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Hydroponics – बिन मिट्टी के उगाएं पौधों की बगिया –

Hydroponics – बिन मिट्टी के उगाएं पौधों की बगिया –

                                                                                                                                                                                                     मारे घरों में खुली जगह  के सिकुड़ने का सबसे अधिक प्रभाव बागवानी के शौक पर पड़ा है। विशेष रूप से नगरों में तो घरों में कच्ची मिट्टी की जगह अब आसानी से उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आपके बागवानी के शौंक को पूरा करने के लिए हाइड्रोपोनिक्स – Hydroponics एक बेहतर विकल्प हो सकता है।

                                                         अगर आप किसी बहुमंजिला अपार्टमेंट में रहने वाले हैं और आप चाहते हैं कि आपके घर के अंदर भी एक छोटा सा बगीचा हो तो Hydroponics नामक नई तकनीक से आपका यह सपना सच हो सकता है । खेती से जुड़ी यह नई तकनीक  काफी सफल हो रही है।  हाइड्रोपोनिक्स तकनीक पर दिल्ली स्थित एग्रीटेक स्टार्टअप Agro-2o काफी काम कर चुकी  है।  इस तकनीक से घर के अंदर या बाहर फूल, सब्जियां या दूसरे तरह के पौधे उगाने के लिए मिट्टी की जरूरत बिलकुल नहीं पड़ती है। इस तकनीक से घर के अंदर जड़ी-बूटियां, फूल और सब्जियों को उगाना संभव हो गया है।

 

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हाइड्रोपोनिक्स ( Hydroponics) क्या है ? :-

                                                                                                            बिना भूमि के पौधे उगाने को हाइड्रोपोनिक्स कहा जाता है अथवा  बिना मिटटी की बागवानी के लिए जो टर्म इस्तेमाल होती है, वो है हाइड्रोपोनिक फार्मिंग कहलाती है । हाइड्रोपोनिक एक ग्रीक शब्द है, जो दो शब्दों से मिलकर बना है, हाइड्रो+पोनोज  हाइड्रो यानी पानी और पोनोज यानी लेबर इन दोनों के मिलने से  एक नया शब्द बनता है, जिसका मतलब होत्ता है बिना मिट्टी के वो तकनीक, जिसमें मिट्टी के बगैर ही केवल पानी की मदद से पौधे  उगाकर उनको बढ़ाया उगाए जा सकता है, इसे दी हाइड्रोपोनिक्स विधि कहते हैं ।

                                                       इस विधि से  पौधों के बढ़ने की रफ्तार मिट्टी वाले पौधों से 30-50 प्रतिशत अधिक तेज  होती है। मान लो  अगर बैंगन  की कोई पेड़ मिटटी में तैयार होने में  लगभग दो महीने लेता है , तो हाइड्रोपोनिक विधि से  तीन  हफ्ते में ही तैयार हो जायेगा । ये एक तरह की क्रांति  है, जिसकी मदद से घर के भीतर ही काम की सब्जियां, फूल, पेड़ उगाये जा सकते  हैं।  इसे हम  इनडोर ग्रीन रिवॉल्यूशन भी कह सकते हैं।  इसके तहत घर के अंदर  छोटी-छोटी तश्तरियों में पौधे उगाए जाते हैं, पौधे को पूरा पोषण मिल सके, इसके लिए पौधों को पानी में मिलाकर पोषक तत्व दिए जाते हैं और जहां पौधे लगे  हों, उस कमरे में आर्टिफिशियल लाइट जलाई  जाती है, इसके  साथ ही कमरे का तापमान और नमी पर भी नियंत्रण किया जाता है।

हाइड्रोपोनिक तकनीक –

                                                             अब हम  इस तकनीक को आसान भाषा में समझते हैं,  इसके लिए एक आसान सा उदाहरण यह होगा । आपने कभी अपने घर अथवा  कमरे में पानी से भरे बर्तन में या किसी बोतल में किसी पौधे की टहनी रख दी हो तो आपने देखा होगा कि कुछ दिनों के बाद उसमें जड़ें निकलने  लगती हैं और धीरे-धीरे वही टहनी एक  पौधा बन जाता  है। अक्सर हम लोग सोचते हैं कि पेड़-पौधे उगाने और उनके बड़े होने के लिये खाद, मिट्टी, पानी और सूर्य के  प्रकाश जरूरी होते  हैं,  लेकिन असलियत यह है कि पेड़ पौधों के विकास के लिये सिर्फ तीन चीजों पानी, पोषक तत्व और  प्रकाश  की जरूरत होती है।

                                                            हाइड्रोपोनिक्स खेती आम जानकारी के अभाव में  लोकप्रियता हासिल नहीं कर पाई है। Hydroponics (हाइड्रोपोनिक्स) की शुरुआत रेत (बालू) में पौधे उगाने से हुई थी, पर कालांतर में जाकर पानी में पौधे उगाने की विधि ही विदेशों में लोकप्रिय होती चली गई। पानी में पोषक तत्वों का मिश्रण (घोल के रूप में) मिलाया जाता है ताकि पौधे को जो तत्व मिट्टी व खाद से मुहैया होते हैं, पानी के माध्यम से ही मिलते रहें। इसमें मिश्रण काफी सावधानी पूर्वक तैयार करना होता है, ताकि लवणों की अधिकता से पौधे जल न जाएं । आज हम पानी वाली विधि पर चर्चा करते हैं।

पानी वाली विधि –

                                           पानी वाली इस विधि में आम तौर पर प्लास्टिक, शीशे के गमलों या कंटेनरों का प्रयोग किया जाता है। कहीं-कहीं सीमेंट का गड्ढा भी तैयार किया जाता है। आदर्श रूप में तो गड्ढे की गहराई तीन से साढ़े तीन फीट व चौड़ाई दो से तीन फीट तक होनी चाहिए। फूल व सजावटी पौधों के लिए छोटे आकार के एक से सवा फीट गहरे और इतने ही चौड़े गमले भी उपयुक्त रहते हैं। प्लास्टिक का टब भी बेहतर विकल्प हो सकता है। गमले में तीन-चौथाई व गड्ढे में आधी गहराई तक पानी भर लें। इसके ऊपर तार की जाली लगा दें और जाली के छिद्रों  में इस प्रकार पौधों को लगा दें जिससे कि उनकी जड़े तो पानी के अंदर  रहें  पर तना व शेष भाग पानी से ऊपर रहे ।

पौधों की रोपाई –

                                   पानी वाली विधि में पहले पौधे को कहीं और गड्ढों या गमलों में जाली लगाकर, पानी व उसका घोल तैयार करने के उगा कर तैयार कर लें । पौधे तैयार हो जाने पर उनकी रोपाई पानी के  कंटेनरों, गड्डों या गमलों में  जाली लगाकर, पानी व उसका घोल तैयार करने के बाद की  जानी चाहिए। जाली के सहारे , पौधों को ऐसे लगाएं, ताकि जड़ें पानी के भीतर व शेष भाग ऊपर रहे।

उर्वरक मिश्रण –

                                    Hydroponics (हाइड्रोपोनिक्स) की सफलता का सबसे बड़ा कारक, उर्वरक मिश्रण का सही मात्रा में उपयोग है। यूं तो विभिन्न वैज्ञानिकों  विभिन्न उर्वरकों की विभिन्न मात्राओं में मिश्रण की सलाह देते हैं , साधारण रूप से जो मिश्रण अधिकतर पौधों मेंप्रयुक्त होता है वह निम्न प्रकार से तैयार करें :-

  •  पानी की मात्रा,  50 लीटर
  • नाइट्रेट ऑफ सोडा, 12 ग्राम
  • अमोनियम सल्फेट, 10 ग्राम
  • सुपर फास्फेट , 7  ग्राम
  • कैल्शियम सल्फेट, 5 ग्राम
  • पोटेशियम सल्फेट, 4 ग्राम
  • मैग्नीशियम सल्फेट, 6 ग्राम

                                              ये सभी रसायन स्कूलों के लिए रसायन बेचने वाली दुकानों पर आसानी से मिल जाते हैं। नाइट्रोफॉस्का, पॉलीफीड या मैक्रोफर्ट के नाम से उपलब्ध उर्वरक का प्रति पचास लीटर पानी में 40 ग्राम की दर से गमले में प्रति पखवाड़े आधे लीटर की दर से उपयोग करें। ध्यान रखें घोल तैयार कर सकती हैं। इस घोल का प्रयोग प्रति लीटर पानी वाले कि पानी का पीएच मान 6 से 6.5 के बीच यानी हल्का सा अम्लीय होना चाहिए ।

क्या उगाएं –

                      हाइड्रोपोनिक्स के लिए आलू, गाजर, मूली आदि को छोड़कर ज्यादातर सब्जियां जैसे टमाटर, खीरा, लौकी, करेला, पालक, बैंगन आदि व अधिकतर मौसमी फूल, अनेक प्रकार के हाउस प्लांट्स जैसे  कैक्टस, बिगोनिया, सैक्युलेट (गूदेदार) प्लांट्स, क्रोटन आदि आसानी से उगाए जा सकते हैं। कई प्रकार की बेलें जैसे अलामान्डा, जैसमीन आदि भी इस विधि से आसानी से उगाई जा सकती हैं ।।

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