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सपने सच हो जाते हैं ? – Do dreams come true?

सपने सच हो जाते हैं ?  – Do dreams come true? 

                                                                                                                    म  लोग  में अपने सपने पूरे न हो पाने के कारण अक्सर नाराज हो जाते हैं और अपनी किस्मत  को कोशने लगते है जबकि ऊपर वाला सबके सपने किसी न किसी रूप में जरूर पूरे करता है चाहे वह जिस रूप में पूरा करे लेकिन सही वक्त आने पर ! हम सब लोगों को अपने पथ पर चलते हुए सही वक्त का इन्तजार करते रहना चाहिए  एक दिन वो जरूर आएगा जब हम लोगों के सपने सच हो जाते हैं ?  – Do dreams come true?  हम लोग इस कहानी  से सीख ले सकते हैं !

कहानी :-

पुराने जमाने की बात है जब पेड़ भी एक दुसरे से बातें किया करते थे !  किसी नदी के किनारे बहुत सुंदर तीन पेड़ थे। एक दिन वह तीनों आपस में चर्चा करने लगे। एक पेड़ बोला कि मेरा सपना है कि  जब वह काटा जाय तो उसकी लकड़ी से दुनियां के सबसे अनमोल रत्न रखने वाला बक्सा  बनाया  जाए !  दूसरा पेड़ बोला कि उसका सपना है कि जब वह काटा जाय तो वह एक सुंदर सा जहाज बनना चाहेगा ताकि उसमे बड़े-बड़े धन्ना सेठ  लोग बैठें । जबकि तीसरा पेड़ बोला देखो भाई मेरा सपना तो ये है कि मैं तो यहीं  पर खड़ा रहकर बहुत ऊंचा उठना चाहता हूँ  ताकि सब लोग उसे स्वर्ग के करीब समझें।

                                   कुछ समय के बाद तीनो पेड़ो को काट दिया गया। पहले पेड़ को जानवरों का चारा रखने का बक्सा  बना दिया गया, दूसरे  पेड़ एक छोटी सी नाव बना दिया गया जबकि तीसरा पेड़  सड़क के किनारे फेंक दिया गया। सब पेड़ आये दिन अपनी किसमत को कोसते और दुखी होते कि जरूर उन्होंने पिछले जन्म में गलत काम किये होंगे जो उनका सपना टूट गया। समय बीतता गया और कुछ समय बाद पहला पेड़ जिस अस्तबल में चारा रखने का बक्सा रखा था, वहाँ एक महिला ने बच्चे को जन्म दिया और उस चारे वाली पेटी का झूला बना दिया गया। अब उसमें दुनियां के  सबसे अनमोल रत्न यानी बच्चे को सुलाया जाता था। कुछ दिन बाद दूसरे पेड़ से बनी नाव एक दिन समुद्री तूफान में फस गई और उस पर सवार आदमी ने तूफान को थमने का आदेश दिया और तूफान थम गया वह आदमी एक बहुत बड़ा राजा था जो भेस बदलकर घूम रहा था और नाव पर सवार था । कुछ समय और बीता  तीसरा पेड़ जो बहुत साल से सडक़ के किनारे पड़ा था उससे एक  सलीब बनायी गई और कुछ दिन बाद उसी  सलीब पर ही प्रभु यीशु ने अपने प्राण त्यागे। सभी पेड़ो के सपने पूरे हो चुके थे लेकिन एक अनोखे अंदाज में । इसलिए कभी अपने आप को कोसना नहीं चाहिए क्यूंकि समय आने पर प्रभु सबके सपने पूरे करता है !!

 

शिक्षा –  

इस कहानी दे हमें ये सीख मिलती है  कि हमें कभी भी  अपने सपने टुटने पर निराश नहीं होना चाहिये क्योंकि भगवान ने आपके लिए कुछ और अच्छा सोचा होगा !!

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