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भारीतय डाक का इतिहास

भारीतय डाक का इतिहास – पिन कोड (PIN CODE)

मेरे ख्याल से भारत जैसे मुल्क में जितना डाक विभाग आम जनता के दिलों से जुड़ा रहा है, शायद ही उतना अन्य किसी वभाग ने भारतीयों के दिलों में जगह बनाई हो । आज हम बात करते हैं भारतीय डाक के बारे में और जानते हैं की भारीतय डाक का इतिहास क्या है और पिन कोड (PIN CODE) क्या होती है।

भारीतय डाक प्रणाली का प्राचीन इतिहास 

भारत में चिठीयो के आदान प्रदान के लिए हजारो साल पूर्व से ही कई साधन प्रयोग किये जाते रहे हैं, इन साधनों को आप  प्राचीन डाक विभाग भी कह सकते हैं । भारतीय इतिहास की बात करें तो डाक सिस्टम अथवा संदेश प्रणाली का उल्लेख अथर्ववेद में भी किया गया है । इसके अलावा चाणक्य के अर्थशास्त्र से भी प्रांतों से प्राप्त होने वाली आमदनी के आकंड़े और सूचनाएं एकत्रित करने की प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त होती है। राजा महारजाओं के समय से ही  दूत और कबूतर के माध्यम से चिठियों का आदान प्रदान करने  का उल्लेख साहित्यिक ग्रंथो में मिलता है। भारत में पोस्ट सिस्टम की शुरुआत कुतुबुद्दीन ऐबक ने की थी । बाद में इस डाक व्यवस्था का  विस्तार सन् 1296 में अल्लाउद्दीन खिलजी ने डाक चौकियों से संदेश वाहकों द्वारा संदेश भेजने से किया । सन् 1540 के आस पास बादशाह शेर शाह सूरी के शासन के दौरान इस डाक प्रणाली में कुछ और सुधार किए गए, शेर शाह सूरी के  4,800 किलोमीटर बंगाल से पेशावर तक ग्रांड ट्रंक रोड का निर्माण कराये जाने से  डाक व्यवस्था और भी मजबूत हुई । तारीख-ए-शेरशाही के अनुसार अब्बास खान शेरवानी ने उस वक्त की डाक सेवा दीवान-ए-इंशा में लगभग 3400 लोगों को रोजगार देने का काम किया था।

अंग्रेजों के समय की भारीतय डाक प्रणाली

वर्तमान भारतीय डाक व्यवस्था कई व्यवस्थाओं को जोड़कर बनी हुए व्यवस्था है । अंग्रेजों द्वारा उस समय काम कर रहीं 650 से ज्यादा रजवाड़ों की डाक प्रणालियों, जिला डाक प्रणालियों  और जमींदारी डाक व्यवस्था को  ब्रिटिश डाक व्यवस्था में शामिल क्र एक डाक प्रणाली बनाई । अंग्रेजों ने इन टुकड़ों को इतनी खूबसूरती से जोड़ा था जिससे  ऐसा प्रतीत होता है कि भारतीय डाक विभाग शुरू से ही एक  संपूर्ण अखंडित संगठन है।

सन्न 1766 ईस्वी में लार्ड क्लाइव ने देश में पहली डाक व्यवस्था स्थापित की थी । उसके  बाद सन्न 1774 ईश्वी में वारेन हेस्ंटिग्ज़ ने इस व्यवस्था को और मजबूत करने का काम किया था। उन्होंने इसी क्रम में एक  महा डाकपाल के अधीन कलकत्ता में प्रधान डाकघर स्थापित किया । उसके बाद उन्होंने मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में भी क्रमशः 1786 और 1793 में डाक व्यवस्था की  शुरूआत  की थी । अंग्रेज सरकार ने सन्न 1837 में डाक अधिनियम लागू किया जिससे तीनों प्रेसीडेन्सी में सभी डाक संगठनों को आपस में मिलाकर पूरे राष्ट्र के स्तर पर एक अखिल भारतीय डाक सेवा बनाई । सन्न 1854 में तत्कालीन सरकार नें डाकघर अधिनियम पारित करके, एक अक्टूबर सन्न 1854 को  प्रशासनिक आधार पर भारतीय डाक  को पूरी तरह सुधार दिया गया ।

इस प्रकार से 1854 में ही डाक और तार दोनों ही विभाग अस्तित्व में आ गए थे । शुरू से ही दोनों विभाग जन कल्याण को ध्यान में रख कर बनाये  गए थे । इनका लाभ कमाना उद्देश्य कभी नहीं था । 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध्द में तत्कालीन सरकार ने यह फैसला किया कि डाक  विभाग को कम से कम अपने खर्चे अवश्य निकाल लेने चाहिए।  20वीं सदी में भी यही क्रम बना रहा था । उसके बाद से लगातार डाक विभाग और तार विभाग के क्रिया कलापों में एक साथ विकास होता रहा। सन्न 1914 के प्रथम विश्व युध्द की शुरूआत के दिनों में ही दोनों विभागों को मिला दिया गया था  ।

ईस्ट इंडिया कंपनी ने मुंबई, चेन्नई और कोलकाता में 1764 से 1766 के बीच कई पोस्ट ऑफिस स्थापित किए थे । वारेन हेस्टिंग की गवर्नरशिप के दौरान डाक सेवा आम लोगों के लिए भी उपलब्ध कराई जाने लगी। सौ मील की दूरी पर एक पत्र भेजने के लिए 2 आना कीमत रखी गई। जिसका भुगतान तांबे के टोकन द्वारा किया जाता था। सिंध में 1852 में एक उभरे हुए पेपर पर वेक्स के साथ स्टाम्प का उपयोग शुरू हुआ। सिंध क्षेत्र में सिंध डिस्ट्रिक डाक के तौर पर वितरित किया जाता था जिसे बाद में सिंध डाक के नाम से जाना जाने लगा। भारत में पहला स्टाम्प 1854 में जारी किया गया। यह स्टाम्प ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा जारी किया गया। सभी स्टाम्प कलकत्ता में बनाए और प्रकाशित किए गए।

वर्तमान भारतीय डाक प्रणाली 

लागभग 150 साल पहले शुरू हुई भारतीय डाक सेवा इन दिनों इंडिया पोस्ट ब्रांड नाम के अंतर्गत काम कर रही है, यह भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही एक डाक सेवा है जिसे आमतौर पर पोस्ट ऑफिस के नाम से जाना जाता है लेकिन वर्तमान में भारतीय डाक, डाक के आलावा कई अन्य कार्य भी कर रही है जैसे बैकिंग कार्य, पासपोर्ट संबधित कार्य आदि आदि ।  भारतीय डाक सेवा के अंतर्गत 1, 54,000 पोस्ट ऑफिस आते हैं, जो कि विश्व का सबसे विस्तृत डाक व्यवस्था मानी जाती है, दूसरे नंबर पर 57,000 डाकघर के साथ चीन का नाम आता है।

आज भारतीय  डाक व्यवस्था  का जो आधुनिक  स्वरूप  हमारे सामने है, वह हजारों हजार सालों के लंबे सफर की ही देन है। अंग्रेजों ने डेढ़ सौ साल पहले भारत के अलग-अलग हिस्सों में अपने तरीके से चल रही डाक व्यवस्था को एक सूत्र में पिरो कर, भारतीय डाक को एक नया रूप और रंग दिया।अंग्रेजों की डाक व्यवस्था उनके सामरिक और व्यापारिक हितों पर आधारित  थी।  आजादी के बाद भारतीय  डाक प्रणाली को आम भारतीय  की जरूरतों को ध्यान में रख कर विकसित करने का दौर शुरू हुआ। नियोजित तरीके से की गयी विकास प्रक्रिया ने ही भारतीय डाक को दुनिया की सबसे बड़ी और बेहतरीन डाक प्रणाली बनाया है।                                                                (भारीतय डाक का इतिहास)

राष्ट्र निर्माण में भी डाक विभाग ने ऐतिहासिक व् अहम भूमिका निभाई है और इसकी उपयोगिता अब तक लगातार बनी भी हुई है। आम आदमी डाकघरों और पोस्टमैन पर बहुत भरोसा करता है। तमाम उतार-चढ़ाव के बावजूद भी आमजन का इतना जन विश्वास अन्य कोई और भारतीय सरकारी या गैर सरकारी संस्था अर्जित नहीं कर सकी है। यह स्थिति कुछ सालों में नहीं बनी है। इसके पीछे बरसों बरस का श्रम, विशवास और सेवा छिपी हुई है।

मौजूदा भारतीय पोस्टल सर्विस भारत सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ कम्यूनिकेशन और इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के अंतर्गत काम करती है। भारत 22 पोस्टल सर्किल में बंटा हुआ है। प्रत्येक सर्किल चीफ पोस्टमास्टर जनरल के अंतर्गत काम करता है। सर्किल डिवीजनों में बांटा जाता है जिसे पोस्टमास्टर जनरल द्वारा संभाला जाता है। इन 22 सर्किल के अलावा एक स्पेशल सर्किल जिसे बेस सर्किल कहा जाता है यह डाक सेवा भारतीय सेना के अंतर्गत काम करती है। इस बेस सर्किल का काम एडिशनल डायरेक्टर जनरल द्वारा संभाला जाता है जिसे आर्मी पोस्टल सर्विस में मेजर जनरल की रैंक दी जाती है।                                                                           (भारीतय डाक का इतिहास)

पिन कोड (Pin Code)

भारतीय डाक सेवा द्वारा पोस्टल इंडेक्स नंबर या पिन या पिन कोड पोस्ट ऑफिस नंबरिंग या पोस्ट ऑफिस सिस्टम के रूप में उपयोग किया जाता है। पिन कोड , पोस्टल इंडेक्स नंबर के लिए और कोड 6 डिजिट लंबा होता है। पिन की शुरुआत 15 अगस्त 1972 में की गई थी। भारत में आठ तरह के पिन काम में लिए जाते हैं। पिन कोड की पहली डिजिट प्रदेश के बारे में बताती है जो कि पोस्ट ऑफिस की तरफ से दिया जाता है। दूसरी डिजिट सब-रीजन के बारे में बताती है और तीसरी डिजिट जिलों के वर्गों के बारे में बताती है और बाकी तीन डिजिट व्यक्तिगत पोस्ट ऑफिस को आवंटित की जाती है। ये आठों पिन डिजिट भारत के सभी शहरों और प्रांतों से जुड़ी होती हैं। पिन कोड का आबंटन निम्न प्रकार से किया गया है –

पिन कोड संख्या 1 – दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़ ।

पिन कोड संख्या 2 –  उत्तर प्रदेश, उत्तरांचल।

पिन कोड संख्या 3 – राजस्थान, गुजरात, दमन और दीव, दादरा और नागर हवेली ।

पिन कोड संख्या 4-  छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गोवा ।

पिन कोड संख्या 5- आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, यनम (पांडिचेरी)  

पिन कोड संख्या 6- केरल, तमिलनाडु, पांडिचेरी (यनम को छोड़कर), लक्षदीप ।

पिन कोड संख्या 7-  पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, असम, सिक्किम, अरुणाचलप्रदेश, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, मेघालय, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह ।

पिन कोड संख्या 8-  बिहार, झारखंड ।                                                    (भारीतय डाक का इतिहास)

भारतीय डाक विभाग लगातार प्रगति के पथ पर  

वर्ष —-                    कार्य प्रगति 

  • 1766 – लार्ड क्लाइव द्वारा प्रथम डाक व्यवस्था भारत में स्थापित की गयी ।
  • 1774 – वारेन हेस्टिंग्स ने कलकत्ता में प्रथम डाकघर स्थापित किया था ।
  • 1786 -मद्रास प्रधान डाकघर की स्थापना की गयी ।
  • 1793 – बम्बई प्रधान डाकघर की स्थापना की गयी ।
  • 1854 – भारत में पोस्ट ऑफिस को प्रथम बार 1 अक्टूबर 1854 को राष्ट्रीय महत्व के प्रथक रूप से डायरेक्टर जनरल के संयुक्त नियंत्रण के अर्न्तगत मान्यता मिली। 1 अक्टूबर 2004 तक के सफ़र को 150 वर्ष के रूप में मनाया गया। डाक विभाग की स्थापना इसी समय से मानी जाती है।
  • 1863 – रेल डाक सेवा आरम्भ की गयी थी ।
  • 1873 – नक्काशी दार लिफाफे की बिक्री प्रारंभ की गयी ।
  • 1876 – भारत पार्सल पोस्टल यूनियन में शामिल किया गया ।
  • 1877 – वीपीपी (VPP) और पार्सल सेवा आरम्भ की गयी ।
  • 1879 – पोस्टकार्ड आरम्भ किया गया ।
  • 1880 – मनीआर्डर सेवा प्रारंभ की गई थी।
  • 1911  – प्रथम एयर मेल सेवा इलाहाबाद से नैनी डाक से भेजी गई थी।
  • 1935 – इंडियन पोस्टल आर्डर प्रारंभ की हई थी।
  • 1972 – पिन कोड प्रारंभ किया गया था ।
  • 1984 – डाक जीवन बीमा का प्रारंभ किया गया ।
  • 1985 – पोस्ट और टेलिकॉम विभाग प्रथक किये गए थे।
  • 1986 – स्पीड पोस्ट (EME) सेवा शुरू की गयी थी ।
  • 1990 – डाक विभाग मुंबई व चेन्नई में दो स्वचालित डाक प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किये गए थे।
  • 1995 – ग्रामीण डाक जीवन बीमा की शुरुआत की गयी ।
  • 1996 – मीडिया डाक सेवा का प्रारंभ की गयी।
  • 1997 – बिजनेस पोस्ट सेवा को प्रारंभ किया गया था।
  • 1998 – उपग्रह डाक सेवा शुरू किया गया ।
  • 1999 – डाटा डाक व एक्सप्रेस डाक सेवा प्रारंभ की गयी।
  • 2000 – ग्रीटिंग पोस्ट सेवा प्रारंभ की गयी इसका उद्देश्य भारतीय डाक शुभकामनाओं वाले लिफाफे ग्राहकों को उपलब्ध कराना था।
  • 2001 – इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रान्सफर सेवा (EFT) प्रारंभ की गयी ।
  • 2002 – इन्टरनेट आधारित ट्रैक एवं टेक्स सेवा की शुरुआत  (3 जनवरी 2002 से ) प्रारम्भ की गयी। 2003 : बिल मेल सेवा प्रारंभ  (15 सितम्बर 2003 से ) प्रारंभ की गयी थी।
  •  2004 : ई-पोस्ट सेवा की शुरुआत  (30 जनवरी से ) प्रारंभ की गयी थी।
  • 2004 : लोजिस्टिक्स पोस्ट सेवा प्रारंभ की गई  (10 अगस्त se) प्रारंभ की गयी थी। 

भारतीय डाक एवं तार सेवा से संबंधित ऐतिहासिक तथ्य –

 

  • 9 अक्टूबर, 1874 को स्विटजरलैंड के बर्न में यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (UPU) की स्थापना हुई में जापान की राजधानी टोक्यो में हुए यूपीयू कांग्रेस में 9 अक्टूबर को विश्व डाक दिवस के रूप में किया गया था।
  • 1766 में  बंगाल के पहले गवर्नर क्लाइव द्वारा भारत में प्रथम डाक व्यवस्था स्थापित किया गया था ।
  • 1774  में  वारेन हेस्टिंग्स ने कलकत्ता में प्रथम डाकघर स्थापित  31 मार्च 1974 को  किया गया था ।
  • 1786 में  मद्रास प्रधान डाकघर की स्थापना की गयी थी।
  • 1793 में  बम्बई प्रधान डाकघर की स्थापना की गयी
  • 1837 में  तीनो प्रेसीडेन्सी को मिला कर एक अखिल भारतीय डाक सेवा बनाने के लिए अधिनियम लागू किया गया था ।
  • 1850 में  5 नवम्बर, कोलकाता और डायमंड हार्बर के बीच तार (टेलीग्राम) सेवा प्रारम्भ 1852 : स्टैंप्स की शुरुआत हुई थी।
  • 1854 में  भारत में पोस्ट ऑफिस को प्रथम बार 1 अक्टूबर 1854 को राष्ट्रीय महत्व के पृथक रूप से डायरेक्टर जनरल के संयुक्त नियंत्रण के अर्न्तगत मान्यता मिली तथा सम्पूर्ण भारत में वैध डाक टिकटो की शुरुआत  की गई।
  •  भारत  सरकार द्वारा 1 अक्टूबर 2004 को डाक सेवा के 150 वर्ष के रूप में मनाया गया। (नोट – भारतीय डाक की स्थापना 1 अप्रैल 1954 को मानी जाती है।)
  • 1854 में डाक और तार दो विभाग अस्तित्व में आए थे।
  • 1863 में रेल डाक सेवा आरम्भ की गयी थी
  • 1873 में  ‘नक्काशीदार लिफाफे की बिक्री प्रारंभ की गयी ।
  •  1876 में  भारत पार्सल पोस्टल यूनियन में शामिल किया गया था ।
  •  1877 में  वीपीपी (VPP) और पार्सल सेवा आरम्भ की गयी।
  • 1879 में  पोस्टकार्ड आरम्भ किया गया था ।
  • 1880 में मनीआर्डर सेवा प्रारंभ की गई थी ।
  • 1908 में  भारत के 652 देशी राज्यों में से 635 राज्यों ने भारतीय डाक घर में शामिल किया गया था ।
  • 1911 में प्रथम एयर मेल सेवा इलाहाबाद से नैनी डाक से भेजी गई thi.
  • 1914 में  प्रथम विश्व युध्द की शुरूआत में डाक और तार विभागों को मिला दिया गया था ।
  •  1935 में  इंडियन पोस्टल आर्डर प्रारंभ की गयी ।
  • 1949 में 1 जनवरी को भारत के नौ तार घरों आगरा, इलाहाबाद, कानपुर, पटना, जबल पुर आदि में हिंदी में तार सेवा की शुरुआत  की गयी थी ।
  • 1972 के 15 अगस्त को  पिन कोड पद्धति प्रारंभ किया गया था ।
  • 1984 को  डाक जीवन बीमा का प्रारंभ किया गया था ।
  • 1985 में  पोस्ट और टेलिकॉम विभाग प्रथक किये गए ।
  •  1986 में  स्पीड पोस्ट (EME) सेवा शुरु की गयी थी
  • 1995 में  ग्रामीण डाक जीवन बीमा की शुरुआत की गयी ।
  • 1996 में  मीडिया डाक सेवा का प्रारंभ किया गया था ।
  • 1997: को  बिजनेस पोस्ट सेवा को प्रारंभ किया गया था ।
  • 1998 में  उपग्रह डाक सेवा शुरू की गयी ।
  • 1999 में  डाटा डाक व एक्सप्रेस डाक सेवा प्रारंभ  की गयी ।
  • 2000 में  ग्रीटिंग पोस्ट सेवा प्रारंभ की गयी थी।
  • 2001 में  इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रान्सफर सेवा (EFT) प्रारंभ की गयी थी।
  • 2002 की 3 जनवरी को  इन्टरनेट आधारित ट्रैक एवं टेक्स सेवा की शुरुआत की गयी थी।
  • 2003 की  15 सितंबर को  बिल मेल सेवा प्रारंभ की गयी ।
  •  2004  की 30 जनवरी ko  ई-पोस्ट सेवा की शुरुआत हुयी ।
  • 2004  के 10 अगस्त को  लोजिस्टिक्स पोस्ट सेवा प्रारंभ की गई थी।
  • 2011 में श्रीनगर के डल झील में तैरता हुआ डाकघर आरंभ हुआ था।
  •  2013 की 15 जुलाई को तार का सिस्टम खत्म कर दिया गया था ।
  • 2016 की 1 जून को को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत सरकार की 100 प्रतिशत इक्विटी के साथ लिमिटेड कंपनी के रूप में भारतीय डाक भुगतान बैंक (IPPB) की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की थी।
  • 2019 में  डाक विभाग और विदेश मंत्रालय ने मिलकर पासपोर्ट सेवा केंद्र की शुरुआत की थी।

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