्दों को भी छोड़ दें। पक्षियों जैसी चहचहाहट शुरू करें। एक बार यह चल पड़े तो फिर आप इसका राज, इसका गुर जान गए। फिर आपके मन में नन्हे शिशु जैसी पुलक उठेगी। आप भी चहकने लगेंगे।

हर रात को सोने के पहले एक छोटा सा प्रयोग कर सकते हैं, जो बहुत ही सहायक होगा। प्रकाश बुझा लें, सोने के लिए तैयार होकर अपने बिस्तर पर बैठ जाइए-पंद्रह मिनट के लिए। आंखें बंद कर लें और फिर कोई निरर्थक एकसुरी आवाज निकालना शुरू करिए, और प्रतीक्षा करें कि मन आपको नई ध्वनियां देता जाए। एक ही बात याद रखनी है कि वे आवाजें या शब्द उस किसी भाषा के न हों जो आप जानते हैं। पहले दिन कुछ क्षणों के लिए आपको कठिनाई होगी, क्योंकि वह भाषा आप कैसे बोल सकते हैं जो जानते ही नहीं? एक बार शुरू भर हो जाएं, फिर भीतर से जैसे धारा फूट पड़ती है। इससे सतह पर जीने वाला चेतन मन बिल्कुल शिथिल और विश्रान्त हो जाएगा और अचेतन मन बोलने लगेगा।                  नींद आने का मंत्र

जब मन का अचेतन हिस्सा बोलता है, तो वह कोई भाषा नहीं जानता, क्योंकि उसकी कोई शिक्षा नहीं होती। सारी शिक्षा चेतन मन की होती है। इस विधि का पंद्रह मिनट का अभ्यास आपके चेतन मन को गहरा विश्राम देगा। फिर उसके बाद आप बस लेट जाएं और निद्रा में डूब जाएं। आपकी नींद गहरी हो जाएगी। रात नींद जितनी गहरी होगी उतने आप सुबह बिल्कुल ताजा अनुभव करेंगे।

ओशो की ध्यान विधि

ग्लोसोलालिया के आधार पर ओशो ने एक खास ध्यान विधि बनाई है  ओशो देववाणी ध्यान। यह ध्यान पूरे एक घंटे का है और इसमें पंद्रह-पंद्रह मिनट के चार चरण हैं। सभी चरणों में आंखें बंद रखनी हैं। देववाणी का अर्थ है परमात्मा की वाणी। इसमें साधक को माध्यम बनाकर दिव्यता ही गति करती है और बोलती है, साधक एक रिक्त पात्र और ऊर्जा प्रवाह के लिए एक मार्ग बन जाता है। यह ध्यान जीभ का लातिहान है। लातिहान एक ऐसा प्रयोग होता है जिसमें स्वयं को अस्तित्व के हाथों में पूरी तरह छोड़ना होता है। जैसे सूखा पत्ता नदी की धारा के साथ बहता रहे। अपनी जीभ को समर्पित कर दें और अस्तित्व जो आवाजें निकलवाए उन्हें निकालते रहिए। यह विधि चेतन मन को बहुत गहराई से शिथिल करती है। इसे निम्न प्रकार से कर सकते हैं :-

पहला चरण

पंद्रह मिनट तक आंखें बंद कर शांत बैठ जाएं और सौम्य संगीत को आराम से सुनिए।                              नींद आने का मंत्र

दूसरा चरण

पंद्रह मिनट निरर्थक आवाजें निकालना शुरू करें, उदाहरण के लिए ‘ल, ल, ल’ से प्रारंभ करें और उस समय तक जारी रखें जब तक कि एक अज्ञात भाषा प्रवाह जैसे लगने वाले शब्द न आने लगें। ये आवाजें मस्तिष्क के उस अपरिचित हिस्से से आनी चाहिए जिसका उपयोग बचपने में शब्द सीखने के पहले आप करते थे। इस तरह कहें मानो आप किसी से बातचीत कर रहे हैं। बातचीत की शैली में कोमल ध्वनि वाले शब्द-प्रवाह को आने दें। इसमें रोना, हंसना, चीखना, चिल्लाना इत्यादि नहीं करना है।

तीसरा चरण

पंद्रह मिनट तक आंख बंद किए आहिस्ता से खड़े हो जाएं, और अनजानी भाषा में बोलना जारी रखें, अब उच्चारित शब्दों के साथ एक लयबद्धता में शरीर को धीरे-धीरे गति करने दें, मुद्राएं बनाने दें जैसे बांस का लचीला पेड़ हवा में झूल रहा हो। यदि आपका शरीर वाकई शिथिल होगा तो सूक्ष्म ऊर्जाएं आपके भीतर लातिहान जैसी मुद्राएं और गतियां पैदा करेंगी। आप साफ महसूस करेंगे कि इन्हें आप नहीं कर रहे हैं, ये अपने आप हो रही हैं। बहुत सुखद अनुभव है यह। आप पर मदहोशी सी छा सकती है।

चौथा चरण

पंद्रह मिनट तक सारी क्रियाएं बंद करके लेट जाएं, शांत और निष्क्रिय बने रहें। अंदर और बाहर घिरे हुए मौन में डूब जाएं ।।

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