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बच्चे को परफैक्ट कैसे बनाएं ?

बच्चे को परफैक्ट कैसे बनाएं ? – How to make child perfect ?

बच्चे को परफैक्ट कैसे बनाएं ? – How to make baby perfect? :-

                                                                                                                                                               बच्चे के जन्म के साथ ही हम लोगों के बहुत से सपने और बहुत सी आशाएं बच्चे के साथ जुड़  जाती हैं । परफेक्ट किड’ की उम्मीद तो सभी करते हैं, लेकिन सफल बहुत कम हो पाते हैं। इस कवायद में हम अगर आज से ही अपने बच्चे के सफर को भी जोड़ लें ताकि आपकी मेहनत पूरी तरह रंग ला सके। चलिए जानते हैं कि बच्चे को परफैक्ट कैसे बनाएं ?How to make child perfect? :-

 

‘क्या बनोगे मुन्ना ‘ :-

                                           हमारा  मासूम बच्चा हमारा एक सपना होता है और हमारा भविष्य भी । हर बच्चे में एक ऐसे भविष्य का बीज छुपा होता है जो सही फले-फूले तो ऐसा पेड़ बन सकता है कि उसकी छांव में आपका जीवन निहाल हो सकता है। लेकिन, क्या कभी आपने ये सोचा है कि बच्चों के सपने भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं, जितने कि हम बड़ों के। बचपन में आप अक्सर उससे पूछते रहते हो , ‘क्या बनोगे मुन्ना’, यह एक ऐसा अर्थपूर्ण शब्दांश है जो अथाह मायने रखता है। बच्चे का सपना पूरा हो और आपकी भी आस फले तो इसके लिए दस बिंदुओं की एक गाइडलाइन आज़माएं और अपने बच्चों के  मासूम सपनों को बचाएं ।

  1. क्वांटिटी और क्वालिटी टाइम बिताएं
  2. टीवी की हो सीमा
  3. पढ़ाई के अलावा पढ़ाई
  4. अच्छी आदतें विकसित करें
  5. रोल मॉडल हों आप
  6. रिश्ता भी हों मजबूत
  7. शामिल हो उनमें
  8. सीमाएं भी जरूरी
  9. मन से मन जुड़े
  10. प्रार्थना

 क्वांटिटी और क्वालिटी टाइम बिताएं :-

                                                                  जब कभी आप बच्चों के साथ समय बिताएं तो उन्हें सार्थक मुद्दों की चर्चा में हिस्सेदार बनाएं। अगर बच्चे कुछ बड़े हों तो बातचीत स्वस्थ और मजेदार होनी चाहिए। मसलन स्कूल, कॉलेज की घटनाओं, परिवार के छोटे-छोटे कामों, करंट अफेयर्स और उनके दोस्तों के बारे में बात करें। कुछ मां-बाप बड़े होते बच्चों के साथ चर्चा नहीं करते लेकिन जब वे टीन एज में पहुंचते हैं तो सब कुछ जान लेना चाहते हैं तब यह संभव नहीं हो पाता । इसलिए बातचीत में गैप  कभी नहीं आना चाहिए ।

 

टीवी की हो सीमा :-

                                 केसर फैमिली फाउंडेशन के अध्ययन के अनुसार 2 से 5 साल तक के बच्चे प्रतिदिन दो घंटे टीवी देखते हैं और 6 से 11 साल के बच्चे रोजाना 3 घंटे से ज्यादा टीवी देखते हैं। चाइल्ड डवलपमेंट बुक के बेस्ट सेलिंग लेखक राबर्टा बर्न्स के अनुसार, बच्चों की मानसिक अपरिपक्वता के कारण वे बड़ों से कहीं ज्यादा इस सच को मानने के लिए तैयार रहते हैं कि जो कुछ भी वे देख रहे हैं वह सच है। इसका असर बच्चों पर गहराई से पड़ता है। इसलिए उनके टीवी देखने के समय की सीमा जरूर निश्चित होनी चाहिए साथ ही उन्हें उपयोगी जानकारी के पोषण की बेहद जरूरत होती है। समय- समय पर उन्हें यह पोषण भी उपलब्ध होना चाहिए। 

 

पढ़ाई के अलावा पढ़ाई :-

                                       बच्चों के साथ समय बिताने का बेहतरीन तरीका है कि उन्हें साथ लेकर कुछ अच्छी किताबें पढ़ी जाएं। यह वक्त आपको बच्चों से बांधने में मददगार सिद्ध होगा। इस वक्त माहौल को मौज मस्ती से भरपूर और हल्का फुल्का बनाएं ताकि बच्चे फैमिली टाइम की परिभाषा समझ सकें। फ्रॉम वंडर टू विजडम के लेखक चार्ल्स ए स्मिथ के अनुसार, कहानियों से बच्चे बहुत कुछ सीखते हैं। इसलिए कुछ अच्छी कहानियों के कलेक्शन वाली किताबें चुनकर बच्चों के साथ इंजॉय करें।

 

अच्छी आदतें विकसित करें :

                                                कुछ छोटी और अच्छी आदतों का अभ्यास बच्चों से जरूर करवाएं । उदाहरण के लिए चैरिटी या केयरिंग जैसी चीजें सिखाने के लिए उनके बारे में बता देना पर्याप्त नहीं है बल्कि उन्हें किसी नर्सिंग होम, अनाथालय या वृद्धाश्रम में ले जाकर इन चीजों को व्यवहारिक रूप से सिखाएं।

 

रोल मॉडल हों आप :-

                                 जो चीजें हम खुद पर लागू नहीं करते उन्हें बच्चों को सिखाना आसान नहीं होता। उसे केवल उन चीजों के लिए तैयार करें जिन्हें आप खुद व्यवहारिक रूप से काम में लाते हैं ताकि वे आपका अनुसरण कर सकें। जो चीजें व्यवहारिक या सामाजिक नहीं हैं उन्हें बच्चों के सामने न करें ।

 

रिश्ता भी हों मजबूत :-

                                         एक स्वस्थ और मजबूत वैवाहिक जीवन न केवल आपके लिए फायदेमंद है, बल्कि बच्चे के विकास में भी बेहद मददगार है। आपके अच्छे रिश्ते उसके असामाजिक व्यवहार में रुकावट बनेंगे ईएम हीथर रिंगटोन के शोध के अनुसार, तलाक के दो साल बाद उन दंपतियों के बच्चों की मानसिक योग्यता में काफी कमी पाई गई।

 

शामिल हो उनमें :-

बच्चों के साथ उनकी गतिविधियों में शामिल हो जाने का सबसे बड़ा फायदा होगा कि उनके सभी कामों की आपको पूरी जानकारी होगी। उनके दोस्त बनकर आप अपने सुझावों से उनमें अच्छी आदतें, नैतिक मूल्य व जिम्मेदारी का भाव उत्पन्न करने में सफल होंगे।

 

सीमाएं भी जरूरी :-

बच्चों को यह महसूस करवाएं कि जिन चीजों पर आपने रोक लगाई है वे वाकई में उसके लिए नुकसानदायक हैं। बच्चों को गुस्से के बजाय विनम्रता और प्रेम से अनुशासन की आदत डालें।

मन से मन जुड़े :-

एक अस्वस्थ संस्कृति का सामना करने और बच्चों को उससे बचाने के लिए मम्मी-पापा  (आप )  बच्चों के साथ ग्रुप  मीटिंग कर सकते हैं। जिसमें बच्चों से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ उनकी समस्याओं का हल खोजा जाना चाहिए।

प्रार्थना :-

हम बच्चों को प्रेरित तो कर सकते है, लेकिन उनके दिलों पर नियंत्रण नहीं बना सकते। इसलिए उनकी अच्छी आदतों के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें ।

 

बच्चे को परफैक्ट कैसे बनाएं ?

चार सूत्री फार्मूला :-

  1. प्रतिभा
  2. प्रेरित करें
  3. मददगार बनें
  4. विश्वास करें

प्रतिभा :-

               बच्चे की प्रतिभा का पता लगाएं। कुछ क्षेत्रों में बच्चे की जन्म जात प्रतिभा जरूरी होती है और कुछ में प्रशिक्षण आवश्यक होता है। प्रतिभा के आधार पर उसके लिए आगे का रास्ता तय करें।

प्रेरित करें  :-

 अपने बच्चे को कभी भी निराश न करें, क्योंकि आपका कहा एक-एक शब्द उसके लिए दुनियादारी का निचोड़ बन जाता है।

 

मददगार बनें :-

उसकी प्राथमिकताएं बनाने में उसकी मदद करें। कई बच्चे ऑल राउंडर होते हैं लेकिन उनके लिए भी प्राथमिकताएं तय होनी चाहिए ताकि उनकी कुशलताओं का विकास समुचित रूप से हो सके।

विश्वास करें :-

सबसे मुख्य होगा आपका विश्वास । उसे भरोसा दिलाएं कि हर कदम पर आप उसके साथ है और जितना मार्गदर्शन आप दे सकते है उसमें कतई कोताही न बरतें । बच्चे के हर कदम साथ रहें !

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