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बचत करने के आसान तरीके

बचत करने के आसान तरीके – Easy ways to saving –

बचत करने के आसान तरीके – Easy ways to saving –

                                                                                                                                                                                        एक कहावत है “अगर आपकी आमदनी नहीं बढ़ रही है तो आपको अपने खर्चे कम कर देने चाहिए” कहने का मतलब है कि आप अपने खर्चे कम करके एक तरह से अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं। अगर आप बिना बजट बनाये खर्च कर रहे हैं। आपकी भविष्य के लिए कोई आर्थिक योजना नहीं है। आपके क्रेडिट कार्ड पर मिनिमम अमाउंट राशि बढ़ रही है। अब नौबत ऐसी आ चुकी है कि आपको उधार लेकर खर्चें पूरे करने पढ़ रहे हैं।  इसी  प्रकार से अगर आपकी आर्थिक स्थिति यह संकेत कर रही है कि आपका आर्थिक स्वस्थ संकट में आ रहा है। ऐसे में यदि आपने सावधानी नहीं बरती तो आप आर्थिक मोर्चे पर हारने को अग्रसर हैं । इससे पहले कि आर्थिक संकट के भंवर में आप खुद को फसा पाएं उससे पहले आप थोड़ा रुकें और विचार करें , कहीं ऐसा तो नहीं कि लगातार मिल रहे इन संकेतों को आप नजर अंदाज करते रहें और तब तक  पानी सर से गुजर जाये । अगर ये सब कुछ आपके साथ भी हो रहा है तो आपको जरूरत है बचत करके चलने की । कुल मिलाकर आपको सीधी भाषा में बताते हैं, बचत करने के आसान तरीके – Easy ways to saving. 

 

बजट बनाकर  खर्च करें –

                                                       आपका मानना है कि बजट बनाने से खर्चे कम नहीं होते, बजट बनाना समय की बर्बादी से ज्यादा कुछ नहीं। तो मान कर चलिए आने वाले समय में आपकी यह सोच आपके लिए समस्या खड़ी करने वाली है। आर्थिक बजटिंग आपको आपकी वास्तविक आर्थिक स्थिति का अंदाजा देता है। यह आकलन आपको हमेशा याद दिलाता है कि आपके चादर की लंबाई क्या है और आप कितना पैर फैला सकते हैं। बजट बनाकर आप उन खर्चों को कम करने या खत्म करने में सफल होते हैं, जिनके बिना आपकी ज़िंदगी पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। उदाहरण के तौर पर एक नौकरीशुदा जोड़ा बजट बनाते हुए पाता है कि घर के फोन का बिल न के बराबर है क्योंकि दोनों के पास मोबाइल है। घर के फोन के मासिक किराये की बचत की जा सकती है। यह बचत दूसरे कामों को पूरा करने में सहयोग देगी। इसी तरह की छोटी बचतें आने वाले समय में आपको तंगहाली से बचाती हैं। आप देखते हैं कि सप्ताहांत का खर्च कुछ ज्यादा है और महज दो सप्ताहांत घर पर बिताकर बड़ी राशि बचाई जा सकती है। यही बड़ी राशि आपके बुरे वक्त में काम आने वाली है।

पैसों को लेकर लापरवाह नहीं रहें –

                                                                              पैसों को लेकर अक्सर लोगों का रुख लापरवाही भरा होता है। आप पैसों  को लेकर कितने लापरवाह हैं, यह जानने के लिए अपने आपसे कुछ सवाल कीजिए –

  • क्या आप पहले खरीदिए और बाद में चुकाइए प्रणाली अपनाते हैं या फिर पहले जमा कीजिए और खरीदते वक्त पूरा पैसा चुकाइए प्रथा में विश्वास करते हैं ?
  • क्या आप किसी चीज को जरूरत के बिना खरीद लेते हैं या फिर जरूरत पड़ने पर चीज खरीदने पर भरोसा करते हैं ?
  • क्या आप महसूस करते हैं कि अक्सर खरीदारी आपके नियंत्रण से बाहर हो जाती है ?
  • क्या आप अपने आपको, बच्चों को या फिर परिवार जनों को न नहीं कह सकते ?
  • आपको किसमें ज्यादा आनंद की अनुभूति होती है, सामान खरीदने में या फिर पैसा जमा करने में ?

                                            जब आप इन सवालों का जवाब खोज लेंगे तो आपको यह साफ समझ में आ जाएगा कि आप फिजूलखर्च हैं या नहीं । पैसे के साथ लापरवाही आपको परेशानी में डालती है और फिजूलखर्ची की आदतों के रहते आप कभी भी आर्थिक रूप से सफल व्यक्ति नहीं बन सकते। ऐसा नहीं कि इन आदतों की वजह से आप एक खराब व्यक्तित्व बन जाते हैं। इतना है कि इनके कारण आप जरूरी कामों को सहजता से पूरा नहीं कर पाएंगे। आर्थिक स्थिति सुधारने के दो रास्ते हैंअपनी आमदनी बढ़ाइए या फिर पैसा बचाइए। आमदनी बढ़ाना आपके हाथ में नहीं है तो बचत करना शुरू कीजिए। यह थोड़ा मुश्किल जरूर है ,नामुमकिन नहीं है ।

अपने पास बचत के नाम पर थोड़ा पैसा जरूर रखें –

                                                                                                                      अगर आप अपने पास बचत के नाम पर थोड़ा या बिलकुल पैसा नहीं रखते तो आपको अपनी ये आदत बदलनी होगी । छोटी-छोटी बचतों का अर्थ उस समय समझ में आता है, जब कोई परेशानी या अवसर आपके हाथों से थोड़े से पैसों की वजह से निकल जाता है। ऐसी स्थिति से बचने के लिए आपको बचत करने की आदत को अपनी जीवनशैली में शुमार करना पड़ेगा। आप बचत करने की शुरुआत करना चाहते हैं तो एक निश्चित बचत खाते का न होना सबसे पहली बाधा है। इसे पार करने के लिए सबसे पहले अपने नाम का एक बचत खाता खुलवाइए। खाता खुलवाते ही आपका पिगी बैंक तैयार है, जो आपकी बचतों को सहेजने में आपकी सहायता करने वाला है।

                                                   इसके बाद आपको तय करना है कि आप कितने पैसे अपने खाते में बचाने वाले हैं। इसके लिए सबसे बढ़िया यह रहेगा कि आप एक छोटी रकम से शुरुआत करें जैसे कि 100 रुपए  एक बढ़िया रकम रहेगी। देखने और सुनने में यह एक बहुत छोटी रकम लगती है और आप सोच रहे होंगे कि इतनी कम रकम को एक बड़ी संख्या में तब्दील होने में बहुत लंबा समय लग जाएगा। एक बात याद रखिए अभी आप बचत नहीं कर रहे, बचत करने की आदत डाल रहे हैं। इस शुरुआत के बाद आप अपने खर्चों की ओर सतर्क होकर, जो खर्चे इस माह नहीं हो रहे उनकी राशि को बचत खाते के हवाले कर दें। इस तरह धीरे-धीरे अपनी बचत राशि में तब तक इजाफा करें जब तक आपके बजट पर कोई बड़ा फर्क न पड़े। आवश्यकता से ज्यादा बचत करने की कोशिश न करें और इस बात की भी कोशिश करें कि बिना किसी जरूरी वजह के आपके बचत खाते का पैसा इस्तेमाल न हो। धीरे-धीरे आप पाएंगे कि आप की रकम अच्छी खासी हो गई है। इस तरह की बचत में सुरक्षा का भाव पैदा करेंगी, जो निश्चित ही आपकी भविष्य में बड़ी मदद करेंगी।

उधार लेकर निवेश  न करें –

                                                                अगर आप उधार लेकर निवेश  करते हैं तो संबल जाएँ।  हममें से ज्यादातर लोग निवेश को लेकर उत्साहित रहते हैं और बीमा, शेयर व बैंकिग जैसी योजनाओं में निवेश करते वक्त ज्यादा से ज्यादा लाभ प्राप्त करने पर विचार करते हैं। इस प्रक्रिया में निवेश के उन अधिकतम मानदण्डों पर विचार करने लगते हैं जो हम चुका सकते हैं ताकि एक लंबी अवधि का इंतजार आपको बड़ी रकम मुहैया करवा सके। यहीं से समस्याओं की शुरुआत होती है। एक समय ऐसा आता है जब निवेश करने की अवधि नजदीक आती जाती है और आपकी जेब बिल्कुल खाली होती है। उस हालत में हममें ज्यादातर लोग अपने क्रेडिट कार्ड का सहारा लेते हैं और बचत करने के चक्कर में भारी आर्थिक समस्या में फंस जाते हैं। इसका मतलब यह कतई नहीं है कि निवेश योजनाओं में निवेश करना गलत है, लेकिन एक बात हमें समझनी होगी कि आदमी को अपनी चादर जितना ही पैर फैलाना चाहिए। ऐसी योजनाओं में निवेश करने से पहले आपके पास योजना होनी चाहिए, जो यह निर्धारित करती हो कि निवेश की तारीख तक आप उतना पैसा कहां से लेकर आएंगे और इस पैसे की आवक कितनी निश्चित है। ठीक इसी तरह अपने निवेश की सीमा निर्धारित करने में सावधान रहें। अधिकतम संभव निवेश की जगह आरामदायक संभव निवेश पर जाएं। आखिर आप यह दौड़ मानसिक शांति और खुशी के लिए ही लगा रहे हैं। निवेश करने से पहले यह हमेशा निश्चित कर लें कि यह आपके लिए सिरदर्द न बन जाए।

 

आर्थिक जरूरतों के लिए माता-पिता और दोस्त-मित्रों की ओर न देखें –

                                                                                                                                                                      आप किसी शॉपिंग मॉल में बेमतलब इसलिए टहल रहे हैं क्योंकि चीजों पर सरसरी निगाह डालना चाहते हैं। आपको लगता है कि इस तरह की तफरी कभी न कभी आपको किसी अविश्वसनीय चीज तक पहुंचा देगी, जो इस दुनिया में सिर्फ आपके ही पास होगी। मसलन एक शानदार ओवरकोट जिसे पहनने के बाद आप स्वयं में शरलॉक होम्स की आत्मा को महसूस करेंगे या फिर कोई शानदार डिओडेंट जिसका फ्रेगरेंस साथ वालों के बीच आपको खास होने का एहसास कराएगा। इस चहलकदमी के दौरान आप एक शानदार ड्राइंग रूम मिरर के सामने आ खड़े होते हैं और आपको लगता है कि यह तो आपके ही ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ाने के लिए बना है, लेकिन तभी दाम का टैग आपके हौसले पस्त कर देता है।

                                             अब आपके दिमाग में दूसरा खुराफात जन्म लेती  है, आप उन लोगों की लिस्ट बनाने लगते हैं जिनसे आप पैसा उधार ले सकते हैं और जिसे चुकाने की भी कोई जल्दी न हो। लिस्ट में सबसे ऊपर आपके माता-पिता हैं, जिन्हें आप पैसा  कभी वापस नहीं करने वाले हैं। इसके बाद करीबी दोस्तों की शामत आती है। यह सब होने के बाद वह शानदार आईना आपके ड्राइंग रूम की शोभा बढ़ाने लगता है। बहुत से लोग फिजूलखर्ची के लिए इसी तरह के तरीके अपनाते हैं। वे दरअसल अभी भी आर्थिक मामलों के लिए परिपक्व नहीं होते और सारी चिंता अपने दोस्तों व रिश्तेदारों के हवाले रखते हैं। यह आदत आपकी सामाजिक जिंदगी को तो नुकसान पहुंचाती ही है, साथ ही आपके खर्चों को भी बेलगाम करती है। उधार लेना बुरी बात नहीं है, लेकिन यह बहुत मुश्किल परिस्थितियों के लिए किया गया आखिरी उपाय होता है, इसलिए आत्मनिर्भर बनिए और तब तक इस व्याधि से दूर रहिए जब तक आप ऐसा कर पाएं।

रिटायरमेंट के बाद के लिए  पैसों का इंतजाम करें –

                                                                                                                    अभी आप युवा हैं और आपके पास पैसा खर्च करने के लिए लंबी सूची है, जिसमें कपड़े से लेकर गाड़ी तक शामिल है । आपकी शादी होती है और आपके खर्चे दोगुने हो जाते हैं। इसके बाद आपके परिवार में बच्चे भी शामिल हो जाते हैं और फिर उनकी पढ़ाई, उनका पोषण इन सबके बीच अपने भविष्य के बारे में सोचने की फुरसत ही नहीं है। रिटायरमेंट के बारे में जब भी आपसे कोई बात की जाती है तो आपको लगता है कि इसमें तो अभी काफी समय है या फिर तब की तब देखी जाएगी। इस तरह का विचार आपको उस समय संकट में डाल सकता है, जब आपका अपना शरीर आपका साथ छोड़ने लगता है। जितनी जल्दी हो सके अपने लिए एक रिटायरमेंट योजना अपनाइए। रिटायरमेंट योजनाओं में निवेश पूरी तरह कर मुक्त है और इस तरह आप कर की बचत के साथ सुरक्षित भविष्य का दोहरा लाभ लेने में सक्षम हो जाते हैं। जितनी जल्दी हो सके ऐसी योजनाओं को अपना लेना चाहिए क्योंकि जितनी देरी होगी आपको प्रीमियम उतना ही ज्यादा देना होगा। देर करने का एक ही मतलब है कि आपका भविष्य असुरक्षित होने वाला है ।

अपनी आय के स्रोत का आंकलन करें –

                                                                                          बहुत कम लोग अपनी आय के स्रोत का आकलन करते हैं। कोई भी व्यक्ति जो अपने जीवन को बेहत ना चाहता है उसे अपने आर्थिक विकास की दो तरफा प्रक्रिया अपनानी ही होगी। उसे बचत के साथ अपनी आय के स्रोत मी आकलन करना होगा। आप जो भी काम या नौकरी  कर रहे हैं  वहां आप की उपस्थिति कितनी महत्वपूर्ण है ? इस प्रसन्न का  उत्तर जानने के लिए आप अपने आपसे कुछ सवाल  करें जैसे आपने इस काम में पिछले दिनों में कितनी तरक्की की है  इस क्षेत्र में हो रहे विकास से आप परिचित हैं और ना आप अपने आपको दस साल बाद एक अच्छी जगह पर देखते हैं ?

                                         इन सवालों के जवाब अपने आपसे लेने के बाद अपने साथ काम करने वालों के बारे में अपनी राय जानिए। यह ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि आपको सही आईना यही लोग दिखा सकते हैं। उनसे जानने की कोशिश कीजिए कि आपके  काम से वे कितना संतुष्ट हैं और आपका काम उन्हें कितना पसंद आता है ? और वे आप में कौन से दो सुधार देखना पसंद करेंगे। ये तमाम सवाल आपको ज्यादा प्रभावशाली बनाने की दिशा में पहला कदम होगा। इस तरह आप अपने प्रदर्शन में सुधार कर पाएंगे और निश्चित तौर पर प्रभावशाली व्यक्तियों के आगे जाने की संभावनाएं अपने आप बढ़ जाती हैं। अगर आप समय के साथ अपनी कार्य क्षमताओं और कार्य शैली में बदलाव नहीं करते हैं तो आप की तरक्की की संभावनाएं कम होते-होते क्षीण हो जाएंगी और एक बार फिर आप आर्थिक परेशानी के भंवर में फंस जाएंगे। समय के साथ चलना जरूरी है, यही अच्छा जीवन जीने का मंत्र है।

क्या बैंक ने आपके लोन का आवेदन अस्वीकार कर दिया गया है –

                                                                                                                                                           अगर आपने किसी बैंक में ऋण के लिए आवेदन किया और वह अस्वीकार कर दिया गया है तो यह चिंता का विषय है। आप इसे सामान्य न लें क्योंकि बैंक ने आपका आवेदन इसलिए अस्वीकार किया है कि उनको लगता है आप उनके पैसे लौटाने में सक्षम नहीं हैं और यह आपके लिए कहीं से भी सुखद समाचार नहीं है। बैंक आपका व्यक्तिगत दुश्मन नहीं है वह तो बस व्यापार कर रहा है। वह उन लोगों को खोज रहा है जिनसे लाभ और सुरक्षा की संभावनाएं ज्यादा हों। ज्यादातर मामलों में उधार देने वाली संस्था अपने ग्राहक को यह भी स्पष्ट करती है कि उसका अनुरोध क्यों अस्वीकार किया गया। आप उस कारण को जानने की कोशिश कीजिए और फिर उस वजह की पड़ताल कर उसे दूर करने का प्रयास कीजिए। बैंक द्वारा आवेदन स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय विशेषज्ञों द्वारा किया जाता है, इसलिए इसे हलके में  न लें।

साहूकार जैसी संस्थाओं से छोटे लोन लेने के आदी न बनें –

                                                                                                                                         आपने हाल में नई कार खरीदी है और इस कार के लिए आप एक बड़ी रकम ईएमआई के रूप में हर महीने चुकाते हैं। इस महीने आपकी हालत कुछ खराब है। आप महसूस कर रहे हैं कि शायद इस महीने का इंस्टॉलमेंट आप समय पर नहीं चुका पाएंगे। आप एक रास्ता निकालते हैं। पास ही के एक फाइनेंसर या साहूकार से थोड़ी बहुत कागजी कार्रवाई के बाद कुछ रकम उधार लेते हैं और आपकी कार सलामत रहती है। आफत तो तब आती है जब यही छोटा सा उधार एक बड़ी रकम की शक्ल में आपके सामने आ खड़ा होता है। इस रकम से छुटकारा पाने के लिए आप एक और छोटा उधार ले लेते हैं और धीरे-धीरे आप एक चक्रव्यूह में फंस जाते हैं और आपको पता भी नहीं चलता है। इसमें उलझ कर अक्सर लोग अपना सब कुछ गंवा बैठते हैं।

                                                 इन छोटे उधारों पर लगने वाला ब्याज आमतौर पर 100 प्रतिशत सालाना से भी अधिक होता है। छोटी रकम ज्यादा ब्याज पर अपने आप बड़ी हो जाती है। ऐसे साहूकार या कंपनियां इस तरह के मजबूर आदमी की तलाश में रहते हैं और मौका मिलते ही उन्हें अपनी गिरफ्त में ले लेते हैं। ऐसा कोई भी कदम उठाने से पहले आप सोचें कि जिस भी बात के लिए आप उधार ले रहे हैं, वह कितनी महत्वपूर्ण है। यदि आपको कार लोन या बिजली का बिल चुकाना है तो आप उनके पास जाएं जिन्हें आपको पैसा देना है और मालूम करें कि न चुकाने पर कितना जुर्माना लगेगा या फिर क्या वे अगले माह तक रुकने के लिए तैयार हैं। ज्यादातर मामलों में आप पाएंगे कि यह रकम उस ब्याज से कहीं कम है, जो आप साहूकार से लेकर चुकाने वाले थे। अपने आपको संतुलित रखिए और बचत कीजिए ताकि आपका खराब वक्त और ज्यादा खराब न हो।

पर्याप्त स्वास्थ्य बीमा लें –

                                                        हममें से ज्यादातर का अनुभव स्वास्थ्य बीमा के साथ कुछ फीका ही रहा होगा। इसे अपनाने वाले ज्यादातर लोग यह अनुभव करते हैं कि हम प्रीमियम तो हर साल चुकाते हैं और लाभ के नाम पर साल में एक बार होने वाले डॉक्टरी परीक्षण के अलावा कुछ नहीं मिलता। सालों से आपके जीवन में कोई परेशानी नहीं आई और सर्जरी जैसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है। हममें से ज्यादातर के अनुभव कुछ इसी तरह के होंगे। इस मानसिकता ने हमें एक बात पर भरोसा करने का मौका दिया है कि हमारे साथ कुछ भी और कभी भी बुरा नहीं होने वाला। मत भूलिए कि यह जीवन है और इसमें कुछ भी हमेशा के लिए नहीं होता।

                                               परेशानी कभी भी आ सकती है। वह दुर्घटना के रूप में सामने आ सकती है या फिर लापरवाही वाली व्यस्त दिनचर्या में किसी बड़ी बीमारी का चोगा ओढ़े प्रकट हो सकती है। ऐसे हालात में आपके लाखों रुपए, जी हां लगातार महंगी होती जा रही चिकित्सा सुविधाओं के लिए इससे कम राशि मायने नहीं रखने वाली है, पलक झपकते ही आपके बैंक अकाउंट में से गायब हो जाएंगे या फिर आपके क्रेडिट अकाउंट में जमा हो जाएंगे। दोनों ही हालात में आर्थिक रूप से आपकी कमर टूट जाने वाली है। ऐसी स्थिति में अगर आपके पास स्वास्थ्य बीमा है तो आप उन तमाम प्रीमियम्स को भूल जाएंगे, जो आपके अनुसार आपने यूं ही बीमा कंपनी के हवाले कर दिए थे। बीमा सुरक्षा के लिए बना है न कि लाभ कमाने के लिए। बीमा और शेयर में फर्क समझिए तभी आप अपनी जिंदगी को ज्यादा सुरक्षित बना पाएंगे।

 

परिवार के साथ पैसों को लेकर विवाद न करें –

                                                                                                                        अक्सर आपका परिवार में पैसों को लेकर घमासान होता है तो आपको समझ जाना चाहिए कि आपकी आर्थिक व्यवस्थाओं में कुछ गड़बड़ है। व्यवस्थित हो जाइए और निर्धारित कीजिए कि आपके लिए हर हफ्ते बाहर रात्रि भोज जरूरी है या फिर खराब  हो चुकी रसोई की नई फीशिंग के लिए बचत करना जरूरी है। आप बच्चे के भविष्य के लिए नई योजना में निवेश करना चाहते हैं या फिर गोल्फ क्लब की सदस्यता आपके लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। वरीयता ही आपको एक खुशनुमा पारिवारिक माहौल दे सकती है। यह पूरी तरह आप पर निर्भर करता है कि आप अपनी जरूरतों को अपनी आर्थिक सीमाओं में ही किस तरह पूरा कर सकते हैं।

परिवार के आर्थिक मामलों में रुचि रखें –

                                                                                              आपके बेटे ने एक प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर ली है और इससे एक अच्छे संस्थान में प्रवेश के द्वार खुल गए हैं, लेकिन उसे शुल्क चुकाने के लिए एक बड़ी रकम चाहिए। आपको एजुकेशन लोन की सलाह दी जाती है, लेकिन आप ज्यादा रुचि नहीं ले रहे। घर की छत टपक रही है और आप चाहते हैं कि अभी कुछ हल्का-फुल्का काम करवा कर काम चलाया जाए, लेकिन परिवार के लोग सहमत नहीं और काम पूरा करवाना चाहते हैं। आप झल्लाते हैं और आपका अगला संवाद होता है जो करना है करो, लेकिन मुझसे पैसे मत मांगना। इस तरह की घटनाएं इशारा करती हैं कि परिवार के आर्थिक मसलों पर आपका रुख नकरात्मक है। यह आपको और आपके परिवार दोनों को परेशानी में डाल सकता है। इस  समस्या का एक ही समाधान है अपने परिवार से लगातार उनकी जरूरतों पर बात करते रहिए और अनावश्यक को शॉर्ट लिस्ट  करके उन्हें निकाल फेंकिए  और जरूरी कामों  को कम खर्च में निपटाने की कोशिश कीजिए। साथ ही घर वालों  को यह भी समझाने की कोशिश कीजिए कि आपकी वास्तविक आर्थिक स्थिति क्या है। नए जोड़ों के लिए यह नियम वरदान साबित हो सकता है।

बहुत क्रेडिट कार्ड न रखें –

                                                           क्रेडिट कार्ड की सुविधा मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकलने के लिए कारगर है, लेकिन कहीं आप इसका इस्तेमाल उन सामानों का बिल चुकाने के लिए तो नहीं करते, जो महज किसी मॉल में तफरी करते वक्त आपकी आंखों को भा गए हैं । यदि ऐसा है तो यह आपके लिए खतरे की घंटी है। इससे यह साबित होता है कि आप अपने क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल अनावश्यक चीजों का मूल्य चुकाने में भी करते हैं क्योंकि उस वक्त आपके पास नकद धन नहीं होता। इस सुविधा के साथ एक समस्या और है। आप अपने क्रेडिट कार्ड को बनाए रखने के लिए न्यूनतम उधार ही चुकाते हैं ताकि आप आगे जरूरत पड़ने पर किसी दुकान में 25 प्रतिशत छूट का सामान क्रेडिट कार्ड के 35 प्रतिशत ब्याज को चुकाते हुए खरीद सकें। यह निश्चय ही एक हास्यास्पद सौदा है। आप एक क्रेडिट कार्ड का उधार चुकाने के लिए दूसरे का इस्तेमाल करते हैं और दूसरे का इस्तेमाल तीसरे कार्ड का उधार चुकाने में किया जाता है। इस तरह आप पर कर्ज का बोझ बढ़ जाता है और आप तनाव का शिकार होकर अपनी सेहत खराब कर बैठते हैं। अपने सभी क्रेडिट कार्ड को वापस कंपनी के हवाले कीजिए और भूल जाइए कि आपके पास कोई ऐसी चीज भी थी।

बिना किसी उचित योजना के निवेश न करें –

                                                                                                      आपके पास सुपरिभाषित लक्ष्यों की और उन तक पहुंचने के लिए योजनाओं का अभाव है। हाल में ही एक बढ़िया निवेश स्कीम जारी की गई है। आपने उसका लाभ उठाने के लिए जरूरत से ज्यादा का निवेश किया। इस निवेश को करते वक्त इस बात का आकलन करना भी जरूरी नहीं समझा कि आप बाकी पैसों का इंतजाम कहां से करेंगे। आप उस स्कीम को अपनाना चाहते हैं जो सबसे ज्यादा फायदा देने वाली है और इस कवायद में आपके पैर चादर से बाहर निकल जाते हैं। आप एक बार फिर से परेशानी में है। इसी तरह आपने सुना है कि शेयर बाज़ार बड़ा मुनाफा देता है और आपने अपनी सारी जमा पूंजी शेयर बाज़ार में लगा दी। आप के पास न तो इस जटिल प्रणाली की कोई जानकारी है और न आपने इस तरह का कोई प्रयास किया है। नतीजा है कि आप अपने सारे पैसे गंवा बैठे। किसी भी निवेश से पहले एक निश्चित योजना का होना जरूरी है अन्यथा यह संकट को आमंत्रण देने के सिवाय कुछ भी नहीं है।

आर्थिक परेशानियों के संकेत नजरअंदाज न करें –

                                                                                                                   आप की आय महीना खत्म होने से पहले ही खत्म हो जाती है। आप इधर उधर से उधार लेकर काम चलाते हैं। आपकी जेब में कभी अच्छी रकम नहीं रहती। कभी-कभी जरूरी खर्च जैसे बिजली के बिल, स्कूल की फीस चुकाने में भी देरी हो जाती है। सावधान हो जाइए यह सब खराब होती आर्थिक स्थिति के सूचक हैं। इन्हें पहचान कर आंखें बंद  करना, बड़ी परेशानी को घर बुलाने जैसा है। आपको अभी से सतर्क होना होगा। याद रखिए जिंदा रहने के लिए पैसा जरूरी है। यह ऑक्सीजन जितना महत्व नहीं रखता, लेकिन उससे कम महत्वपूर्ण भी नहीं है। खर्च पर लगाम लगाइए और कुछ नया काम खोजिए ।।

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