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कैक्टस की देखभाल कैसे करें ?

कैक्टस की देखभाल कैसे करें ? – कैक्टस Cactus के प्रकार –

कैक्टस की देखभाल कैसे करें ? – कैक्टस Cactus के प्रकार –

कैक्टस भले ही एक कांटेदार पौधा है, लेकिन इसके चटख रंग वाले फूल पहली नज़र में ही मन मोह लेते हैं। पानी की किल्लत वाले इलाकों या गर्मी के मौसम में यह बगिया के लिए किसी वरदान से कम नहीं लगते है । कैक्टस के बारे में और अधिक जानते  हैं और यह भी जानते हैं कि कैक्टस  की देखभाल कैसे करें ?

कैक्टस (cactus)  किसे कहते हैं –

कैक्टस (Cactus) एक जीव वैज्ञानिक कुल का पौधा होता है जो अपने मोटे, फूले हुए तनों में पानी बटोर कर शुष्क व रेगिस्तानी इलाकों में परिस्थितियों के अनुसार जिन्दा रहने और अपने कांटों से भरे हुए रूप और आकार  के लिए जाना जाता है। इसकी लगभग १२७ वंश हैं  और  १७५० जातियाँ अभी तक खोजी जा चुकी हैं । कैक्टस की सारी की सारी  प्रजातीयां उत्तर व दक्षिण अमेरिका की  हैं। इनमें से केवल एक जाति ही  अफ़्रीका और श्रीलंका में बिना मानवीय हस्तक्षेप के पूर्व में पहुँची थी। माना जाता है इसे पक्षियों द्वारा फैलाया गया होगा । सभी  कैक्टस लगभग  गूदेदार पौधे होते हैं जिनके तनों-टहनियों में विशेषी करण से पानी बच जाता है। इनके पत्तों ने भी विशेषी करण से कांटो का रूप धारण किया होता है । कैक्टस को हिंदी में नागफनी कहा जाता है।

कैक्टस की खास किस्में –

जैसा कि हम पहले भी बता चुके हैं, कि  कैक्टस कई प्रकार का होता है, जिसमें से कुछ खाश किस्मों का वर्णन हम नीचे कर रहे हैं।

1. एकाइनोसीरियस –  इस बेलनाकार व मोटे कैक्टस में कांटों की कतार लंबाई में होती है। इसकी बढ़वार धीमी होती है, पर फूल आकर्षक व चटख रंगों के होते हैं।

2. ट्राइकोसीरियस – ये कैक्टस  लंबे किस्म के होते  हैं। इनका आकार बेलन नुमा व कांटे लंबाई में कतारों में होते हैं।

3. सीफेलोसीरियस – इस तरह के कैक्टस अपेक्षाकृत तेजी से बढ़ते हैं। बड़े आकार के इन पौधों में सुंदर रोए दार कांटे होते हैं । इनके छोटे आकार वाले फूल शाम के समय खिलते हैं।

4. फेरोकैक्टस –  बड़े आकार के ये कैक्टस गोलाकार होते हैं। इनमें बहुत सारे लंबे कांटे पाए जाते हैं।

5. मेमीलेरिया – इस किस्म के कैक्टस गोल, अंडाकार या बेलननुमा होते हैं। इनके कांटे गुच्छों में सीधे या हुकनुमा और फूल क्रीम, लाल या पीले रंग के होते हैं।

6. एपीफाइलम – ये कैक्टस कम व गूदेदार (सेकुलेंट) किस्म के पौधे अधिक दिखते हैं। इनका तना चपटा, लंबा व गूदेदार और पत्तियों का रंग गुलाबी होता है।

7. क्रिसमस कैक्टस व ईस्टर कैक्टस – ये कैक्टस चपटे, पतले, जोड़ युक्त तने व सुंदर गुलाबी या लाल रंग के फूलों वाले पौधे होते हैं। क्रिसमस कैक्टस दिसंबर व ईस्टर कैक्टस अप्रैल में खिलते हैं। क्रिसमस कैक्टस के फूल गुलाबी व ईस्टर कैक्टस के फूल लाल होते हैं।

कैक्टस की देखभाल –

हम कैक्टस कि देखभाल निम्न प्रकार से कर सकते हैं :-

मिटटी –

कैक्टस को हल्की रेतीली मिट्टी में लगाना चाहिए। गमलों के लिए एक भाग गोबर की सड़ी हुई खाद, दो भाग रेत, एक भाग लकड़ी के कोयले के टुकड़े, एक भाग पत्ती की खाद व एक भाग दोमट मिट्टी का मिश्रण अच्छा रहता है।

पानी की मात्रा –

कैक्टस को गर्मियों में हफ्ते में एक बार और सर्दियों में पखवाड़े में एक बार सिंचाई पर्याप्त है।

प्रकाश व्यवस्था

कैक्टस के पौधों को पर्याप्त प्रकाश व् तेज धूप की  जरूरत होती है इसलिए इन्हें ऐसी जगह लगाएं जहां दिन में काम से काम 5-6 घंटे कि तेज धुप आती हो ।।

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