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मोटापे से कैसे छुटकारा पाएं ?

मोटापे से कैसे छुटकारा पाएं ? खाना पीना बदल कर पेट की चर्बी कम करें –

मोटापे से कैसे छुटकारा पाएं ? – खाना पीना बदल कर पेट की चर्बी कम करें –

प चाहे जिस उम्र के हों, गोरे हों या काले, चाहे जिस  छेत्र के रहने वाले हों, अमीर हों या गरीब ( वैसे अमीर मोटापे से ज्यादा परेशान रहते हैं ) अगर आप  मोटापे से परेशान हैं, तो आपको ये लेख पड़ने की आवश्यकता है। आज के समय में हर कोई मोटापे से परेशान है। कहा जाता है कि मोटापा कई बीमारियों को जन्म देता है । इसलिए हर किसी को फिट रहना बहुत आवश्यक है। इस लेख के माध्यम से आज हम जानते हैं कि मोटापे से कैसे छुटकारा पाएं ? – और समय के साथ साथ अपना खाना पीना बदल कर पेट की चर्बी कैसे कम कर सकते हैं ? आईये जानते हैं : –

मोटापे के नुक्सान –

विश्व के अन्य देशों की तरह भारत में भी अधिक वजन और मोटापे की समस्या बढ़ती जा रही है। संपन्न पश्चिम में यह बहुत महत्वपूर्ण समस्या है। यह केवल अच्छा दिखने का सवाल नहीं है, बल्कि अधिक वजन बहुत सी बीमारियों को बढ़ावा देता है। मजबूरन दिन-रात ढोए जाने वाले ज़रूरत से ज्यादा वजन से हम अपने दिल, फेफड़ों और शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अवयवों और कार्यों पर ज़्यादा मेहनत करने का दबाव बनाते हैं। अंततः ज्यादा वजन  उम्र भी घटाता है।

जलवायु के अनुसार खाना बदलें –

युर्वेद का ज्ञान रखने वाले हमारे ऋषियों ने कहा है जहां आयुर्वेद के सिद्धांत देश और काल तक सीमित नहीं हैं, वहीं आहार और औषध काल देश के अनुसार बदल जाते हैं। प्रकृति द्वारा आहार और औषध का उत्पादन स्थान विशेष की जलवायु और भू-भाग के अनुसार किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, हिमालय के पहाड़ी इलाकों में , नारियल नहीं होते। पूजा और अन्य रस्मों के लिए या भोज्य पदार्थ के रूप में सीमित उपभोग के लिए भी उनका आयात दक्षिण से किया जाता है। जो भी हो, पहाड़ी जलवायु में नारियल, बतौर मुख्य भोजन शरीर के अनुकूल नहीं रहेगा। यहां की जलवायु उष्ण कटिबंधीय दक्षिण से बिलकुल विपरीत है।

समय के अनुसार खाने की आदतें बदलें –

आयुर्वेद के अनुसार, पोषण देश और काल के अनुरूप होना चाहिए। दिन, वर्ष और आपकी उम्र के अलावा भी काल के विभिन्न अर्थ हैं। काल का एक बहुत महत्व पूर्ण आशय, युग या समय की विशेष अवधि भी है। इस तरह, खान-पान संबंधी आदतें समय-अवधि के अनुसार बदलती हैं। उन्हें बदलना समय विशेष की ज़रूरत भी होती है, वरना हम बीमार पड़ जाएंगे। यह भूमिका मैं आपको यह बताने के लिए बांध रहा हूँ  कि अगर हम महानगरों के निवासी हैं तो हमें अपनी खान-पान संबंधी आदतें बदलने की कितनी सख्त जरूरत है। बढ़ती उम्र के साथ भी आपको अपने भोजन की आदते बदलनी होंगी । याद रखिये जैसा आप 25 की उम्र में खा सकते हैं वैसा आप 50 की उम्र में नहीं खा सकते। उम्र बढ़ने के साथ आपको अपने खाने में चिकनाई, मीठा, और तले भुझे पदार्थ खाने कम करने होंगे इसके साथ ही साथ आपको पोस्टिक भोजन व हरी शब्जीयों की तरफ अधिक ध्यान देना होगा । मेरा सुझाव है कि हमें इस समस्या को सुलझाने की शुरुआत खान-पान की आदतों में बदलाव लाकर करनी चाहिए।

शारीरिक तौर पर काम और व्यायाम  करें :-

पिछले तीस  वर्षों में हमारे देश में जीवन ज़बर्दस्त तरह से बदला है। तकनीकी उन्नति से पैसा ज्यादा आने लगा है और शारीरिक गतिविधियों में कमी आई है। आज ज्यादा से ज्यादा लोगों के पास अपने वाहन हैं । यहां तक कि लोग थोड़ी सी दूरी भी पैदल तय करने से कतराते हैं। ज्यादा धन और कम शारीरिक गति विधि के इस संयोग का नतीजा हमारी सेहत को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। शरीर के बहुत से अंग काम में नहीं आते और अधिक वजन की वजह से वे और भी सुस्त हो जाते हैं। क्योंकि अधिक वजन शरीर को और आलसी बनाता है और हमारी हिलने-डुलने की इच्छा नहीं होती। हम एक दुष्चक्र में फंस जाते हैं और कम सक्रिय रहने पर वजन बढ़ता जाता है। इसका एक ही उपाय है की हम काम दूरी पैदल तय कर सकते हैं । फुरसत में हमें व्यायाम करना चाहिए इसके अल्वा हम अपने छोटे मोटे घरेलू काम खुद कर सकते हैं, इससे भी वजन घटाने में हमें बहुत सहायता मिलेगी ।

पारंपरिक भोजन की जगह पोस्टिक भोजन खाएं :-

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में वजन बढ़ाने वाले उत्पादों के बारे में स्पष्ट रूप से बताया गया है। सभी प्रकार के अन्न वजन बढ़ाते हैं। भारतीय भोजन गेहूं और चावल से बने उत्पादों के इर्द-गिर्द घूमता है और उत्तर भारत में लोग अक्सर अपनी खुराक, खाए जाने वाले फुलकों की संख्या से गिनते हैं। ऐसा करते समय वे उसके साथ खाई जाने वाली बाकी चीज़ों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। ज्यादा वजन वाले अधिकतर लोग पर्याप्त मात्रा में दाल, दही या रायता, बेसन, मांस , मछली , समोसे , पकोड़े आदि से बनी दूसरी चीजें और इसी तरह और भी बहुत सी चीजें खाते हैं। दूसरे शब्दों में, हमारे देश में, हमने काल या आधुनिकीकरण के बदलते समय के अनुरूप अपनी खुराक नहीं बदली है। हम आज भी वैसे ही खाते हैं जैसे खेत में हल चलाना हो या दिन में कई किलोमीटर पैदल चलना हो। हमें बदलते वक्त के  साथ अपना भोजन भी बदलना होगा ।

शारीरिक मेहनत का काम नहीं करने पर भी हमें पोषण की ज़रूरत होती है। ऐसे पोषाहार की जरूरत होती है जिसमें सभी संभव पोषक तत्व हों और जो अग्नि (मेटाबॉलिज्म) बढ़ाए ताकि भोजन शरीर में चर्भी के रूप में इकट्ठा न हो सके। वजन न बढ़ाने वाले लेकिन संतुलित भोजन के लिए नीचे बताई गई चीज़ों पर ध्यान दें :-

  • अपने भोजन में अन्न की मात्रा कम कर दें। शुरू में आपको पेट खाली-खाली लगेगा, लेकिन जल्द ही आदत हो जाएगी। अन्न में दाल, चावल, गेहूं, बेसन आदि आते हैं ।
  • सब्जियों का इस्तेमाल बढ़ा दें। बहुत थोड़े से घी या तिल या के  तेल में अलग-अलग तरह की सब्जियों को एक साथ पकाएं ।
  • रिफाइंड तेल, मैदा और ज्यादा चीनी काम में लेने से बचें ।
  • जीरा, अजवाइन, सौंफ, काली मिर्च, पिप्पली, कलौंजी, दालचीनी धनिया और मेथी काम में ले। या तो इन सबको एकसाथ पीस लें या इनमें से अलग-अलग चीजों को साथ काम में लें। ये चीजें प्रतिरोधी तंत्र को मजबूत बनाती हैं ।
  • भोजन में मिर्च की मात्रा कम कर दें। उसके बजाय पिप्पली या काली मिर्च काम में ले सकते हैं।
  • भोजन का समापन फल से करें।
  • भोजन करने के कम से कम चार घंटे पहले कुछ न खाएं।
  • सुबह हल्का व पोस्टिक नास्ता  जरूर करें।
  • भोजन एक साथ खाने की बजाय थोड़ा थोड़ा दिन में  तीन या चार बार खाएं ।
  • हो सके तो भोजन के आधा घंटा बाद तक पानी न पियें ।
  • सुबह की चाय बिना दूध की पियें और हो सके तो ग्रीन टी पियें।
  • दूध या चाय बिना चीनी की पियें और चाय में दालचीनी का प्रयोग करें।
  • सोने से काम से कम 2 घंटे पहले भोजन कर लें , अगर सम्भव हो तो 4 घंटे पहले भोजन करें तो और अच्छा रहेगा।
  • अपना शरीर ऐसा बनाएं कि दिन में तीन बार भोजन करना पर्याप्त हो।
  • अत्यधिक नमक वाली सभी चीज़े खाने से बचें।
  • मीठे का प्रयोग कम करें, ज्यादा इच्छा होने पर खाने के बाद थोड़ा गुड़ खा लें ।
  • किसी भी तरह के स्नैक्स न खाएं, अधिकतर, चमकीले एल्युमिनियम की पैकिंग में आने वाले स्नैक्स मोटापे का कारण बनते  हैं । यदि खाना ही हो तो इन औद्योगिक उत्पादों की बजाय कुछ परंपरागत चीजें खाएं।
  • हफ्ते में एक दिन नमक और अन्न से बने उत्पाद न खाकर आंशिक रूप से व्रत रखें ।
  • दिन में दूध से बने उत्पाद और एक प्लेट सूखे मेवे और शाम को भूख के अनुसार आलू के साथ एक प्लेट मिक्स वेजीटेबल खाएं । आलू तलें नहीं, उबालें ।
  • वजन कम करने के लिए डाइटिंग कभी न करें,  इसकी बजाय आप संतुलित आहार का सेवन कर सकते हैं।  संतुलित आहार के सेवन  से वजन नहीं बढ़ता तथा व्यक्ति स्वस्थ रहता है। अगर आप तीनों समय के भोजन में  किसी  एक बार का भोजन छोड़ते हैं तो उससे आप अगली बार  में अधिक भोजन खाएंगे जिससे  वजन बढ़ेगा ।

अंत में –

इस सब के बाद आप महसूस करेंगे कि आपको कम नींद की ज़रूरत  है और इस तरह आप निष्क्रियता, अत्यधिक नींद और वजन बढ़ने के दुष्चक्र से मुक्त हो जाएंगे और आप अपने मोटापे से  छुटकारा पा सकते हैं ।।

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