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6 प्रकार के आसान योगासन

6 प्रकार के आसान योगासन – Types of Yoga in Hindi –

6 प्रकार के आसान योगासन – Types of Yoga in Hindi –

प्राचीन व्यवस्था के अनुसार  84 प्रकार के मुख्य आसन बताए गए हैं, जिन्हें कम करके विशिष्ट आसनों की सूची बनाई गई है, जिनमें शीर्षासन सहित कुल 36 आवश्यक रूप से किए जाने वाले आसन सम्मिलित किये गए हैं । इनमें से भी 13 आसन विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताये गए हैं  जैसे मयूरासन तथा कूर्मासन नियमित योग का अभ्यास करने वालों को भी कठिन लगते हैं । बदली हुई जीवनशैली और पाश्चात्य ढंग से बैठने के अभ्यास के कारण पद्मासन में बैठना भी कठिन हो गया है । इस तरह के भ्रमित करने वाले विकल्पों के चलते, सामान्य स्वास्थ्य लाभ के आसन करना बेहतर होता है । यहां हम 6 प्रकार के आसान योगासन – Types of Yoga in Hindi बता रहे हैं, जिसको आप अपनी  सामान्य साधना में सम्मिलित कर  सकते हैं ।

  1.  सुप्त उदरकर्षनासन
  2. सुप्त पाद अंगुष्ठासन
  3. हलासन
  4. विपरीत करणी आसन
  5. अर्ध मत्स्येन्द्रासन
  6. हलासन

1- सुप्त उदरकर्षनासन (पेट मोड़ते हुए लेटना) –

यह एक सामान्य स्वास्थ्य वर्धक आसन होता है, जो नियमित योगाभ्यास करने वालों के लिए भी है, क्योंकि यह शरीर को अधिक लचीला बनाता है। इसके लिए पीठ के बल लेट जाएं । अपनी बांहों को दोनों ओर भूमि पर फैलाएं और हथेलियां टिका दें। अब श्वास को भीतर लें ।  दाएं पैर के घुटने को मोड़ें । अपने दाएं पैर के तलवे को बाएं जंघा पर रख दें । बाएं हाथ से दाएं घुटने को बाईं ओर भूमि की तरफ दबाते हुए श्वास छोड़ें। साथ-साथ अपना सिर दाहिने हाथ की ओर देखते हुए मोड़ें। मुड़े हुए घुटने पर से दबाव हटाए बिना सामान्य ढंग से श्वास लें और कुछ क्षणों तक यह मुद्रा बनाए रखें। आराम की मुद्रा में आ जाएं। इस प्रक्रिया को पांच बार दोहराएं। आराम करें। पूरी प्रक्रिया को दूसरी तरफ के लिए भी दोहराएं।

लाभ –

यह आसन पूरे मेरुदंड को अनुप्रस्थ मरोड़ देने वाला लाभ दायक आसन होता  है और सभी प्रकार की मेरु से संबंधित परेशानियों को होने से रोकने में सहायता करता है। यह विशेष तौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो एक स्थान पर बैठे-बैठे काम करते हैं। मेरु के सही आकार में आने से, आप भावनात्मक रूप से मजबूत होते हैं। पैरों का आकार ठीक होता है, जिससे सीधे खड़े रहने में सहायता मिलती है। पेट पर दबाव पड़ने से उपापचय ठीक होता है और वजन कम होता है। कटि और श्रोणि प्रदेश हल्के हो जाते हैं। पेट पर विशेष कर यकृत पर दबाव पड़ने से और भी वजन कम होता है।

2- सुप्त पाद अंगुष्ठासन। (पैर उठाकर लेटना) –

इस आसन को करने के  लिए फर्श पर सीधे लेट जाएं। हाथों को शरीर के साथ सीधा फर्श पर रखें। दाएं पैर को ऊपर उठाएं। ध्यान रखें कि पैर सीधा रहे और घुटने से नहीं मुड़े। यदि पीठ पर अधिक जोर पड़ रहा हो तो दूसरे पैर को मोड़कर रख सकते हैं। सामान्य रूप से श्वास लें। अब दाएं पैर को मोड़कर रख सकते हैं। सामान्य रूप से श्वास लें। दाएं पंजे को इस तरह मोड़ें कि इसका अंगूठा आपकी तरफ हो। धीरे-धीरे पैर को फर्श पर रखते हुए श्वास छोड़ें। पूरी प्रक्रिया तीन बार दोहराएं। बाएं पैर के साथ भी यही प्रक्रिया दोहराएं। जिन लोगों को कमर के निचले भाग में दर्द हो या हृदय रोग या उच्च रक्तचाप हो, वे इसे न करें

लाभ –

यह आसन मेरुदंड को सीधा करके और पैर व श्रोणि संधि की मांसपेशियों को सही आकार देकर नियमित योगाभ्यास करने वाले लोगों की योग साधना को नई ऊंचाई प्रदान करता है। कुछ योग मतों के अनुसार इसमें श्वास लेने का क्रम अलग होता है। आसन करने के दौरान श्वास सामान्य रूप से लेते रहना महत्वपूर्ण है। यह पेट की मांसपेशियों को सही आकार में लाता है और जंघाओं पर से वसा की परतें कम करके सौंदर्य को बढ़ाता है। यह अधिकतर रोगों में लाभप्रद होता  है। मूत्र-जनन तंत्र से संबंधित परेशानियों को दूर करने में सहायक है। उदर की शक्ति बढ़ाता है, उपापचय को ठीक करके वजन कम करता है। पैरों को सही आकार देकर, कटि भाग को हल्का करता है। घुटने का दर्द ठीक करता है। यह शीर्षासन जैसे कठिन आसनों के लिए तैयार होने में सहायता करता है। अतः यह एक प्रकार से मध्यवर्ती आसन है।

3 – हलासन (हल की मुद्रा) –

यह आसन सभी अंतः स्रावी ग्रंथियों पर प्रभाव डालता है, जिनसे भावनाएं और मूड प्रभावित होते हैं अतः यह बहुत ही लाभदायक आसन है। इसके अलावा इससे मेरु का व्यायाम होता है, जो ऊर्जावान बने रहने में सहायता करता है। इसे विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में किया जाए तो बेहतर होता है। यह आसन करने के लिए कमर के बल लेट जाएं। पैर इस तरह फैलाएं कि दोनों पंजे एक-दूसरे को छूते रहें। श्वास लें। विपरीत करनी मुद्रा करें  दोनों पैर ऊपर उठाएं। श्वास लें। दाएं पैर को सिर के ऊपर से पीछे भूमि पर रखते हुए श्वास छोड़ें। पुनः पूर्वावस्था में आ जाएं। पूरी प्रतिक्रिया को बाएं पैर के साथ दोहराएं। कुछ हफ्तों के अभ्यास के बाद आप आसानी से अंतिम अवस्था तक पहुंच जाएंगे। दोनों पैरों को सिर के पीछे ले जाने के लिए श्रोणि प्रदेश के हाथों के सहारे से ऊपर उठाएं। पूरी प्रक्रिया के दौरान सामान्य ढंग से श्वास लें।

लाभ –

गर्दन और ठोढ़ी पर दबाव पड़ने से थायरॉइड पर असर पड़ता है तथा उदर के सिकुड़ने से उपापचय बढ़ता है। अवसाद से निकलने के लिए यह बहुत अच्छा उपाय है। मेरु में खिंचाव से इससे संबंधित सभी परेशानियां दूर होती हैं। उलटे होने के अन्य आसनों की तरह इससे भी चेहरे में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जो उसमें ताजगी लाता है। मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बढ़ने से वह सजग रहता है। यह मधुमेह रोगियों के लिए भी उपयोगी होता है।

4 – विपरीत करणी आसन –

विपरीत करणी आसन में  चमत्कारिक लाभ देने की शक्तियां होती हैं। प्राचीन योग साहित्य में इसे मृत्यु को हराने वाली मुद्रा  कहा गया है, क्योंकि यह आपको युवा बनाए रखती है और आपके शरीर को ओज और ऊर्जावान बनाती है। यह उच्च प्राणायाम साधना का भी हिस्सा है, क्योंकि उल्टे होने के परिणाम स्वरूप इससे फेफडे साफ हो जाते हैं। इसे करने के लिए कमर के बल लेटें। हाथों को शरीर के साथ रखते हुए हथेलियों को भूमि पर टिकाएं। श्वास लें। हथेलियों को दबाते हुए अपने आप को ऊपर उठाएं। श्रोणि प्रदेश को ऊपर उठाएं और हथेलियों से सहारा दें। इससे शरीर का वजन हथेलियों, कुहनी और गर्दन पर आ जाता है। इस दौरान सामान्य रूप से श्वास लें। कुछ क्षण इसी स्थिति में रहें। हथेलियों को हटाकर फिर से भूमि पर रखें। श्रोणि को नीचे ले आएं, ताकि मेरु भूमि पर सीधी हो जाए। पैरों को भूमि पर सीधा कर लें। श्वास के सामान्य होने तक आराम करें।  जिन्हें उच्च रक्तचाप, हृदय रोग या गर्दन में दर्द की परेशानी हो, वे ये आसन न करें।

लाभ –

इस आसन में गुरुत्व के विरुद्ध मुद्रा होने के कारण यह शरीर पर बहुत सकारात्मक प्रभाव डालती है तथा बढ़ती उम्र के चिह्नों को मिटाती है। 6 प्रकार के आसान योगासन – Types of Yoga in Hindi –

 

 5- अर्ध मत्स्येन्द्रासन (आधी मेरु में घुमाव ) –

यह आसन भी सभी योग धाराओं का एक उत्कृष्ट आसन है। मेरुदंड को अनुप्रस्थ घुमाव देने वाला यह आसन न केवल मेरुदंड बल्कि पूरे धड़ में मौजूद सभी अंगों में शक्तिशाली संकुचन-शिथिलन प्रभाव उत्पन्न करता है। इससे पूरे शरीर और मस्तिष्क में ताजे रक्त का प्रवाह होता है। इससे उम्र के साथ बेकार हुए और कठोर हो गए अंगों में भी रक्त प्रवाह होता है। यह आसन करने के लिए अपने पंजों पर वज्रासन की तरह बैठ जाइए।  श्रोणि को बाईं ओर भूमि पर टिकाएं। दाएं पंजे को बाएं घुटने के नीचे ले जाएं। श्वास लें। बाएं हाथ को सिर से ऊपर उठाएं, इसे कोहनी से मोड़कर दाएं घुटने पर रख दें। साथ-साथ दाईं हथेली को भूमि पर टिकाएं। श्वास छोड़ें। जितना हो सके दाईं ओर घूमें। सामान्य ढंग से श्वास लेते हुए इस स्थिति को जितनी देर संभव हो बनाए रखें। आराम करें। पूरी प्रक्रिया को दूसरी ओर के लिए दोहराएं। पीठ में अधिक दर्द होने की स्थिति में इसे न करें।

 लाभ –

यह आसन मधुमेह रोग से संबंधित ग्रंथियों पर प्रभाव डालता है। वसा कम करता है। श्वास क्षमता में सहायक होता है ।

6- हलासन (हल की मुद्रा) –

यह आसन सभी अंतः स्रावी ग्रंथियों पर प्रभाव डालता है, जिनसे भावनाएं और मूड प्रभावित होते हैं अतः यह बहुत ही लाभदायक आसन है। इसके अलावा इससे मेरु का व्यायाम होता है, जो ऊर्जावान बने रहने में सहायता करता है। इसे विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में किया जाए तो बेहतर होता है। यह आसन करने के लिए कमर के बल लेट जाएं। पैर इस तरह फैलाएं कि दोनों पंजे एक-दूसरे को छूते रहें। श्वास लें। विपरीत करनी मुद्रा करें , दोनों पैर ऊपर उठाएं। श्वास लें। दाएं पैर को सिर के ऊपर से पीछे भूमि पर रखते हुए श्वास छोड़ें। पुनः पूर्वावस्था में आ जाएं। पूरी प्रतिक्रिया को बाएं पैर के साथ दोहराएं। कुछ हफ्तों के अभ्यास के बाद आप आसानी से अंतिम अवस्था तक पहुंच जाएंगे। दोनों पैरों को सिर के पीछे ले जाने के लिए श्रोणि प्रदेश के हाथों के सहारे से ऊपर उठाएं। पूरी प्रक्रिया के दौरान सामान्य ढंग से श्वास लें।

लाभ –

गर्दन और ठोढ़ी पर दबाव पड़ने से थायरॉइड पर असर पड़ता है तथा उदर के सिकुड़ने से उपापचय बढ़ता है। अवसाद से निकलने के लिए यह बहुत अच्छा उपाय है। मेरु में खिंचाव से इससे संबंधित सभी परेशानियां दूर होती हैं। उलटे होने के अन्य आसनों की तरह इससे भी चेहरे में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जो उसमें ताजगी लाता है। मस्तिष्क में रक्त प्रवाह बढ़ने से वह सजग रहता है। यह मधुमेह रोगियों के लिए भी उपयोगी है।

मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आपको मेरा ये लेख 6 प्रकार के आसान योगासन – Types of Yoga in Hindi –  बहुत पसंद आया होगा, मेरा हौसला बढ़ाने के लिए आप कमेंट करके मुझे अपने सुझाव दे सकते हैं, ताकि मैं ऐसे अन्य लेख आपके लिए निरंतर लिखता रहूं । आप अगर मेरा उक्त लेख शेयर करेंगे तो मुझे अच्छा लगेगा ।

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