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दुबलापन (Thinness) कारण व उपचार

दुबलापन (Thinness) कारण व उपचार – दुबलापन कैसे दूर करें ?

मोटापे की तरह ही दुबलापन भी अच्छा नहीं होता है और ये अक्सर हमारे लिए परेशानी का कारण भी  बन जाता है। दुबला व्यक्ति भी मोटे व्यक्ति की तरह हास्य का पात्र बन जाता है । आइए जानते हैं कि दुबलापन (Thinness) कारण व उपचार – दुबलापन कैसे दूर करें ?

दुबलापन क्या है ? –

एक स्वस्थ पुरुष उसे कहा जाता है जिसमें मांस व् हाड सम प्रमाण में हो अर्थात् रस, रक्त, मांस आदि धातुओं का संगठन समान हो । सभी इंद्रियां दृढ़ हों तथा जठराग्नि समान हो । यहां सम मांस प्रमाण से यह स्पष्ट किया गया है कि स्वस्थ व्यक्ति में मांस का प्रमाण न बहुत कम हो और न बहुत अधिक अर्थात् व्यक्ति को अधिक मोटा या अधिक दुबला-पतला नहीं होना चाहिये। यह मानव प्रकृति है कि अधिकांश व्यक्ति स्वयं से पूर्णतः संतुष्ट नहीं होते। मोटे व्यक्ति को दुबला होने की चाह रहती है, वहीं दुबला-पतला व्यक्ति मोटा होना चाहता है। दुबलापन या कृशता रोग न होकर मिथ्या आहार-विहार एवं असंयत दिनचर्या का परिणाम मात्र है। आसान भाषा में समझें तो इस प्रकार से समझेंगे – अक्सर ये समस्या ऐसे  लोगों को होती है, जिन्हें भूख नहीं लगती है या भूख कम लगती है । भूख कम लगने के कारण दुबले व्यक्ति की भोजन करने की क्षमता भी कमत्तर हो जाती है। इससे शरीर में मौजूद  धातुओं का पोषण सही से नहीं हो पता है । इसी कारण से शरीर दुबला हो जाता है।

अतिकृश व्यक्ति उसे कहा गया है, जिसके नितंब, पेट और गर्दन अधिक सूख जाते हैं, शरीर में धमनियों का जाल दिखाई पड़ता है तथा सभी संधियां मोटी हो जाती हैं। देखने से ऐसा लगता है कि शरीर में केवल त्वचा और हड्डियां ही शेष रह गई हों। यदि वात को बढ़ाने वाले आहार का सेवन करने वाला व्यक्ति अधिक व्यायाम, मैथुन एवं शारीरिक श्रम करता है, अधिक क्रोध, शोक, भय एवं चिंता करता है, अधिक अध्ययन करता है, रात में जागता भूख-प्यास मूत्र, नींद आदि अधारणीय वेगों को रोकता है या धारण करता है, कसैला, रुखा या कम भोजन करता है, रुखे द्रव्यों से बने उबटन या उससे संस्कारित द्रव्यों से स्नान करता है तो इन कारणों से रस धातु सूख जाती है। चूंकि रस धातु से ही सारी धातुओं का पोषण होता है। अतः रस धातु कम होने के कारण रक्त आदि धातुओं का पोषण नहीं कर पाता, जिससे शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। अति कमजोर मनुष्य अधिक व्यायाम, अति मैथुन, अधिक भोजन, भूख-प्यास, रोग-औषधि तथा अत्यंत ठंडा-गर्म आहार-विहार सहन नहीं कर पाता।

दुबलेपन के कारण –

अल्पमात्रा में भोजन तथा रूखे अन्नपान का अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से भी शरीर की धातुओं का पोषण नहीं होता । वमन, विरेचन, निरूहण आदि पंचकर्म के अत्यधिक मात्रा में प्रयोग करने से धातुक्षय होकर अग्निमांद्य तथा अग्निमांद्य के कारण पुनः अनुलोम धातुक्षय होने से शरीर में कृशता उत्पन्न होती है। अत्यधिक शोक, जागरण तथा अधारणीय वेगों को बलपूर्वक रोकने से भी अग्निमांद्य होकर धातुक्षय होता है तथा अनेक रोगों के कारण भी धातुक्षय होकर दुबलापन  उत्तपन्न हो जाता  है।

दुबलेपन के इलाज के  सिद्धांत –

सर्वप्रथम व्यक्ति के अग्निमांद्य को दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए। लघु एवं शीघ्र पचने वाला संतर्पण आहार, अन्य पौष्टिक पेय पदार्थ, रोगी के अनुकूल ऋतु के अनुसार उसे फल देना चाहिए, जो शीघ्र पच कर शरीर का तर्पण तथा पोषण करे। रोगी की जठराग्नि का ध्यान रखते हुए दूध, घी आदि प्रयोग किया जा सकता है।

दुबले व्यक्ति का आचरण –

दुबलेपन के शिकार व्यक्ति को भरपूर नींद लेनी चाहिए। इस हेतु सुखद शैया का प्रयोग अपेक्षित है। दुबलेपन  से पीड़ित व्यक्ति को चिंता, मैथुन एवं व्यायाम का पूर्णतः त्याग करना अनिवार्य हो  जाता है।

सावधानियां व परहेज –

दुबलेपन के शिकार व्यक्ति के  लिए मालिश अत्यंत उपयोगी होती है। पंचकर्म के अंतर्गत केवल अनुवासन वस्ति का प्रयोग करना चाहिए तथा ऋतु अनुसार वमन कर्म का प्रयोग किया जा सकता है। दुबले व्यक्ति के लिए स्वेदन व धूम्रपान वर्जित है। स्नेहन का प्रयोग अल्प मात्रा में किया जा सकता है। दुबले व्यक्ति सोते समय एक गिलास गुन गुने दूध में एक चम्मच शुद्ध देशी घी डालकर पी लें और  इसी में एक चम्मच अश्वगंधा चूर्ण को भी डाल लें तो बहुत जल्दी फायदा हो जायेगा  ।

दुबलेपन की रसायनिक दवाएं –

बल प्रदान करने तथा आयु की वृद्धि करने के लिए दुबलेपन के शिकार व्यक्ति को रसायन औषधियों का प्रयोग बहुत ही  हितकारी होता है, क्योंकि दुबला  व्यक्ति की समस्त धातुएं क्षीण हो जाती हैं तथा रसायन औषधियों के सेवन से सभी धातुओं की पुष्टि होती है।

औषधीय चिकित्सा क्रम –

सर्वप्रथम रोगी की मंद हुई अग्नि को दूर करने के लिए दीपन, पाचन औषधियों का प्रयोग अपेक्षित है। अग्निमांद्य दूर होने पर अथवा रोगी की पाचन शक्ति सामान्य होने पर जिन रोगों के कारण दुर्बलता  उत्पन्न हुई हो तथा दुर्बलता  होने के पश्चात जो अन्य रोग हुए हों, उन्हें ध्यान में रखते हुए ही औषधियों की व्यवस्था करनी चाहिए। इसके अल्वा मरीज को आर्युवैधिक औसधियाँ किसी विशेषज्ञ की सलाह इ दी जा सकती हैं ।

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