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हकलाना या तुतलाना किसे कहते हैं ?

हकलाना या तुतलाना किसे कहते हैं ? – What is stuttering or lilting? :-

हकलाना या तुतलाना किसे कहते हैं ? – What is stuttering or lilting? :-

                                                                                                   आज हम इस लेख से यह जानने  की  कोशिश करते हैं कि हकलाना या तुतलाना किसे कहते हैं ? What is stuttering or lilting? :-

 

हकलाना या तुतलाना किसे कहते हैं ? –

                                                    कलाना या तुतलाना  कोई रोग या बीमारी नहीं है अपितु यह शब्दों के उच्चारण का स्पष्ट रूप से न होना अर्थात् भाषा का दोष होना है। साधारण बोलचाल की भषा में जब कोई अटक अटक के बोलता है तो उसे हकलाना या तुतलाना कहते हैं ! हकलाना एक आम समस्या है, एक अनुमान के मुताबिक दुनीया की लगभग १५ प्रतिशत आबादी इस समस्या से ग्रसित है ! अक्सर कुछ बच्चे बोलते समय हकलाते हैं, यह प्रवृत्ति उनमें बचपन से ही होती है, यदि बचपन में ही उन पर ध्यान न दिया जाये तो बड़े होने पर यही भाषा शैली उनके व्यक्तित्व में बाधा पहुंचाती है, वे समूह में बातें करते समय शर्म महसूस करते हैं। कुल मिलाकर उनका व्यक्तित्व ही कुंठित हो जाता है। ऐसे बच्चों में हीन भावना घर कर जाती है, वे चुप, उदास और आत्मलीन हो जाते हैं। कुल मिलाकर हकलाना  प्रभावी व्यक्तित्व में बाधक होता है !

दोषी कौन ?

                          अब ये सवाल उठता है कि  इन सब बातों के लिये कौन दोषी है ? निश्चित रूप से  बच्चे के माता-पिता ही सर्वप्रथम दोषी हैं , जिन्होंने समय रहते इस  पर ध्यान नहीं दिया । यदि शुरूआत में ही ऐसे बच्चों के गलत उच्चारण पर या हकलाने पर ध्यान दिया जाता, तो बड़े होने पर वे हीन भावना से ग्रस्त नहीं होते ।

हकलाहट के प्रकार :-

                                           हकलाहट भी दो प्रकार की होती है पहले किस्म की हकलाहट स्वर से संबंधित होती है। इसमें बच्चा प्रथम शब्द बोलते समय अटकता है, लेकिन आगे वह पूरा वाक्य बिना हकलाए धारा प्रवाह बोल सकता है। इस प्रकार की हकलाहट का मुख्य कारण स्वर तंत्र में किसी गड़बड़ी के कारण होती है ।                                               

                                             दूसरे किस्म की हकलाहट में बच्चा किसी एक शब्द पर अटक जाता है और उस शब्द का उच्चारण कई बार करता है। इस प्रकार की हकलाहट के शिकार बच्चे अक्सर हीन भावना का शिकार हो जाते हैं  और स्वयं को असुरक्षित महसूस करने लगते हैं। कई बार हकलाने में आवाज एकदम अवरुद्ध हो जाती है और कुछ समय तक ध्वनि नहीं निकल पाती है ।

 

हकलाहट के प्रमुख कारण –

                                           हकलाहट किन कारणों  से होती है इसका वैज्ञानिकों को अभी तक पूरी तरह से पता तो नहीं चल पाया है और न  ही अभी तक इसका कोई  पक्का इलाज ही है ! ह्क्लानें के कारणों में से कई  बार जीभ मोटी होने के कारण भी बच्चा हकलाता है। बच्चे के मुंह से आवाज नहीं निकल पाती । बोलने के प्रयास में उसके जबड़े और होंठ हिलते रहते हैं किंतु आवाज नहीं निकल पाती, ऐसी स्थिति बच्चे में अनजान व्यक्ति से बात करने या समूह में बात करने पर होती है। हकलाने की शुरूआत दो या ढाई वर्ष की उम्र से 6 वर्ष की उम्र तक होती हुई प्रायः धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है। जब बच्चा बोलना सीखता है तभी मां और पिता दोनों ही उससे तुतलाते हुये बात करते हैं और उसके उसी तरह बोलने पर आनंदित भी होते हैं। इससे उसे प्रोत्साहन मिलता है। धीरे-धीरे इस प्रकार बोलना उसकी आदत में शुमार हो जाता है। बाद में यही बच्चा बड़ा होकर हकलाता है, तो उसका मजाक उड़ाया जाता है।

                                      इसके आलावा कई बार किसी  मासपेशी के खिचाव के कारण भी  हकलाने कि समस्या हो सकती है ! कभी कभी हकलाने की समस्या मस्तिस्क में आक्सीजन की सही मात्रा न पहुंच पाने के कारण भी उत्पन्न हो सकती है !

 

हकलाहट से छुटकारा  –

                                बच्चों की हकलाहट पर बिल्कुल शुरूआत में ही ध्यान देना चाहिये। एक्सपर्ट के मुताबिक़ तुतलाने के ८० से ९० प्रतिशत मामलों ठीक हो जाते हैं ! उसे ऐसे माहौल में रखें जहां उसका इस कमजोरी के कारण मजाक न उड़ाया जाता हो। उसमें आत्म विश्वास का संचार करें। जिस शब्द को बोलने में वह अटकता है, उसका बार-बार उच्चारण करवाएं, उसे प्रोत्साहित करें। बच्चे की हमेशा प्रशंसा करना चाहिये। बच्चों के साथ हमेशा स्पष्ट भाषा में बात करें। उन्हें गलत उच्चारण पर टोककर सही उच्चारण की जानकारी दें।

                                   अधिक गंभीर समस्या होने की स्थिति में किसी स्पीच थेरेपिस्ट से सलाह लें। वाणी संबंधी दोष मस्तिष्क से भी संबंधित होता है। अत: कभी-कभी मेध्य औषधि देने और पारिवारिक प्रोत्साहन से यह दोष समाप्त भी हो जाता है। इसके अतिरिक्त आप बच्चों को  बादाम की गिरी खिलाकर व सर में तेल से मालिश करके  भी बच्चों को  तुतलाने की समस्या से निजात दिला सकते हैं ! वैसे जयादातर मामलों में उम्र  बड़ने के साथ साथ तुतलाने की समस्या अपने आप ठीक हो जाती है ! इस  प्रकार  से आप वाणी दोष की प्रारंभिक अवस्था में काफी हद तक दूर कर सकते हैं !!

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