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झपकी किसे कहते हैं ?

झपकी किसे कहते हैं ? – What is a nap?

झपकी किसे कहते हैं ? – What is a nap?

                                                                                                                                                                                          आज  हम झपकी के बारे में  बात  करते है , आइए जानते है  झपकी किसे कहते हैं ? – What is a nap?

झपकी – Blink , Nap :-

                                                                        सुबह की नींद पूरी होने के बाद भी दिन में खाना खाने के बाद आमतौर पर नींद आ जाती है। वैसे तो दिन की नींद आम तौर पर आलस की निशानी समझी जाती है। पर अब यह बात सामने आई है कि यह आलस नहीं, बल्कि अच्छी सेहत की निशानी है। एक रिपोर्ट के अनुसार, दिन की झपकी अच्छी  के लिए काफी फायदेमंद होती है। झपकी को कम समय की नींद भी कहा जाता है जो खासकर दिन में ली जाती है। पॉवर स्लीप’ पुस्तक के लेखक डॉ. जेम्स मॉस के अनुसार दोपहर में 20 मिनट ली गई झपकी, सुबह 20 मिनट अतिरिक्त सोने से बेहतर है। वे कहते हैं कि झपकी सुबह उठने के करीब 8 घंटे बाद ही लेना अच्छा रहता है क्योंकि इतने समय में शरीर की सोने-जागने की साइकिल पूरी हो जाती है। एक अनुमान के मुताबिक 70 प्रतिशत अमेरिकन काम के बीच में सो जाते हैं। वहीं कुछ रिपोर्ट के अनुसार चीन में झपकी लेने का एक नियम बना हुआ है। इस नियम के अनुसार काम के बीच में कुछ समय के लिए लाइट बंद कर दी जाती है और उस समय में सब अपनी डेस्क पर सिर रखकर झपकी लेते हैं। ‘नासा’ द्वारा अपने पायलटों पर किए गए एक सर्वे के अनुसार झपकी का प्रभाव देखने को मिला। जिन पायलटों को 40 से 45 मिनट तक की झपकी लेने की अनुमति दी गई, उनका काम 34 प्रतिशत बेहतर हुआ और साथ ही वे 54 प्रतिशत अधिक अलर्ट रहे। आईये जानते हैं झपकी किसे कहते हैं ? झपकी क्यों आती है ?- What is a nap? Why do you nap?

झपकी क्यूँ आती है ? Why do you nap ? :-

                                                                                                आपने ऑफिस में कई लोगों को देखा होगा, वह खाना खाने के बाद नींद की एक छोटी झपकी लेते है. क्या आपने कभी सोचा है दिन के खाने के बाद नींद क्यों आती है ! खाना खाने के बाद शरीर में भारीपन या सुस्ती आने लगती है ! कई बच्चे तो दूध पीते-पीते ही सो जाते हैं !  वैसे तो खाना खाने के बाद थोड़ी नींद लेना कोई खतरे का संकेत तो नहीं है, कुछ खाध्य पदार्थ  ऐसे भी होते है, जिनके सेवन के बाद तेज नींद आती है जैसे  पनीर, चीज, सी फ़ूड, दालें आदि इनमें शामिल है !  इनके सेवन से शरीर की नसों में खिंचाव कम होता है जिस कारण से  इससे हमें नींद आने लगती है ! स्लीपर्स के विपरीत कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे है, इसे खाने से दिमाग सक्रिय हो उठता है और नींद नहीं आती है जैसे चाय, कॉफी, चॉकलेट, कोला, स्नैक्स आदी ! भोजन करने पर हमारी पाचन करने की प्रकिया शुरू हो जाती है इस प्रकिर्य  से हमारे  पेट को अधिक ब्लड की जरूरत होती है ! खाना खाने के कुछ समय बाद दिमाग में ब्लड की मात्रा कम हो जाती है, इस कारण दिमाग की क्रियाशीलता थोड़ी धीमी हो जाती है और नींद का एहसास होने लगता है  जिस कारण से झपकी आती है !

झपकी से बचने के लिए क्या करें ? What to do to nap ? :- 

                                                                                                              झपकी से बचने के लिए जरूरी है कि रात को अच्छी नींद लें, रात में अच्छी नींद लेकर आप दिन की  झपकी से बच सकते हैं इसके लिए आप निम्न उपाय अजमा सकते हैं :- 

  • हर रोज नियमित समय पर सोने और  उठने कि कोशिश करें। दिन में थोड़े-थोड़े समय के लिए झपकियां न लें इससे रात को अच्छी नींद आएगी ।
  • कैफीन, निकोटीन और एकोहल यानी काफी, धूमपान और शराब का सेवन रात में न करें।
  • नियमित रूप से व्यायाम करें। योग और ध्यान अनिद्रा में फायदेमंद होते हैं, लेकिन चिकित्सकों के अनुसार सोने से लगभग 3 घंटे पहले तक कोई व्यायाम न करें।
  • देर रात को भोजन नहीं करें । सोने से पहले हल्का भोजन करें। मसालेदार खाने से परहेज करें ।
  • सोने के स्थान को आरामदायक बनाएं। सोने से पहले बैडरूम में शांति, ठण्डक और अंधेरा रखें ।
  • कमरे का तापमान सामान्य रखें ।
  • सोने से पहले नहाने, किताब पढ़ने और धीमा संगीत सुनने की आदत डालें ।
  • गुन-गुने दूध में शहद डालकर पिएं। यह नींद बुलाने का  एक घरेलू नुस्खा है ।
  • स्वयं को तनाव मुक्त रखने  के लिए अपनी हॉबी और परिवार साथ अधिक से अधिक समय बिताएं ।
  • म्यूजिका थैरेपी] सॉफ्ट म्यूजिक खासतौर पर शास्त्रीय संगीत सुनें ।
  • एरोमा थेरेपी को आजमायें , इसमें कुछ ऐसी जड़ी-बूटियां होती है जिनसे अच्छी नींद लेने में मदद मिलती है ।

खर्राटे क्यूँ आते हैं ? Why do you snore? :-

                                                                                                     दिन में काम काज के वक्त झपकी आने का मुख्य कारण खर्राटों  की वजह से अच्छी नींद न  आना भी है , आईए हम खर्राटों के बारें में भी जान लेते हैं !

खर्राटे- 

          वह ध्वनि है जो सोते समय श्वास के साथ आती है। सोते समय खर्राटे तब आते हैं जब सामान्य श्वास प्रक्रिया में बाधा आए। यह बाधा श्वास नली में पैदा हुई रुकावटों के कारण आती है। जब हम जागते हैं तब गले की मांस पेशियां सामान्य स्थिति में रहती हैं लेकिन सोते समय यही मांसपेशियां आराम की अवस्था में आ जाती हैं और अंदर की तरफ मुड़ जाती हैं। यदि मांसपेशियों का सिकुड़ना श्वास प्रक्रिया (हवा के अंदर और बाहर जाने में) में रुकावट पैदा करे तो सोते समय खर्राटे आते हैं। श्वास में यह रुकावट गले की मांसपेशियों के अत्यधिक ढीला पड़ जाने से अथवा सूजन आने से हो जाती है। यह सूजन या ढीलापन शराब के सेवन, धूम्रपान, नींद की गोलियों के सेवन, नाक बंद, साइनस, टॉसिल में सूजन, शरीर के अधिक वजन, किसी प्रकार एलर्जी के कारण भी हो सकती हैं । खर्राटे की आवाज की तीव्रता, रुकावट के स्तर पर निर्भर करती है। कई बार श्वास नली में हवा के आदान-प्रदान में रुकावट आने लगती है जिसके कारण हम मुंह से सांस लेने लगते हैं, जो कई बार खर्राटे का कारण बनती है। जब हम मुंह खोल कर सांस लेते हैं तो जीभ पीछे की ओर मुड़ जाती है, जिससे ‘युवुला’ गले में पीछे की ओर मुड़ जाता है और खर्राटे आते हैं ! झपकी किसे कहते हैं ?

जानवर कैसे सोते हैं ? How do animals sleep? :-

                                                                                                                                             जिस तरह जानवरों की अपनी एक अलग दुनिया है उसी तरह उनके जीवन जीने का तरीका भी अलग है और उसी तरह सोने का तरीका भी । जहां शेर जैसे कुछ जानवर 20 से 22 घंटे की नींद लेते हैं वहीं कुत्ते और गाय जैसे जानवर कुछ देर की झपकी में ही संतुष्ट हो जाते हैं । कुछ जानवर खड़े-खड़े ही सो जाते हैं। घोड़ा इसका सबसे अच्छा उदाहरण है । हाथी भी कुछ ऐसा ही करता है लेकिन वह भी सुबह ठंडी हवा में लेट कर सोना पसंद करता है । हालांकि उसका वजन उसे ऐसा करने के लिए कुछ घंटे की अनुमति देता है । जिराफ भी खड़ा-खड़ा सोता है। हिरण जैसे जानवर झाड़ियों में छिप कर सोते हैं वहीं कुछ जानवर जैसे गोरिल्ला और बंदर पेड़ों पर छिप कर सोना पसंद करते हैं । पक्षियों की बात करें तो कुछ पेड़ पर बैठ कर रात गुजार लेते हैं तो बगुले जैसे पक्षी एक पैर पर खड़े होकर ही अपनी नींद पूरी कर लेते हैं ।

सोते हुए पकड़े जाएं काम के वक्त झपकी का मजा लेते पकड़े जाएं तो बचने के अचूक  नुस्खे :-

  • भोलेपन से कहें, मैं तो ईश्वर को याद कर रहा था।
  • डॉक्टर ने कहा था इतनी कमजोरी है कि काम के वक्त
  • आपको कभी भी चक्कर आ  सकता है।
  • पिछली बार जो टाइम मैनेजमैंट कोर्स किया था, उसमें बताया गया था कि 15 मिनट की झपकी आपको ऊर्जा से भरपूर कर सकते हैं ।
  • मैं सो नहीं रहा था, नए प्रोजेक्ट के लिए अपना ध्यान केंद्रित कर रहा था।
  • प्रभावशाली लोगों की सात आदतों में से एक यह भी है।
  •  बस, यूं ही की-बोर्ड पर सिर रखकर उसे चैक कर रहा था !!

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