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स्वामी विवेकानंद का युवा पीढ़ी को संदेश

स्वामी विवेकानंद का युवा पीढ़ी को संदेश – नौजवानों के नाम स्वामी विवेकानंद का एक खत

ज हम स्वामी विवेकानंद का देश की नयी पीढ़ी को लिखे गए एक पत्र के बारे में जानते हैं। आईये बात करते हैं स्वामी विवेकानंद का युवा पीढ़ी को संदेश के बारे में :-

” हे भाग्यशाली युवा, अपने महान कर्तव्य को पहचानो। इस अद्भुत सौभाग्य को महसूस करो। इस रोमांच को स्वीकार करो। ईश्वर तुम्हें कृपादृष्टि के साथ देखता है और वह तुम्हारी सहायता और मार्गदर्शन के लिए सदैव तत्पर है। मैं तुम्हारे महान बनने की कामना करता हूं। विश्व ने अपना विश्वास तुम्हारे ऊपर जताया है। तुम्हारे बड़े तुमसे उम्मीद रखते हैं। तो युवा का अर्थ है स्वयं में दृढ़ विश्वास रखना, अपने आशावादी निश्चय तथा संकल्प का अभ्यास करना और स्वसंस्कृति के इस सुंदर कार्य में अच्छे इरादों की इच्छा रखना। यह न केवल तुम्हें बल्कि तुमसे जुड़े सभी लोगों को संतुष्टि और पूर्णता देगा।

वास्तव में अपने जीवन को आकार देना तुम्हारे हाथ में है। सद्गुण का अभ्यास करो, सद्गुण के प्रति दृढ़ रहो। सद्गुणों में खुद को स्थापित करो। सदगुणों की प्रभावशाली आभा बनो और अच्छाई का साहसिक अनुसरण करो। युवा इस भव्य प्रक्रिया के लिए बना है। युवा जीवन इन प्रक्रियाओं का सक्रिय विकास और सम्पादन है। तुम्हारा यह समय जीवन की इस अति महत्वपूर्ण और अतिआवश्यक प्रक्रिया के लिए उपयुक्त और अनुकूल कार्यक्षेत्र मुहैया करवाता है।

यह युवा जीवन का विशिष्ट, अति महत्वपूर्ण और उच्चतम मूल्य है। यह महान व्यक्तित्व की रचना का अभिप्राय बतलाता है। यह आत्म-विकास है। यह आत्म निर्माण है। सफल जीवन शब्द का सही आशय जानने का प्रयास करो। जब तुम जीवन के संदर्भ में सफल होने की बात करते हो तो इसका मतलब मात्र उन कार्यों में सफल होना नहीं जिसे तुमने पूरा करने का बीड़ा उठाया था या उठाया है। इसका अर्थ सभी आवश्यकताओं या इच्छओं की पूर्ति कर लेना भर नहीं है। इसका तात्पर्य सिर्फ नाम कमाना या पद प्राप्त करना या आधुनिक दिखने के लिए फैशनेबल तरीकों की नकल करना या अप-टू-डेट होना नहीं है। सच्ची सफलता का सार यह है कि तुम स्वयं को कैसा बनाते हो।

यह जीवन का आचरण है, जिसे तुम विकसित करते हो। यह चरित्र है, जिसका तुम पोषण करते हो और जिस तरह के व्यक्ति तुम बनते हो। यह सफल जीवन का मूल अर्थ है। इसलिए तुम पाओगे कि महत्वपूर्ण मसला सिर्फ जिंदगी में सफलता से जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि जीवन की सफलता से संबंधित है। ऐसा सफल जीवन वह है, जो एक आदर्श महान व्यक्ति बनाने में कामयाब रहे। तुम्हारी सफलता का आकलन इससे नहीं है कि तुमने क्या पाया, बल्कि इससे है कि तुम क्या बने, कैसे जिए और तुमने क्या किया।” — स्वामी विवेकानंद ।।

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(स्वामी विवेकानंद का युवा पीढ़ी को संदेश)

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