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How to manage Time in Hindi

How to manage Time in Hindi – 80:20 का सिंद्धांत

How to manage Time in Hindi – 80:20 का सिंद्धांत –

ज टाइम मैनेजमेंट की चुनौती समय का प्रबंधन करना नहीं है, बल्कि स्वयं का प्रबंधन करना है। ताकि सही काम को सही ढंग से करने के लिए हमारे पास समय हो और बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकें। दूसरे शब्दों में, ‘टाइम मैनेजमेंट’ का उपयोग जीवन संतुलन को कायम करने पर अपना अपना ध्यान केंद्रित करना ही है। आज हम जानते हैं की How to manage  Time in Hindi .

Time management क्या है ? –

हमारे पास कामों का खजाना  पड़ा है, लेकिन उसे करने के लिए समय बहुत कम है। शायद इसी समस्या को सुलझाने के लिए हमारे हाथों में एक जादुई छड़ी लगी, जिसे हम टाइम मैनेजमेंट कहते हैं, ताकि उन घंटों को खींच कर इतना लम्बा कर सकें कि सारे काम पूरे हो जाएं, लेकिन वास्तव में ऐसा होता है? प्रबंधन लेखक शॉन ड्रिस्कॉल के अनुसार ”हम सभी के पास हर रोज सिर्फ 24 घंटे होते हैं। न इससे ज्यादा, न कम। समय की अवधि निर्धारित होती है। हम समय को बढ़ा नहीं सकते। हम सिर्फ अपनी रुचियों और क्रियाओं को व्यवस्थित कर सकते हैं।” यह सच है कि समय इलास्टिक की तरह खींचा नहीं जा सकता। केवल उसका सही प्रबंधन किया जा सकता है। यह कहा जा सकता है कि किसी भी व्यक्ति के लिए अपनी जिंदगी में समय प्रबंधन का मतलब यही है कि एक दिन में निर्धारित काम निबट जाएं और फिर उसी रात प्राथमिकता के आधार पर अगले दिन की रूपरेखा तैयार कर लिया जाए कि कौन सा काम किस समय और कैसे करना है।

80:20 का सिद्धांत क्या है ? –

असल में टाइम मैनेजमेंट की तकनीक यह सिखाती है  कि बहुत सारे काम एक साथ करने की जगह उनमें से सबसे महत्वपूर्ण काम को परख कर पहले करें , जिससे सभी काम एक सुनिश्चित समय में पूरा हो सकें। इटली के अर्थशास्त्री विल्फ्रेडो परेटो का 80:20 सिद्धांत इसी आवश्यकता को पूरा करता है। यह सिद्धांत आज भी आधुनिक जीवन पर खरा उतरता है। 80:20 सिद्धांत के अनुसार यदि हम किसी कार्य का 80 प्रतिशत भाग अनियोजित ढंग से करें तो हमें केवल 20 प्रतिशत परिणाम ही प्राप्त होंगे। वहीं अगर बाकी बचे 20 प्रतिशत काम केन्द्रित प्रयासों व समय प्रबंधन से करें तो 80 प्रतिशत परिणाम प्राप्त किया जा सकता है। हालांकि 80:20 का यह अनुपात हमेशा एक जैसा नहीं रहता, लेकिन परिणाम की सफलता का प्रतिशत हमेशा अधिक होता है। यही कारण है कि लोग दिन के उन चौबीस घंटों का प्रबंधन कुछ इस तरह करना चाहते हैं कि जल्द से जल्द ज्यादा से ज्यादा काम पूरे कर सकें और उनमें सफलता की गारंटी भी हो।

टाइम मैनेजमेंट क्यों जरूरी है ? –

टाइम मैनेजमेंट क्यों जरूरी है इसका उदाहरण फिलाडेल्फिया के इंटरनेशनल कंसल्टिंग और रिसर्च फर्म के आंकड़े उजागर करते हैं। अध्ययन के अनुसार इन दिनों 25 से 40 प्रतिशत फॉच्यून 500 कंपनियां अपने कर्मचारियों को टाइम मैनेजमेंट और प्रबंधन का पाठ पढ़ाने के लिए प्रबंधन गुरुओं को आमंत्रित कर रहे हैं। यह उदाहरण इस बात की ओर इशारा करता है कि आज के समय में आधुनिक तकनीक के साथ-साथ सफलता के लिए प्रबंधित समय का कितना महत्व है।

दूसरी तरफ वर्तमान परिवेश में बढ़ा हुआ काम भी समय प्रबंधन की मांग कर रहा है। इस बात का समर्थन बियॉन्ड कोड: लर्न टू डिस्टिंगुइश योर सेल्फ इन 9 सिम्पल स्टेप्स के लेखक व सीआईजीनेक्स टेक्नोलॉजी के चेयरमैन राजेश शेट्टी भी करते हैं। इनके अनुसार बाज़ार की प्रतियोगिता और तकनीक में निरंतर परिर्वतन के कारण टाइम मैनेजमेंट आईटी प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि टाइम मैनेजमेंट की आवश्यकता सिर्फ आईटी प्रोफेशनल तक ही सीमित है। अब टाइम मैनेजमेंट को हर छोटे-बड़े काम से जोड़कर देखा जाने लगा है।
मनोवैज्ञानिक डॉ. सुजेन सैक्से-क्लिफोर्ड के अनुसार टाइम मैनेजमेंट तनाव घटाने, काम व व्यक्तिगत जीवन को समृद्ध बनाने का तरीका है। समय का यह नियोजित उपयोग लोगों को अधिक से काम करने में मदद करता है। वहीं दूसरी तरफ मार्टिन की कुशलता समाज वैज्ञानिक कोनिग, जे कार्नेलिअस, क्लीनमन और मार्टिन  के शोध के अनुसार डेडलाइन को समय पर पूरा करने की कवायद टाइम मैनेजमेंट का मुख्य तत्व है। डेडलाइन का दबाव व्यक्ति को आम दिनों की तुलना में ज्यादा प्रबंधित होकर समय नियोजन के लिए प्रेरित करता है। उदाहरण के लिए परीक्षा से कुछ दिन पूर्व छात्र कहीं ज्यादा नियमित अध्ययन करते हैं।

इस शोध से स्पष्ट है कि टाइम मैनेजमेंट लोगों को हर समय ऐसे दबाव की आवश्यकता की पूर्ति करता है, जो आगे बढ़ने के लिए आवश्यक है। टाइम मैनेजमेंट का यह अनुसरण सीधे-सीधे असफलता से दूर भागने का प्रयास है, जिसे प्रेरक तत्व के रूप में इस्तेमाल किया जाने लगा है। हालांकि मोटिवेशन गुरु क्रिस्टोफर एस किंग्स समय प्रबंधन की लोकप्रियता का श्रेय इसकी व्यावहारिक उपयोगिता को देते हैं। प्रिंग्स इसे काम करने की नवीनतम कहते हैं। क्रिस्टोफर ने मेडिकल लैबोरेटरी ऑब्जवर सेमिनार के दौरान जब लैबोरेट्रियन से पूछा कि उनकी सबसे बड़ी चुनौती क्या है? तो अधिकतर लोगों ने जवाब दिया ‘’उनके पास  समय की कमी है’ या ‘वे अपने परिवार को पर्याप्त समय नहीं दे पाते हैं।” इसलिए उन्हें ऐसे नए टाइम मैनेजमेंट की जरूरत  है, जो उन्हें कठिन परिश्रम करने की जगह, स्मार्ट काम करना सिखाए।

How to manage Time in Hindi

टाइम मैनेजमेंट का विकास चक्र –

इतिहास इस बात को और पुख्ता करता है कि समय के साथ साथ जैसे-जैसे लोगों के काम करने के तरीके बदलते गए लोग स्मार्ट तरीके से काम करना सीखते गए। इस प्रक्रिया को हम समय प्रबंधन का क्रमिक विकास परिणाम कह सकते हैं। जो मानवीय प्रयास के कई अन्य क्षेत्रों की तरह ही विकसित हुआ है। इसे विकास वादी प्रक्रिया के नाम से भी पुकारा जा सकता है। लचीली प्रकृति होने के कारण इसमें निरंतरता व परिवर्तन संभव है। इसे समय की मांग के अनुरूप परिभाषित किया जा सकता है। प्रेरक गुरु व लेखक स्टीफन आर कोवी के अनुसार ‘टाइम मैनेजमेंट की विकास प्रक्रिया में हर पीढ़ी अपने पहले वाली पीढ़ी से आगे प्रगति करती है और समय को नए-नए तरीकों से मुट्ठी में करने का प्रयास करती है । इसको हम आगे पीढ़ी दर पीढ़ी इस प्रकार से समझते हैं :-

पहली पीढ़ी –

मानव विकाश की  शुरुआत में टाइम मैनेजमेंट याद रखने की प्रक्रिया से अधिक और कुछ नहीं था। टाइम मैनेजमेंट की यह बहुत सीमित सोच थी। यह हमारे समय तथा ऊर्जा पर पड़ने वाले विभिन्न दबावों को पहचानने और उनसे निबटने की कोशिश थी।

दूसरी पीढी –

दूसरी पीढ़ी ने इस ओर कुछ कदम बढ़ाए। आगे चलकर  टाइम मैनेजमेंट को भविष्य में होने वाली घटनाओं और कामों का समय निर्धारित करने और उसकी तैयारी के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा।

तीसरी पीढी –

सबसे क्रांतिकारी परिवर्तन तीसरी  पीढ़ी में देखे गए। बढ़ते वैश्वीकरण में प्रतिदिन समय नियोजन, प्राथमिकताएं तय करने और समय को नियंत्रित करने के लिए समय प्रबंधन की आवश्यकता महसूस की जाने लगी यही वजह है कि टाइम मैनेजमेंट की पुरानी सोच में प्राथमिकता का महत्वपूर्ण विचार जुड़ा। यानी इसमें जीवनमूल्य स्पष्ट किए जाने लगे और उनके आधार पर कामों के महत्व की तुलना की जाने लगी। इसके अलावा लक्ष्य की अवधि भी निर्धारित की जाने लगी जैसे दीर्घकालीन, मध्यमकालीन और अल्पकालीन। समय प्रबंधन की इस सोच में जीवन मूल्यों के तालमेल के साथ लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में अपना समय और ऊर्जा लगाने की बात पर जोर दिया गया। इसमें दैनिक योजना बनाने की अवधारणा भी शामिल है, जिसका अर्थ है कि आपके द्वारा निर्धारित सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्यों और गतिविधियों को हासिल करने के लिए आपके पास एक स्पष्ट तथा विशेष योजना होनी चाहिए।

चौथी पीढी –

आज जब व्यक्तिगत उन्नति और सफलता बहुत महत्वपूर्ण हो गए हैं। लोगों की सोच में भी परिवर्तन आया है । सार्वजनिक विकास या सहयोगात्मक ढंग से कार्य करने का प्रचलन खत्म  होने लगा है। लोग किसी भी तरह दूसरों को पीछे पर धकेलकर आगे बढ़ना और अपना मुकाम हासिल करना चाहते हैं। साथ ही यह सोच भी पनप चुकी है, कि एक ढर्रे पर काम करने से कहीं अच्छा है, सही  समय पर जरूरत के मुताबिक समय का प्रबंधन किया देखने जाए। वर्तमान पीढ़ी टाइम मैनेजमेंट शब्द को ही गलत मानती है। आज टाइम मैनेजमेंट की चुनौती समय का प्रबंधन करना नहीं है, बल्कि स्वयं का प्रबंधन करना है। ताकि को सही ढंग से करने के लिए हमारे पास समय हो और बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकें। टाइम मैनेजमेंट जीवन के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना कि व्यक्ति के काम के लिए। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में टाइम मैनेजमेंट की आवश्यकता मानवीय संबंधों को बनाए रखने के लिए भी महसूस की जाने लगी है। व्यक्ति को नाम और पैसे के साथ अच्छे संबंध विकसित करने या मानवीय आवश्यकताओं को पूरा करने का समय भी चाहिए। संक्षेप में कहें तो टाइम मैनेजमेंट का उपयोग जीवन संतुलन को क़ायम करने पर अपना ध्यान केन्द्रित करना है। संभव है, आगे चलकर इसमें और भी कई परिवर्तन देखने को मिलें।

मौजूदा समय में, टाइम मैनेजमेंट –

टाइम मैनेजमेंट को हर पीढ़ी ने अपनी आवश्यकताओं के अनुसार देखा और उसी के अनुसार अपने साधन भी जुटाए। शुरुआत में लोग जरूरी बातों को याद रखने के लिए उसे किसी बड़ी घटना से जोड़ देते थे। जैसे घर में किसी बच्चे के जन्मदिन को याद रखने के लिए उसे बड़े त्यौहार या घटना से जोड़कर याद रखा जाता था। फिर शुरू हुआ पेन-पेन्सिल का दौर। लोगों ने जरूरी बातों को नोट्स और कार्यसूची (चेकलिस्ट) बनाकर लिखना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे प्लानर, कैलेंडर, डायरी और अप्वाइंटमेंट बुक समय का लेखा-जोखा रखने का साधन बन गए।

फिर दौर आया तकनीकी का। तकनीकी ने आम आदमी तक अपनी पहुंच बनाई और समय प्रबंधन के साधनों का रूप बदल कर रख दिया। डायरी की जगह डिजिटल डायरी और कम्प्यूटर इस्तेमाल होने लगे। इनमें अलार्म और रिमाइंडर लगे थे। जो जरूरी बातें नोट करने के साथ उन्हें याद भी दिलाते थे। लेकिन मल्टीटास्क जेनेरेशन के लिए कम्प्यूटर और डिजिटल डायरी पर्याप्त नहीं थे, उन्हें टाइम मैनेजमेंट के लिए अपने सबसे करीबी साथी यानी मोबाइल और लैपटॉप की आवश्यकता पड़ने लगी। जेनेक्स्ट कहलाने वाली आज की पीढ़ी इन जरूरतों को देखते हुए मोबाइल और लैपटॉप समय प्रबंधन के लिए टाइम प्लानर की सुविधा के साथ विशेष रूप से विकसित किए गए हैं। बाज़ार में इन उत्पादों के अलावा डिजिटल पेपर जैसे अन्य कई उत्पात उपलब्ध हैं। How to manage Time in Hindi

कुल मिलाकर इन साधनों का उद्देश्य इस बात पर टिका है कि समय प्रबंधन को सर्वश्रेष्ठ ढंग से कैसे किया जाए। आज बाज़ार इस विषय पर ढेरों किताबों से अटा पड़ा है। इन दिनों अधिकतर मोटीवेशन किताबें और वर्कशॉप समय प्रबंधन के सुझाव देते नज़र आते हैं। प्रेरक गुरु एंथोनी रॉबिन्स के अनुसार ‘परिवार और काम को पर्याप्त समय देने की इच्छा, काम का दबाव, कार्य में उत्साह की कमी, खराब योजना, उपयोग सहयोगात्मक तरीके से कार्य न कर पाने की मजबूरी, प्रबंधन की कमियां आदि ऐसे बहुत से कारण हैं जो व्यक्ति  के सम्पूर्ण प्रदर्शन पर कुप्रभाव डालते हैं। इन करना समस्याओं को हम समय प्रबंधन की अवहेलना या अनदेखी से जोड़ सकते हैं।’ अधिकतर टाइम मैनेजमेंट कार्यक्रम लोगों को इसी अनदेखी का अहसास करवाने  का काम करते हैं। इसके अलावा अब ईमेल और मोबाइल के इनबॉक्स में दैनिक, साप्ताहिक टाइम । मैनेजमेंट न्यूज़लैटर, प्रेरक किताबें, वर्कशॉप और सेमीनार व्यक्ति के जीवन में टाइम मैनेजमेंट की आवश्यकता के प्रति वैचारिक या सैद्धांतिक भूमिका निभाने व मार्गदर्शन करने लिए उपलब्ध हैं।

मैनेजमेंट की किताबों में टाइम मैनेजमेंट को समय व कार्यक्षमता बढ़ाने की प्रक्रिया का विकास और साधन माना गया है। हालांकि टाइम मैनेजमेंट की उपयोगिता की बहुत सीमित व्याख्या हुई है। दूसरी तरफ वेबस्टर डिक्शनरी समय को घटनाओं के क्रम के रूप में परिभाषित करती है। इस अर्थ में यदि टाइम मैनेजमेंट को समझें तो वह घटनाओं का प्रबंधन है। कोई भी घटना समाज, काम, परिवार व रिश्तों पर प्रभाव डाले बिना नहीं रह सकती। व्यक्तिगत विकास की अवधारणा के साथ लोगों में यह सोच भी पनप रही है कि दुनिया में अच्छे लोग नहीं हैं, अगर मैं परिवार के साथ ज्यादा समय बिताऊंगा तो खुश रहूंगा। अब टाइम मैनेजमेंट का उद्देश्य सिर्फ कार्य को व्यवस्थित करने तक सीमित नहीं है। व्यक्ति परिवार को पर्याप्त समय देने के लिए इसका खुल कर उपयोग कर रहा है। ताकि वह परिवार व कार्य के बीच संतुलन रख सके। टाइम मैनेजमेंट के लक्ष्य में कितने ही काम और जुड़ जाएं, लेकिन फिर भी टाइम मैनेजमेंट का मूल उद्देश्य काम में स्पष्ट निर्णय की कमी को दूर करना ही है । How to manage Time in Hindi

बाजार ने भी भुनाया टाइम मैनेजमेंट को –

बात भले ही कुछ अटपटी लगे, लेकिन टीवी सेट पर दिखाए जाने वाले विज्ञापनों पर नजर डालें तो लगभग हर उत्पाद के विज्ञापन में समय को बचाने का दावा किया जाता है। अब वह डिटरजेंट ही क्यो न होडालो, निकालो और हो गया, जैसी पंच लाइने समय की बचत का संदेश देती नजर आती हैं। कहने का मतलब यह है कि आज बाजार में जिन उत्पादों का सीधा सबंध टाइम मैनेजमेंट से नहीं है, वे भी टाइम मैनेजमेंट को भुना रहे है। शेविंग क्रीम से लेकर रेडीमेड फूड, वॉशिंग मशीन से लेकर वॉशिंग पाउडर तक में समय की बचत कराते प्रतीत होते हैं। एआरएस टेक्नीका पीसी एन्युजिऑस्ट रिसोर्स के अनुसार बाज़ार में उपलब्ध आधे से अधिक गजेट और तकनीकी समय प्रबंधन या समय की बचत करने पर काम कर रहे हैं ताकि उस समय का उपयोग दूसरे कामों के लिए किया जा सके। इसका उदाहरण है ब्रॉडबैंड सुविधा जो कम से कम समय में इटरनेट सर्फिग और ईमेल के विकल्प उपलब्ध करवाती है।

आपके समय की कीमत –

यदि अपने जीवन मे समय की कीमत का अदाज लगाना चाहते हैं तो इस फार्मूले को अपना सकते हैं। अगर आप किसी संगठन के लिए काम करते हैं, तो गणना कीजिए कि आपके समय की लागत कितनी है। इसके लिए अपने वेतन, पेरोल टैक्स, कार्यालय में जितनी जगह लेते हैं, उपकरण और सुविधाएं जो आप इस्तेमाल करते हैं, खर्च, प्रशासनिक सहयोग आदि को जोड़ लें। अगर आपका अपना काम है तो अपने व्यापार को चलाने की वार्षिक लागत कितनी है, इसका अनुमान लगाइए। इस आंकड़े में अनुमानित लाभ की मात्रा जोड़ दीजिए, जो आपके काम के कारण हुई। अगर आप सामान्य घंटे यानी 9 से 5 बजे तक काम करते हैं, तो आपने हर साल लगभग 200 दिन उत्पादन कार्य में लगाए। वहीं अगर आप प्रतिदिन साढे सात घंटे काम करते हैं, तो यह साल के 1,500 घंटों के बराबर हुआ। इन आंकड़ों से, अपने घंटों की कीमत लगाइए। यह आपके समय की कीमत का तार्किक अनुमान बताएगा कि आपका समय कितना कीमती है।

प्रबंधन गुरु पीटर डकर के अनुसार समय प्रबंधन कैसे करें –

प्रबंधन गुरु पीटर ड्रकर के अनुसार समय व्यर्थ करना हमारी स्वयं की पैदा की हुई आदत है जिस पर नियंत्रण किया जा सकता है। उनके अनुसार समय व्यर्थ कहां-कहां हो सकता है :-

  • एक कार्य को निर्धारित या आवश्यक समय से अधिक देर से करने में ।
  • निर्णय लेने की क्षमता न होने पर ।
  • असुविधाजनक समय सारणी बनाने में ।
  • हर काम स्वंयं करने  में ।
  • आलस्य करने में ।
  • कार्य को टालने की आदत से ।
  • किसी कार्य को करने की कुशलता न होने मे ।
  • लगातार अस्वस्थ रहने में ।
  • योजनाबद्ध तरीके से कार्य न करने में ।
  • फोन पर अनावश्यक लंबी बात करने में ।

अर्थात समय का सदुपयोग ही समय का नियोजन है और समय पर लगाम लगाकर हम लंबी दूरी की रेस भी आसानी से जीत सकते है।

प्रबंधन गुरु पीटर ड्रकर के अनुसार समय साधने के लिए ये करना चाहिए :

  • आत्मसंयम व धैर्य रखें ।
  • आज का कार्य कल पर न रखें ।
  • कार्यों को समयबद्ध कार्य सूची के अनुसार करें ।
  • कार्यों को ‘महत्वपूर्ण कार्य सबसे पहले’ के सिंद्धात पर ही करें ।
  • त्वरित निर्णय लें ।
  • घड़ी को अपने हिसाब से चलाएं न कि आप घड़ी के अनुसार चलें ।
  • घड़ी हमेशा पांच मिंट आगे रखें ।

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