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भोजन कैसे करें ?

भोजन कैसे करें ? – खाना कैसे खाना चाहिए ?

अजीब विंडंबना है की मनुष्य प्राचीन काल से ही दिन भर भोजन के लिए ही सबसे अधिक दौड़ धूप करता है, लेकिन जब भोजन  करने का वक्त अत है तो मनुष्य के पास सबसे कम समय भोजन करने के लिए ही होता है। आज हम जानते हैं कि स्वस्थ जीवन के लिए हमें खाना कैसे खाना चाहिए ? अथवा हम भोजन कैसे करें ? जिससे लम्बे समय तक स्वस्थ रहें । आईये आगे जानते हैं :-

हमेशा ध्यान से भोजन करें

ध्यान के साथ खाया गया भोजन बेहद सुखद होता है। हम सलीके से बैठते हैं। हमें अपने आस-पास बैठे लोगों का एहसास रहता है। हमें पता होता है कि हमारी थाली में क्या भोजन रखा है। देखने में सहज लगता है, लेकिन इसके लिए गहन अभ्यास चाहिए। भोजन का प्रत्येक निवाला ब्रह्मांड से आया दूत होता है। जब हम सब्जी का एक टुकड़ा उठाते हैं, हम उसे आधे सैकंड के लिए देखते हैं। हम भोजन के उस टुकड़े को ध्यान से देखकर उसे पहचानते हैं कि वह गाजर का टुकड़ा है या गोभी का, भोजन करते समय हमें यह मालूम होना चाहिए कि जो हम खाने वाले हैं वह है क्या? इसे हम अपने ध्यान के माध्यम से पहचानते हैं। पहचानने की यह प्रक्रिया सैकंड के भी छोटे हिस्से जितना समय लेती है ।

भोजन चबा कर खाएं

ध्यान से खाने पर हम पहचानते हैं कि हमने निवाले के रूप में क्या उठाया है। जब हम उसे मुंह में डालते हैं, तो यह जानते हैं कि अपने मुंह में हम क्या रख रहे हैं। उसे चबाते हैं, तो जानते हैं कि हम या चबा रहे हैं। यह बहुत सहज है। हम लोगों में से कुछ, गाजर के उस टुकड़े को देखते हुए उसमें पूरे ब्रह्मांड को देख पाते हैं, उसमें धूप या पूरी पृथ्वी को देख सकते हैं। ब्रह्मांड से यह निवाला हमारे पोषण के लिए आता है।                                                                                       (भोजन कैसे करें ?)

बेफिक्र होकर खाना खाएं

निवाले को मुंह में रखने से पहले उसकी ओर मुस्कुराना अच्छा लगता है। आप उसे चबाएंगे, तब आपको यह पता होगा कि आप गाजर चबा रहे हैं। भोजन के उस निवाले के साथ दूसरा कुछ भी मुंह में न डालें जैसे आपकी योजनाएं, आपकी चिंताएं या आपका डर। सिर्फ निवाले को मुंह में डालें। और जब उसे चबाएं तो सिर्फ उसे ही चबाइए न कि अपनी योजनाओं या विचारों को। आपमें अपने वर्तमान क्षण में जीने की क्षमता है। यानी व्यक्ति जहां है वह सम्पूर्ण रूप से वहीं रह सकता है। यह सरल है, लेकिन गाजर के टुकड़े का आनंद उठाने के लिए आपको थोड़े प्रशिक्षण की आवश्यकता है। यह अपने आप में एक चमत्कार होता है।

खाने का आनंद लेते हुए खाएं

हम साथ बैठकर संतरे की हर फांक के साथ उस समय का भरपूर आनंद उठाते हैं। संतरे को हथेली पर रखकर उसे देखते हुए सांस भीतर और बाहर करते हैं जिससे कि संतरा यथार्थ बन जाए। यदि हम यहां पूरी तरह से उपस्थित नहीं, तो संतरा भी वहां नहीं है। और संतरे का अनुभव भी वास्तविक नहीं रहता। कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो संतरा खाते तो हैं, लेकिन फिर भी उसे नहीं खाते। वे संतरे के साथ अपना दुख, भय, क्रोध, भूत और भविष्य चबाते रहते हैं। उनका शरीर और मस्तिष्क दोनों एक साथ वहां उपस्थित नहीं रहते।

भोजन को पूरे स्वाद के साथ ग्रहण करें

जब आप ध्यान के साथ सांस लेने का अभ्यास करते हैं तब सचमुच वहीँ पर उपस्थित होते हैं। यदि आप यहां हैं तो जीवन भी यहीं है। संतरा जीवन का संदेश वाहक है। जब आप संतरे को देखते हैं, आप जान पाते हैं कि यह फल कैसे बड़ा हुआ, फिर पीला हुआ, संतरा बना और इसमें उपलब्ध एसिड चीनी में परिवर्तित हुआ। संतरे के पेड़ को इस उत्कृष्ट कला कृति को बनाने में कितना समय लगा। जब आप वाकई यहां होते हैं और संतरे को देखकर सोच-विचार करते हुए सांस लेते और मुस्कुराते हैं तो संतरा चमत्कार बन जाता है। यह आपको भरपूर खुशी देने के लिए पर्याप्त है। आप संतरे को छीलते हैं, उसकी महक सूंघते हैं, उसमें से एक फांक लेकर उसे ध्यानपूर्वक मुंह में रखते हैं और अपनी जीभ को उसके रस से परिचित होने देते हैं। इसे कहते हैं संतरे को पूरे मन से ध्यान समेत खाना। यह जीवन में चमत्कारों को संभव बनाता है। यह आनंद को संभव बनाता है।

खाना खाते समय मुस्कराएं और खुश रहें

दूसरा चमत्कार संघ यानी वह समुदाय है जहां हर व्यक्ति समान तरीके से अभ्यास कर रहा होता है। उदाहरण के लिए मेरे सामने बैठी महिला जो अपना नाश्ता करते हुए सचेतन का अभ्यास कर रही है। कितना अद्भुत है यह! वह अपना भोजन एकाग्रचित होकर छू रही है। मेरी तरह वह भी अपने भोजन के हर निवाले का आनंद ले रही है। समय-समय पर हम एक दूसरे को देखते और मुस्कुराते हैं। यह मुस्कान जागृति की है। यह साबित करती है कि हम खुश हैं और जीवित हैं। यह व्यवहार-कौशल से जुड़ी औपचारिकता नहीं है। यह मुस्कान बोध की भूमि से जन्मी खुशी की है।

इस मुस्कान में उपचार की शक्ति होती है। यह आपका और आपके साथी का उपचार कर सकती है। जब आप इस तरह निर्मल होकर मुस्कुराएंगे तो आपके सामने बैठा व्यक्ति भी मुस्कुराएगा। संभव है, इस प्रक्रिया के पूर्व सामने वाले की मुस्कुराहट पूर्ण न हो। उसमें शुद्धता केवल 90 प्रतिशत हो। लेकिन अगर आप मन से मुस्कुराते हुए अभिवादन करेंगे तो अपने सामने बैठे व्यक्ति को जवाब में 100 प्रतिशत शुद्ध मुस्कुराहट उत्पन्न करने की ऊर्जा देंगे।                                                   (भोजन कैसे करें ?)

फलस्वरूप उसके भीतर उपचार की शक्ति स्वतः काम करने लगेगी। भोजन की इस प्रक्रिया में आप उसके रूपांतरण और स्वस्थ्य निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अपनी और अपने आस-पास बैठे लोगों की उपस्थिति का आनंद उठाने के लिए शांति महत्वपूर्ण है। इस तरह की शांति सजीव, शक्तिशाली, पोषक और रूपांतरण में सक्षम होती है। यह दमनकारी, कष्टदायक या उदासी का पर्याय नहीं होती, बल्कि कई बार इसे तूफानी शांति कहा जाता है क्योंकि यह बहुत शक्तिशाली होती है। हम मिलकर इस तरह की प्रभावशाली शांति उत्पन्न कर सकते हैं।

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